AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत दे रही है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश संगठन में नए अध्यक्ष के चयन के बाद अब योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल में व्यापक फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। संगठन और सरकार—दोनों स्तरों पर हलचल साफ दिखाई दे रही है। सूत्रों के मुताबिक, यह बदलाव केवल औपचारिक नहीं होगा, बल्कि इसके जरिए भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव की मजबूत नींव रखने की रणनीति पर काम कर रही है।
प्रदेश अध्यक्ष पद पर पंकज चौधरी के निर्विरोध निर्वाचन के बाद यह साफ हो गया है कि पार्टी अब अगले चरण की तैयारी में जुट चुकी है। यही वजह है कि मंत्रिमंडल विस्तार, कुछ मंत्रियों की विदाई और कुछ नए चेहरों की एंट्री को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
🔸 योगी सरकार में क्यों जरूरी हो गया है फेरबदल?
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मौजूदा समय में मंत्रिमंडल में बदलाव की कई ठोस वजहें हैं। सरकार को चार साल से अधिक का समय हो चुका है और अब पार्टी चाहती है कि शासन में नई ऊर्जा दिखाई दे। इसके साथ ही संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाना भी भाजपा की प्राथमिकता में शामिल है।
इसके अलावा, कुछ ऐसे सामाजिक और क्षेत्रीय वर्ग हैं जिनका प्रतिनिधित्व सरकार में सीमित माना जा रहा है। आगामी चुनावों से पहले इन वर्गों को साधने के लिए भी मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल किया जाना लगभग तय माना जा रहा है।
🔸 योगी कैबिनेट में 6 पद खाली, नए चेहरों की एंट्री तय
फिलहाल उत्तर प्रदेश सरकार में कुल 54 मंत्री हैं, जबकि संविधान के अनुसार राज्य में 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। यानी अभी 6 पद खाली हैं। यही वजह है कि मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाएं बेहद मजबूत हैं।
सूत्रों का कहना है कि इन छह पदों के जरिए भाजपा कई राजनीतिक संदेश एक साथ देना चाहती है—
युवाओं को मौका
महिलाओं को प्रतिनिधित्व
जातीय और क्षेत्रीय संतुलन
विपक्ष से आए नेताओं को राजनीतिक इनाम
इस विस्तार के साथ कुछ मौजूदा मंत्रियों को संगठन में भेजे जाने की भी संभावना है।
🔸 डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की भूमिका पर सस्पेंस
सबसे ज्यादा चर्चा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को लेकर है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उन्हें जल्द ही केंद्र सरकार या भाजपा संगठन में एक बड़ी राष्ट्रीय जिम्मेदारी दी जा सकती है।
केशव मौर्य लंबे समय से भाजपा के संगठनात्मक स्तंभ रहे हैं और उनका अनुभव राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी के लिए उपयोगी माना जा रहा है। यदि वे यूपी सरकार से बाहर जाते हैं, तो राज्य में डिप्टी सीएम का पद खाली हो जाएगा, जिससे नई राजनीतिक संभावनाएं खुलेंगी।
🔸 साध्वी निरंजन ज्योति बन सकती हैं यूपी की नई डिप्टी सीएम?
डिप्टी सीएम पद के लिए जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह है—साध्वी निरंजन ज्योति। वर्तमान में केंद्र सरकार में मंत्री रह चुकी साध्वी निरंजन ज्योति को उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक मजबूत महिला चेहरे के तौर पर देखा जाता है।
अगर उन्हें यूपी सरकार में डिप्टी सीएम बनाया जाता है, तो इसके कई राजनीतिक मायने होंगे—
महिला नेतृत्व को मजबूत संदेश
सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश
केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच उनका नाम पसंदीदा माना जा रहा है।
🔸 सपा से बगावत करने वालों को मिलेगा राजनीतिक इनाम?
इस संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में समाजवादी पार्टी से बगावत कर भाजपा के साथ आए विधायकों को भी शामिल किए जाने की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार, सपा के सात बागी विधायकों में से दो या तीन को मंत्री बनाया जा सकता है।
इस कदम से भाजपा विपक्ष को सीधा संदेश देना चाहती है कि पार्टी में आने वालों को सम्मान और अवसर दोनों मिलते हैं।
🔸 पूजा पाल सबसे मजबूत दावेदार
सपा से अलग होकर भाजपा के समर्थन में आईं पूजा पाल का नाम सबसे आगे चल रहा है। लंबे समय से यह माना जा रहा था कि उन्हें सरकार में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी और अब मंत्रिमंडल विस्तार में उनका नाम लगभग तय माना जा रहा है।
इसके अलावा, ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के लिए पूर्व मंत्री मनोज पांडेय का नाम भी चर्चा में है।
🔸 भूपेंद्र सिंह को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
भाजपा के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह को भी योगी सरकार में अहम विभाग सौंपे जाने की संभावना है। संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए पार्टी उन्हें सरकार में बड़ी भूमिका देना चाहती है।
🔸 ये बड़े नाम भी रेस में शामिल
संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में कई अन्य नामों पर भी गंभीर मंथन चल रहा है—
महेंद्र सिंह (पूर्व मंत्री): अनुभवी नेता, संगठन में मजबूत पकड़
पंकज सिंह (विधायक): युवा चेहरा, क्षेत्रीय संतुलन में उपयोगी
आशीष सिंह ‘आशु’ (बिलग्राम-मल्लावां): युवा नेतृत्व और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व
इन नामों को लेकर दिल्ली और लखनऊ दोनों स्तरों पर विचार किया जा रहा है।
🔸 संगठन और सरकार के बीच संतुलन साधने की रणनीति
भाजपा की रणनीति बिल्कुल साफ है—
कुछ मंत्रियों को संगठन में भेजा जाएगा
संगठन के सक्रिय नेताओं को सरकार में लाया जाएगा
सामाजिक, जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधा जाएगा
2027 चुनाव से पहले पार्टी की जमीनी पकड़ मजबूत की जाएगी
प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पंकज चौधरी के आने के बाद संगठन को नई धार देने की योजना है और उसी के अनुरूप सरकार में भी बदलाव किए जाएंगे।
🔸 कब होगा आधिकारिक ऐलान?
हालांकि अभी तक पार्टी या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन संकेत बेहद स्पष्ट हैं कि योगी मंत्रिमंडल में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
दिल्ली और लखनऊ के बीच लगातार बैठकों का दौर जारी है और अंतिम फैसला भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ हफ्तों में इस पर आधिकारिक मुहर लग सकती है।
The UP Yogi Cabinet Reshuffle 2025 is expected to bring major political changes in Uttar Pradesh after the BJP state president election. Sources indicate that Yogi Adityanath cabinet may witness new minister inductions, removal of some ministers and a possible change in the Deputy CM position. With discussions around Keshav Prasad Maurya’s national role and Sadhvi Niranjan Jyoti emerging as a strong contender, the BJP is strategically preparing for the 2027 Uttar Pradesh Assembly Elections.


















