AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में एक ऐसा वित्तीय घोटाला सामने आया है जिसने निवेशकों और पुलिस, दोनों को हिला कर रख दिया है। अंतर्राष्ट्रीय ठग रवींद्र नाथ सोनी पर आरोप है कि उसने लगभग 970 करोड़ रुपये का एक विशाल क्रिप्टो घोटाला रचा, जिसमें 500 से अधिक लोगों से निवेश के नाम पर पैसे ठग लिए गए। यह मामला न केवल साइबर ठगी का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह लालच, तकनीक और फर्जी सपनों के सहारे लोगों की मेहनत की कमाई लूटी जा सकती है।
🔹 कैसे शुरू हुआ पूरा घोटाला?
रवींद्र नाथ सोनी ने खुद को एक सफल निवेश सलाहकार और क्रिप्टो विशेषज्ञ बताकर लोगों का विश्वास जीतना शुरू किया। उसने “ब्लूचिप कंपनी” के नाम से एक फर्जी निवेश योजना लॉन्च की, जिसमें वह दावा करता था कि लोग क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करें और बदले में महीनों में कई गुना रिटर्न पाएँगे।
धीरे-धीरे यह स्कीम इतना लोकप्रिय हो गई कि लोग अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों को भी इसमें जोड़ने लगे। सोनी ने हर निवेशक को यकीन दिलाया कि उसकी कंपनी न केवल कानूनी रूप से रजिस्टर्ड है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काम करती है।
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असलियत यह थी कि यह पूरा मॉडल पोंजी स्कीम जैसा था, जिसमें नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता है, ताकि सिस्टम चलता रहे और भरोसा बना रहे।
🔹 सेलिब्रिटी प्रमोशन बना भरोसा जीतने का हथियार
रवींद्र नाथ सोनी ने लोगों को फँसाने के लिए एक और चाल चली — उसने अपनी कंपनी के प्रमोशन के लिए मशहूर हस्तियों के वीडियो और फोटो का इस्तेमाल किया।
रिपोर्टों के मुताबिक, सोनू सूद और द ग्रेट खली के प्रमोशनल वीडियो का उपयोग किया गया, जिनमें वे ब्लूचिप कंपनी के बारे में बताते नजर आते थे। आम लोगों को यह लगा कि अगर इतने बड़े कलाकार इस कंपनी के साथ हैं, तो यह जरूर असली होगी।
अब पुलिस यह जांच रही है कि क्या इन प्रमोशन में सेलिब्रिटी की कोई सीधी भूमिका थी या यह सब केवल भुगतान आधारित विज्ञापन था जिसे सोनी ने गलत तरीके से उपयोग किया।
🔹 निवेशकों को कैसे दिया गया धोखे का लालच?
कंपनी की पूरी रणनीति “कम से कम समय में दोगुना पैसा” जैसी थी।
सोनी निवेशकों से कहता था:
क्रिप्टो मार्केट तेजी से बढ़ रहा है
हमारी कंपनी के पास विशेष तकनीक है
आपके पैसे सुरक्षित हैं
हर महीने फिक्स रिटर्न मिलेगा
कंपनी ग्लोबल लेवल पर काम करती है
कई लोगों ने अपनी जीवन भर की जमा-पूँजी, रिटायरमेंट फंड, एफडी और यहां तक कि जमीन बेचकर भी निवेश कर दिया।
🔹 कब खुला पूरा राज़?
कुछ महीनों बाद न तो रिटर्न आने बंद हुए और न ही कस्टमर केयर पर कोई जवाब मिलना।
ऐप और वेबसाइट अचानक बंद हो गई।
जब लोग कंपनी के ऑफिस पहुँचे, तो वहाँ ताला लटका मिला। इसी समय लोगों को समझ आया कि वे बड़े पैमाने पर ठगे जा चुके हैं।
सैकड़ों शिकायतें पुलिस तक पहुंचीं, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू हुई।
🔹 पुलिस जांच: अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के संकेत
जांच में सामने आया कि यह सिर्फ एक स्थानीय ठगी नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला नेटवर्क है।
सोनी कई देशों में घूमता रहा और वहीं से इस पूरी स्कीम को ऑपरेट करता था।
पुलिस को शक है कि:
विदेशों में भी उसके साथी हो सकते हैं
पैसे को क्रिप्टो वॉलेट में छुपाया गया
राशि को कई खातों में घुमाकर सफेद करने की कोशिश की गई
अब साइबर पुलिस, आर्थिक अपराध शाखा और इंटरपोल जैसी एजेंसियों की मदद से मामला आगे बढ़ रहा है।
🔹 लोगों की भावनात्मक और आर्थिक तबाही
घोटाले का सबसे कड़वा पहलू यह है कि इसमें अधिकांश निवेशक मध्यमवर्गीय परिवार थे।
कई लोगों ने बताया कि —
उन्होंने बच्चों की पढ़ाई के पैसे इसमें लगा दिए
किसी ने इलाज के लिए जमा रकम खो दी
कई लोग आर्थिक संकट में आ गए
परिवारों में तनाव और टूटन बढ़ गई
यह मामला स्पष्ट रूप से बताता है कि कैसे डिजिटल फ्रॉड एक ही झटके में जीवन बदल सकता है।
🔹 क्या इस घोटाले से सबक मिल सकता है?
यह घटना देश में बढ़ रहे क्रिप्टो फ्रॉड का एक बड़ा उदाहरण है।
पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ लोगों को ऊंचे मुनाफे का लालच देकर ठगा गया।
जांचकर्ता निवेशकों को यह सलाह दे रहे हैं:
किसी भी स्कीम में बिना जांच-परख निवेश न करें
सिर्फ प्रमोशनल वीडियो देखकर भरोसा न करें
RBI या SEBI से अप्रूव्ड निवेश योजनाओं को ही चुनें
ज्यादा मुनाफे का वादा हमेशा शक पैदा करता है
🔹 आगे क्या?
पुलिस ने कई टीमों को तैनात किया है और जल्द ही रवींद्र नाथ सोनी को गिरफ्तार करने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं।
साथ ही, सेलिब्रिटी प्रमोशन की भी जांच होगी कि क्या कोई गलत जानकारी देने में अनजाने में या जानबूझकर शामिल था।
यह मामला आने वाले समय में देशभर के निवेशकों के लिए एक बड़ा सबक बन सकता है, ताकि वे लालच, भ्रम और दिखावे से बचकर समझदारी से निर्णय लें।
The Kanpur crypto scam involving Ravindra Nath Soni has emerged as one of the biggest financial frauds in Uttar Pradesh, exposing the growing threat of cyber crime and investment scams in India. With over 500 victims and a shocking loss of nearly 970 crore rupees, the case highlights how fake crypto schemes, misleading advertisements, and celebrity promotions can manipulate innocent investors. This incident underscores the urgent need for stronger awareness about investment fraud, crypto scam prevention, and cyber security regulations in India.


















