AIN NEWS 1: हरियाणा में अपराध नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे डीजीपी ओ. पी. सिंह के ऑपरेशन ट्रैकडाउन ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था में एक नई ऊर्जा भर दी है। लगातार चल रही कार्रवाई ने कई लंबे समय से फरार और चिह्नित अपराधियों की कमर तोड़ दी है। लेकिन इस व्यापक अभियान ने एक दूसरी चुनौती भी सामने खड़ी कर दी है—जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों का बोझ।

3748 अपराधी पकड़े गए, जेलें हुईं फुल
ऑपरेशन ट्रैकडाउन शुरू होने के बाद से हरियाणा पुलिस अब तक 3748 अपराधियों को पकड़ चुकी है। इनमें लूट, चोरी, अवैध हथियार, तस्करी और गंभीर अपराधों में शामिल कई मोस्ट वांटेड अपराधी भी शामिल हैं। पुलिस की तेज कार्रवाई के कारण इन सभी को अब कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार अदालत और जेल भेजा जा रहा है।
हालांकि, इसी बिंदु पर सबसे बड़ी समस्या सामने आई है — जेलों में जगह की भारी कमी। प्रदेश की कुल 19 जेलें पहले से ही ओवरलोड थीं, और अब नए गिरफ्तार कैदियों के आने से चुनौती और बढ़ गई है।
हरियाणा की जेलों में 4353 कैदी क्षमता से अधिक बंद
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा की सभी जेलें पहले से ही अपनी निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक कैदियों को समायोजित कर रही हैं। वर्तमान में प्रदेश की जेलों में क्षमता से 4353 अधिक कैदी बंद हैं। यह संख्या अपने आप में बताती है कि जेल विभाग पहले से दबाव में था और अब ऑपरेशन ट्रैकडाउन की वजह से इस दबाव में और इजाफा हो गया है।
जेलों में ओवरक्राउडिंग का मतलब है—
सुरक्षा जोखिम बढ़ना
कैदियों के लिए मूलभूत सुविधाओं की कमी
जेल स्टाफ पर अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ
स्वास्थ्य सुविधाओं और अनुशासन व्यवस्था पर असर
इस स्थिति को देखते हुए कई विशेषज्ञ अब हरियाणा सरकार से जेल संरचना का विस्तार और नए सुधार गृहों के निर्माण जैसे दीर्घकालिक कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
जेल विभाग की प्रतिक्रिया—‘स्थान की कोई कमी नहीं’
बढ़ते दबाव और सवालों के बीच हरियाणा जेल विभाग के डीजी आलोक राय का बयान भी सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विभाग इस स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और जेलों में अभी भी पर्याप्त जगह उपलब्ध है।
उनके अनुसार:
“ऑपरेशन ट्रैकडाउन के तहत आने वाले सभी कैदियों को जेल विभाग व्यवस्थित तरीके से समायोजित करेगा। प्रशासनिक स्तर पर भी पूरी तैयारी कर ली गई है और कैदियों की बढ़ती संख्या से घबराने की जरूरत नहीं है।”
हालांकि विभाग की यह आश्वस्ति राहत भरी जरूर है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि वास्तविक स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है। प्रदेश के कई जिलों में जेलें पहले से ही 150% से अधिक कैदियों को संभाल रही हैं।
ऑपरेशन ट्रैकडाउन की प्रभावशीलता और चुनौतियाँ
इस बड़े अभियान ने अपराध जगत में निश्चित रूप से डर पैदा किया है। कई अपराधी खुद सरेंडर कर रहे हैं, कई प्रदेश छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, और कई पुलिस से बचने के लिए जगह बदलते पाए जा रहे हैं।
ऑपरेशन के तहत—
जिले-जिले में लगातार रेड
रात-दिन गश्त में बढ़ोतरी
मोस्ट वांटेड अपराधियों की सूची अपडेट
साइबर सेल और इंटेलिजेंस की बढ़ी भूमिका
जिस गति से अपराधियों की गिरफ्तारी हो रही है, उससे संकेत मिलते हैं कि इस अभियान की रफ्तार अभी और बढ़ने वाली है। परंतु इससे जेल विभाग की परेशानी भी उतनी ही तेज़ी से बढ़ेगी।
क्या प्रदेश को नई जेलों की जरूरत है?
विशेषज्ञों का कहना है कि हरियाणा में लंबे समय से नई जेल के निर्माण का कोई बड़ा प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ है। जबकि अपराधियों की संख्या और आबादी दोनों बढ़ रही हैं।
देशभर के कई राज्यों में भी ऐसी स्थिति देखने को मिलती है, जहां जेलों में क्षमता से कई गुना अधिक कैदी बंद हैं। यह मानवाधिकार और सुरक्षा, दोनों नजरियों से गंभीर मुद्दा है।
यदि हरियाणा सरकार ऑपरेशन ट्रैकडाउन जैसी बड़ी कार्रवाई लंबे समय तक जारी रखती है, तो उसे—
नई जेलों का निर्माण
जेलों में विस्तारीकरण
ओपन जेल मॉडल
कैदियों के लिए सुधार कार्यक्रम
जैसे कदम उठाने होंगे।
ऑपरेशन ट्रैकडाउन ने हरियाणा पुलिस को अपराधियों के खिलाफ निर्णायक बढ़त जरूर दिलाई है। अपराध नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से यह अभियान बहुत सफल माना जा रहा है। लेकिन गिरफ्तारी की लगातार बढ़ती संख्या ने एक नई चुनौती—जेलों में क्षमता संकट—को जन्म दे दिया है।
अब देखना यह होगा कि हरियाणा का जेल विभाग और सरकार इस स्थिति से कैसे निपटती है। फिलहाल पुलिस का अभियान जारी है, और आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ेगी। ऐसे में जेल विभाग की परीक्षा अब शुरू हुई है।
Haryana’s Operation Trackdown, launched under DGP O. P. Singh, has resulted in the arrest of 3748 criminals, marking one of the state’s biggest crime crackdowns. However, the rapid rise in custodial numbers has put immense pressure on the Haryana Jail Department, which is already struggling with overcrowded prisons and limited capacity. This situation highlights major concerns regarding jail infrastructure, inmate management, and the effectiveness of long-term crime control strategies in the state.


















