AIN NEWS 1: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस समय भारत के ऐतिहासिक दौरे पर हैं। उनका यह दौरा न केवल भारत और रूस के बीच गहरी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी व्यापक चर्चा हो रही है। दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषक इस यात्रा को बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान में इस दौरे को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं—कहीं निराशा है, कहीं मज़ाक, और कहीं कड़वी सच्चाई का सामना।
पाकिस्तान की सबसे बड़ी नाराज़गी: पुतिन भारत आते हैं, पाकिस्तान नहीं
पाकिस्तान में लोग और पत्रकार इस बात से खासी नाराज़गी जताते देखे गए कि पुतिन कई बार भारत आ चुके हैं, लेकिन पाकिस्तान ने उन्हें एक बार भी मेजबानी का मौका नहीं मिला। दिलचस्प बात यह है कि रूस का कोई भी राष्ट्रपति आज तक पाकिस्तान की यात्रा पर नहीं गया। यह बात पाकिस्तानियों के मन में एक लंबे समय से चुभती रही है।
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सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनलों तक, पाकिस्तान में एक ही सवाल गूंज रहा है—
“पुतिन भारत आते हैं, लेकिन पाकिस्तान क्यों नहीं?”
पाकिस्तानी पत्रकार आरजू काज़मी की दो-टूक प्रतिक्रिया
इन्हीं चर्चाओं के बीच पाकिस्तान की जानी-मानी पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता आरजू काज़मी का एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि आखिर रूस के राष्ट्रपति पाकिस्तान क्यों नहीं आते, तो उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के कहा:
“पुतिन अपनी जेब कटवाने पाकिस्तान क्यों आएंगे?”
उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। कई लोग इसे मज़ाक के रूप में ले रहे हैं, जबकि कई इसे पाकिस्तान की वास्तविक स्थिति पर एक सटीक टिप्पणी मान रहे हैं।
क्यों कही गई ऐसी बात? पाकिस्तान की स्थिति क्या है?
आरजू काज़मी का यह बयान सिर्फ एक ‘जोक’ नहीं था। इसके पीछे पाकिस्तान की कई गहरी समस्याएं छिपी हैं:
1. आर्थिक बदहाली
पाकिस्तान पिछले कई वर्षों से आर्थिक संकट से जूझ रहा है। महंगाई आसमान छू रही है। विदेशी कर्ज लगातार बढ़ रहा है और IMF पर निर्भरता गहरी होती जा रही है। ऐसे में एक बड़े वैश्विक नेता के लिए पाकिस्तान कोई राजनीतिक या आर्थिक आकर्षण नहीं रखता।
2. सुरक्षा हालात बेहद खराब
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा रिपोर्ट्स में पाकिस्तान लगातार असुरक्षित देशों में गिना जाता है। आतंकवाद, आतंरिक हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे माहौल में किसी सुपरपावर के राष्ट्रपति का आना जोखिम भरा माना जाता है।
3. राजनीतिक अस्थिरता
पाकिस्तान की राजनीति बार-बार उलटफेर का शिकार होती रहती है। कभी सरकार बदल जाती है, कभी प्रधानमंत्री जेल चले जाते हैं, तो कभी सेना और सरकार के बीच तनाव देखने को मिलता है। वैश्विक नेताओं के लिए यह स्थिति अनिश्चितता का संकेत देती है।
4. रूस और भारत की गहरी दोस्ती
रूस भारत का दशकों पुराना रणनीतिक साझेदार है। रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, व्यापार—लगभग हर क्षेत्र में दोनों देशों के बीच करीबी संबंध हैं। पाकिस्तान, जिसकी विदेश नीति में चीन का प्रभाव ज्यादा है, रूस के लिए प्राथमिकता सूची में स्वाभाविक रूप से नीचे रहता है।
पुतिन के भारत दौरे के दौरान पाकिस्तान में क्यों बढ़ी बेचैनी?
जब भी भारत और रूस के बीच उच्च-स्तरीय बैठकें होती हैं, पाकिस्तान में असहजता बढ़ जाती है। इस बार भी ऐसा ही हुआ। पाकिस्तानी मीडिया ने इसे लेकर कई बहसें कीं, और आलोचकों ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार हाशिये पर जा रहा है।
कई विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक समस्याओं को हल करने की बजाय हमेशा दूसरों को दोष देने में लगा रहता है। यही वजह है कि पुतिन भारत को अपने रणनीतिक साझेदार के रूप में देखते हैं, जबकि पाकिस्तान को एक “संकटग्रस्त पड़ोसी” के रूप में।
सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई टिप्पणी
आरजू काज़मी का “जेब कटवाने कौन आएगा” वाला बयान ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब पर तेजी से वायरल हुआ। कुछ पाक नागरिकों ने उनकी बात से सहमति जताई और कहा कि देश की हालत अब इतनी खराब हो चुकी है कि बड़े नेता यहां आना भी नहीं चाहते।
तो कुछ लोगों ने इसे अपने देश की बेइज्जती बताया और कहा कि पत्रकारों को ऐसे बयान नहीं देने चाहिए। लेकिन एक बात सबके बीच समान थी—
यह टिप्पणी पाकिस्तान की वास्तविकता को बेनकाब करती है।
रूस की रणनीति में पाकिस्तान क्यों नहीं आता?
रूस की विदेश नीति का फोकस हमेशा स्थिर और भरोसेमंद देशों पर रहा है। पाकिस्तान की आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता उसकी प्राथमिकता को पीछे धकेलती है। वहीं भारत रूस के लिए न केवल एक आर्थिक बल्कि सैन्य और भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण साझेदार है।
इसलिए यह स्वाभाविक है कि पुतिन भारत आते रहें, लेकिन पाकिस्तान का दौरा करने की इच्छा न जताएं।
पाकिस्तान को क्या सीखने की जरूरत है?
आरजू काज़मी की टिप्पणी सिर्फ मज़ाक नहीं बल्कि पाकिस्तान के लिए एक संदेश भी है—
अगर देश अपनी छवि सुधारना चाहता है, तो उसे आर्थिक सुधार, सुरक्षा स्थिरता, और राजनीतिक पारदर्शिता पर गंभीरता से काम करना होगा।
जब तक पाकिस्तान अपनी आंतरिक समस्याओं से नहीं निपटता, तब तक किसी बड़े वैश्विक नेता का वहां जाना बेहद मुश्किल है।
During Vladimir Putin’s India visit, discussions intensified about why Putin does not visit Pakistan. Experts highlight India-Russia relations, Pakistan’s unstable political environment, internal security issues, and economic challenges. A Pakistani journalist even remarked that Putin would not risk “getting his pocket picked” in Pakistan, reflecting frustration within Pakistan. This debate boosts keywords like Putin Pakistan visit, India Russia strategic partnership, Pakistan instability, and global diplomacy.






