AIN NEWS 1: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने देशभर में चल रहे विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर एक बड़ा अपडेट जारी किया है। आयोग ने इस अभियान की समय सीमा सात दिनों के लिए बढ़ा दी है। अब ये प्रक्रिया 11 दिसंबर 2025 तक जारी रहेगी। यह फैसला उन राज्यों के लिए राहत लेकर आया है जहाँ मतदाता सूची को अपडेट करने का काम व्यापक स्तर पर चल रहा है। समय सीमा बढ़ने से अब लोगों को अपनी वोटर डिटेल्स ठीक कराने और आवश्यक दस्तावेज़ जमा करने के लिए और ज्यादा समय मिल गया है।

SIR अभियान का दूसरा चरण फिलहाल 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहा है। इनमें शामिल हैं—अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल। इन सभी जगहों पर मतदाता सूची को सुधारने, नए वोटरों को जोड़ने और त्रुटियों को हटाने का काम लगातार किया जा रहा है।
क्यों बढ़ाई गई समय सीमा?
चुनाव आयोग ने बताया कि इस समय सीमा में वृद्धि इसलिए की गई है ताकि हर योग्य नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में शामिल हो सके और किसी भी तरह की त्रुटि को समय रहते ठीक किया जा सके। आयोग का मानना है कि कई क्षेत्रों से आवश्यक दस्तावेज़ आने में देरी और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए अधिकारियों और मतदाताओं को अतिरिक्त समय देना जरूरी था।
इसके साथ ही, आयोग ने सभी राज्यों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पोलिंग स्टेशनों की पुनर्समीक्षा, उनकी पुनर्व्यवस्था और कंट्रोल टेबल में जानकारी अपडेट करने का कार्य प्राथमिकता से पूरा किया जाए। ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल तैयार करने की नई समय सीमा 12 दिसंबर से 15 दिसंबर के बीच तय की गई है। इसके बाद, ड्राफ्ट रोल का प्रकाशन 16 दिसंबर 2025 को किया जाएगा।
दावे और आपत्तियों की नई समय सीमा
ड्राफ्ट रोल जारी होने के बाद दावे और आपत्तियां दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू होती है। इस संबंध में भी चुनाव आयोग ने नया शेड्यूल जारी किया है। अब नागरिक 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक अपने दावे और आपत्तियां दाखिल कर सकेंगे।
मतदाताओं के लिए यह अवधि बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी समय वे वोटर लिस्ट में:
अपनी गलतियों को ठीक करा सकते हैं
नाम जुड़वा सकते हैं
नाम हटवाने की आपत्ति कर सकते हैं
पता, उम्र, फोटो आदि में सुधार करा सकते हैं
क्यों जरूरी है SIR अभियान?
चुनाव आयोग लंबे समय से मतदाता सूचियों को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने पर जोर दे रहा है। कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सबसे अहम हैं। ऐसे में आयोग चाहता है कि वोटर लिस्ट में किसी भी तरह की त्रुटि न रहे और हर पात्र नागरिक मतदान कर सके।
भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, SIR अभियान का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि:
नए मतदाताओं को समय पर शामिल किया जाए
मृत, स्थानांतरित या दोहराए गए नाम हटाए जाएं
पोलिंग स्टेशन की व्यवस्था बेहतर बनाई जाए
वोटर रोल अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बने
चुनाव आयोग का मानना है कि जितनी बेहतर मतदाता सूची होगी, चुनाव भी उतने ही निष्पक्ष और सटीक तरीके से संपन्न हो सकेंगे।
मतदाताओं के लिए बड़ा मौका
समय सीमा बढ़ने के बाद अब मतदाताओं के पास अपनी सभी तस्दीक (verification) और सुधार प्रक्रिया को पूरा करने का सुनहरा मौका है। आयोग ने लोगों से अपील की है कि वे इस अवसर का पूरा लाभ उठाएं और अपनी जानकारी को एक बार अवश्य चेक करें।
खास तौर पर युवाओं से कहा गया है कि यदि वे 1 जनवरी 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं, तो वे वोटर बनने के लिए आवेदन जरूर करें। यह उनका संवैधानिक अधिकार है और लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में पहला कदम भी।
अधिकारियों की जिम्मेदारियां भी बढ़ीं
समय सीमा बढ़ने के साथ ही अधिकारियों की जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं। उन्हें निर्देश दिया गया है कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
दस्तावेज़ों का सत्यापन लंबित है
भौतिक निरीक्षण बाकी है
पोलिंग स्टेशन में सुधार जरूरी है
वहां तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए। चुनाव आयोग की ओर से साफ कहा गया है कि SIR अभियान की समय सीमा बढ़ाना किसी प्रकार की देरी नहीं, बल्कि एक अवसर है ताकि प्रक्रिया और भी अधिक पारदर्शी और समावेशी बन सके।
लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में कदम
चुनाव आयोग का यह कदम लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत जैसे विशाल देश में मतदाता सूची को सही बनाए रखना एक बड़ा कार्य है। करोड़ों लोगों की जानकारी को अपडेट करना, नए वोटरों को जोड़ना और त्रुटियों को हटाना एक सतत और विस्तारपूर्ण प्रक्रिया है। ऐसे में समय सीमा बढ़ाकर चुनाव आयोग ने इस काम को और बेहतर तरीके से पूरा करने का अवसर प्रदान किया है।
सारांश रूप में कहा जाए तो SIR अभियान की बढ़ाई गई समय सीमा से नागरिकों और अधिकारियों दोनों को राहत मिली है। इससे मतदान प्रक्रिया और अधिक सटीक, पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी। चुनाव आयोग चाहता है कि हर पात्र मतदाता आने वाले चुनावों में अपना वोट डाल सके और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाए।
The Election Commission of India has extended the Special Intensive Revision (SIR) deadline to ensure an accurate and updated voter list before crucial elections in states like Uttar Pradesh and West Bengal. This extension helps streamline voter list revision, draft roll publication, and claim-objection filing, making the electoral roll more transparent, inclusive, and reliable. Updated voter data, corrected entries, and verified details play a key role in strengthening India’s democratic process.


















