AIN NEWS 1: भारतीय सर्राफा बाजार में इस समय सोने और चांदी की कीमतें सुर्खियों में हैं। बीते कुछ दिनों से जारी तेजी ने अब नया इतिहास रच दिया है। जहां सोने के भाव पहले ही रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं, वहीं चांदी ने भी पहली बार ₹2 लाख प्रति किलो का आंकड़ा पार कर लिया है। यह उछाल सिर्फ निवेशकों ही नहीं, बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी चर्चा का विषय बन गया है।
चांदी में ऐतिहासिक उछाल, एक हफ्ते में ₹17,000 की तेजी
अगर चांदी की बात करें तो मौजूदा सप्ताह इसके लिए बेहद खास रहा है। सिर्फ एक हफ्ते के भीतर चांदी की कीमतों में करीब ₹17,000 प्रति किलो का इजाफा दर्ज किया गया है। बाजार जानकारों के मुताबिक, यह तेजी अचानक नहीं आई है, बल्कि इसके पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं।
हालांकि, सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन यानी आज सुबह चांदी के दामों में हल्की मुनाफावसूली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में कीमतें करीब ₹2,000 प्रति किलो तक नीचे आईं, जिससे यह संकेत मिला कि कुछ निवेशक ऊंचे स्तर पर मुनाफा बुक कर रहे हैं।
दोपहर बाद बदला बाजार का मूड
सुबह की गिरावट ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, दोपहर के बाद बाजार का रुख पूरी तरह बदल गया। न सिर्फ सोने में, बल्कि चांदी की कीमतों में भी एक बार फिर जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। इसके चलते दोनों कीमती धातुएं दोबारा तेजी की राह पर लौट आईं।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह तेजी दर्शाती है कि निवेशकों का भरोसा अभी भी बुलियन मार्केट पर बना हुआ है। छोटी गिरावट को लोग खरीदारी के मौके के तौर पर देख रहे हैं।
सोने की कीमतें भी नए रिकॉर्ड पर
चांदी के साथ-साथ सोना भी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। घरेलू बाजार में सोने की कीमतें अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी हैं। शादी-विवाह के सीजन और निवेश की बढ़ती मांग ने सोने की कीमतों को मजबूती दी है।
इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मजबूती का असर भी सीधे भारतीय बाजार पर पड़ रहा है। डॉलर में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशक सोने को सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।
तेजी के पीछे क्या हैं बड़े कारण?
सोने और चांदी में आई इस रिकॉर्ड तेजी के पीछे कई अहम वजहें हैं:
1. वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता – दुनिया के कई देशों में आर्थिक सुस्ती और मंदी की आशंका से निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं।
2. ब्याज दरों को लेकर असमंजस – अमेरिका समेत कई देशों में ब्याज दरों को लेकर स्थिति साफ नहीं है, जिससे बुलियन को सपोर्ट मिल रहा है।
3. डॉलर में कमजोरी – डॉलर इंडेक्स में नरमी से सोने-चांदी की कीमतों को बल मिला है।
4. औद्योगिक मांग – चांदी की मांग सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भी इसकी खपत बढ़ रही है।
5. घरेलू निवेशकों की रुचि – भारत में लोग अब चांदी को भी निवेश के मजबूत विकल्प के तौर पर देखने लगे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
मौजूदा हालात में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह तेजी आगे भी जारी रहेगी। जानकारों का मानना है कि शॉर्ट टर्म में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म के लिहाज से सोना और चांदी अभी भी मजबूत नजर आ रहे हैं।
हालांकि, ऊंचे स्तर पर निवेश करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि एकमुश्त निवेश के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना बेहतर रहेगा।
आम ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?
सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। खासतौर पर शादी-ब्याह के लिए गहनों की खरीदारी करने वालों को अब ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। वहीं, चांदी के बर्तन और आभूषण भी पहले के मुकाबले काफी महंगे हो गए हैं।
आगे क्या रह सकता है रुझान?
आने वाले दिनों में बुलियन मार्केट पूरी तरह से वैश्विक संकेतों पर निर्भर रहेगा। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बनी रहती है, तो सोने और चांदी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। वहीं, किसी भी तरह की सकारात्मक आर्थिक खबर से थोड़ी राहत भी देखने को मिल सकती है।
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