AIN NEWS 1: गोरखपुर के सांसद और मशहूर अभिनेता रवि किशन ने हाल ही में एक बेहद गंभीर मुद्दे पर अपनी आवाज़ बुलंद की है। उन्होंने कहा कि देश में आज जिस तरह फर्ज़ी मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है, वह न सिर्फ आम लोगों के लिए परेशानी का कारण है, बल्कि इससे पूरा न्याय तंत्र भी अनावश्यक बोझ महसूस कर रहा है।
उनके अनुसार, जब किसी व्यक्ति पर झूठा केस दर्ज होता है, तो उसकी व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों तरह की ज़िंदगी हिल जाती है। इसका असर सिर्फ उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके परिवार, करियर, समाज में उसकी छवि और मानसिक अवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है।
रवि किशन ने साफ कहा कि “एक फर्ज़ी मुकदमा किसी इंसान की पूरी दुनिया बर्बाद कर सकता है।” उन्होंने बताया कि कई बार झूठे आरोप लगने पर लोगों को अपनी नौकरी तक खोनी पड़ जाती है। समाज में उनके बारे में गलत धारणाएँ बन जाती हैं, रिश्तेदार और पड़ोसी भी उनसे दूरी बनाने लगते हैं। ऐसी स्थिति में न सिर्फ आरोपी व्यक्ति, बल्कि उसके घर के बच्चों और महिलाओं पर भी मानसिक तनाव बढ़ जाता है।
न्याय व्यवस्था पर बढ़ता बोझ
उन्होंने कहा कि ऐसे फर्ज़ी मामलों से पुलिस, प्रशासन और न्यायालय पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ता है। असली अपराधों की जांच और सुनवाई प्रभावित होती है क्योंकि फर्ज़ी मामलों में समय और संसाधन बर्बाद हो जाते हैं।
रवि किशन के मुताबिक, “जब असली मामलों की जांच में देरी होती है, तो न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगते हैं।”
फर्ज़ी मुकदमे करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
सांसद रवि किशन ने यह भी मांग की कि सरकार को ऐसे लोगों पर सख्त कानून लागू करने चाहिए जो जानबूझकर गलत आरोप लगाते हैं या दूसरों को परेशान करने के लिए फर्ज़ी केस दर्ज कराते हैं।
उनका कहना है कि यह प्रवृत्ति समाज में डर और असुरक्षा पैदा करती है। कई बार लोग व्यक्तिगत दुश्मनी, जमीन विवाद, पारिवारिक तनाव या राजनीतिक वजहों से भी झूठे केस दर्ज करा देते हैं।
अगर ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए, तो इस प्रवृत्ति पर काफी हद तक रोक लग सकती है।
जांच एजेंसियों पर भी नियम लागू हों
उन्होंने इस मुद्दे का एक और महत्वपूर्ण पहलू उठाया। रवि किशन ने कहा कि कई बार जांच एजेंसियाँ भी पहली नज़र में किसी मामले को सही मान लेती हैं या बिना उचित जांच के ही FIR को वैध ठहरा देती हैं।
इस वजह से निर्दोष लोग लंबे समय तक परेशान होते रहते हैं, जबकि असली सच्चाई बाद में सामने आती है।
उन्होंने मांग की कि अगर किसी मामले में जांच एजेंसी की गलती साबित होती है, तो उसके लिए भी स्पष्ट नियम और जवाबदेही तय होनी चाहिए।
फर्ज़ी केसों का सामाजिक प्रभाव
उन्होंने बताया कि झूठे आरोप लगने के बाद लोग न सिर्फ आर्थिक नुकसान झेलते हैं, बल्कि कई लोग अवसाद, तनाव, सामाजिक अलगाव और आत्मविश्वास में कमी जैसे मानसिक समस्याओं से भी गुजरते हैं।
कई बार परिवारों के बीच रिश्ते टूट जाते हैं, बच्चों की स्कूलिंग प्रभावित होती है और आरोपी के लिए सामान्य जिंदगी में लौटना मुश्किल हो जाता है।
रवि किशन का संदेश समाज के नाम
उन्होंने लोगों से भी अपील की कि वे किसी भी व्यक्तिगत विवाद, गुस्से या बदले की भावना से प्रेरित होकर किसी पर झूठा आरोप न लगाएँ। समाज में भरोसा और न्याय तभी कायम रहेगा जब हर व्यक्ति ईमानदारी और जिम्मेदारी से काम करेगा।
उन्होंने कहा, “कानून हमें सुरक्षा देता है, लेकिन उसका गलत इस्तेमाल करना किसी भी तरह उचित नहीं है। जो लोग बेवजह दूसरों की जिंदगी के साथ खेलते हैं, उन्हें सख्त सजा मिलनी चाहिए।”
सरकार और अदालतों से उम्मीदें
फर्ज़ी मुकदमों को कम करने के लिए उन्होंने सरकार से साफ नियम, कड़े दंड प्रावधान और त्वरित कार्रवाई की मांग की।
साथ ही अदालतों से भी आग्रह किया कि नाम मात्र सबूतों पर दर्ज हुए मामलों की प्राथमिक जांच को और मजबूत किया जाए ताकि निर्दोष व्यक्ति अनावश्यक रूप से परेशान न हो।
रवि किशन की यह पहल उन हजारों लोगों की आवाज़ बनकर सामने आई है जो कभी न कभी ऐसे मामलों का शिकार रहे हैं। उनका यह बयान उम्मीद जगाता है कि आने वाले समय में इस दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।
Ravi Kishan has strongly raised the issue of increasing fake cases in India, highlighting how false FIRs damage reputations, destroy families, and put unnecessary burden on the justice system. He has urged the government to implement strict action against individuals who misuse the law by filing false complaints. Ravi Kishan also emphasized the need for clear accountability for investigation agencies to prevent the validation of fake cases. This growing problem requires urgent reforms to ensure justice, fairness, and the proper functioning of India’s legal system.


















