AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम देते हुए आगरा कमिश्नरेट पुलिस ने 300 करोड़ रुपये से अधिक की ऑनलाइन ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने तीन अलग-अलग गिरोहों से जुड़े कुल 32 शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जबकि पूरे नेटवर्क को दुबई से संचालित करने वाला मुख्य सरगना अभी विदेश में बैठकर गिरोह चला रहा था।
यह मामला न सिर्फ ठगी की रकम के लिहाज से चौंकाने वाला है, बल्कि इसलिए भी गंभीर है क्योंकि देशभर से इस गिरोह के खिलाफ 600 से अधिक शिकायतें राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के पोर्टल पर दर्ज थीं।
कैसे हुआ 300 करोड़ की ठगी का खुलासा?
आगरा पुलिस को पिछले कई महीनों से साइबर ठगी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। पीड़ितों की शिकायतों का विश्लेषण करने पर यह सामने आया कि ठगी का तरीका लगभग एक जैसा था, लेकिन नेटवर्क बेहद संगठित और तकनीकी रूप से मजबूत था।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि यह कोई एक गिरोह नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग यूनिट्स हैं, जो आपस में जुड़े हुए हैं और एक ही मास्टरमाइंड के निर्देश पर काम कर रहे हैं। इसी इनपुट के आधार पर आगरा कमिश्नरेट पुलिस ने एक साथ कई जगहों पर छापेमारी की।
ताजगंज से सबसे बड़ी गिरफ्तारी
पुलिस की सबसे बड़ी कार्रवाई ताजगंज थाना क्षेत्र में हुई, जहां से 24 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में सामने आया कि इन सभी को दुबई में बैठे सरगना द्वारा निर्देश दिए जाते थे।
ये आरोपी फर्जी निवेश योजनाएं, डिजिटल प्लेटफॉर्म और बैंकिंग माध्यमों का इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। खातों में रकम जमा कराए जाने के बाद, उसे तुरंत अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर लिया जाता था, ताकि ट्रेस करना मुश्किल हो जाए।
जगदीशपुरा गिरोह: लोन के नाम पर मोबाइल हैकिंग
दूसरी बड़ी कार्रवाई जगदीशपुरा क्षेत्र में हुई, जहां से छह साइबर ठगों को गिरफ्तार किया गया। इनका तरीका बेहद शातिर और आम लोगों को आसानी से फंसाने वाला था।
आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सस्ते और आसान लोन का विज्ञापन करते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति संपर्क करता, उससे पहले पांच हजार रुपये खाते में जमा कराए जाते थे। इसके बाद पीड़ित के मोबाइल में एक एप डाउनलोड कराई जाती थी।
यहीं से असली खेल शुरू होता था। एप के जरिए मोबाइल हैक कर लिया जाता और फिर बैंकिंग डिटेल्स, ओटीपी और अन्य जरूरी जानकारी निकालकर खाते से बड़ी रकम उड़ा ली जाती थी।
किरावली से पकड़े गए दो अहम आरोपी
तीसरी कार्रवाई किरावली इलाके में हुई, जहां से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। ये आरोपी तकनीकी सपोर्ट और मनी ट्रांसफर चैनल संभालते थे। इनके जिम्मे ठगी की रकम को अलग-अलग खातों और डिजिटल वॉलेट्स में भेजना था, ताकि पैसा जल्दी गायब हो जाए।
दुबई से चल रहा था पूरा नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरे साइबर ठगी नेटवर्क का मास्टरमाइंड दुबई में बैठकर ऑपरेट कर रहा था। वही तय करता था कि किसे कॉल करनी है, किस प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन डालना है और पैसा कहां ट्रांसफर करना है।
सरगना विदेशी नंबरों, वीपीएन और एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल करता था, जिससे उसकी लोकेशन और पहचान छिपी रहे। हालांकि, पुलिस का दावा है कि जल्द ही उसे भी इंटरनेशनल एजेंसियों की मदद से पकड़ लिया जाएगा।
600 से ज्यादा शिकायतें, देशभर में फैला जाल
NCRB के आंकड़ों के अनुसार, इस गिरोह के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों से 600 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई थीं। इनमें नौकरी, लोन, निवेश और डिजिटल पेमेंट से जुड़ी ठगी के मामले शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि असल में ठगी का आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है, क्योंकि कई लोग बदनामी या जानकारी के अभाव में शिकायत दर्ज ही नहीं कराते।
पुलिस का बयान और आगे की कार्रवाई
आगरा कमिश्नरेट पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है। गिरफ्तार आरोपियों से लैपटॉप, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक डिटेल्स और फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
पुलिस अब इनके बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और इंटरनेशनल कनेक्शन की गहन जांच कर रही है। साथ ही पीड़ितों को उनकी रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
आम लोगों के लिए पुलिस की अपील
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले सस्ते लोन, निवेश योजनाओं और अनजान एप्स से सावधान रहें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन या NCRB पोर्टल पर दें।
Agra Police busted one of the biggest cyber fraud rackets in Uttar Pradesh involving more than ₹300 crore. The cyber crime gang targeted people across India through online loan fraud, fake investment schemes and mobile hacking. A total of 32 accused were arrested from Tajganj, Jagdishpura and Kiraoli, while the main kingpin operated the network from Dubai. The case highlights the growing threat of cyber fraud in India and the importance of cyber crime awareness and reporting.


















