AIN NEWS 1: गाजियाबाद की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत समेत 36 लोगों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। यह मामला करीब 11 साल पुराना है और अब अदालत के आदेश के बाद इसकी नियमित सुनवाई शुरू होगी।
मंगलवार को विशेष न्यायाधीश निशांत मान की अदालत में सभी आरोपी व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और केस डायरी के आधार पर यह माना कि मामले में आगे ट्रायल चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
🔹 कौन-कौन हैं आरोपी?
इस मामले में जिन प्रमुख लोगों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं, उनमें शामिल हैं—
राकेश टिकैत (राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय किसान यूनियन)
पूर्व विधायक सुदेश शर्मा
पूर्व मंत्री दलवीर सिंह
पूर्व विधायक वीरपाल राठी
पूर्व विधायक भगवती प्रसाद
राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) से जुड़े नेता अमरजीत सिंह और अजय पाल
इनके अलावा कई किसान नेता और संगठन से जुड़े अन्य कार्यकर्ता भी आरोपियों की सूची में शामिल हैं।
🔹 क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद वर्ष 2014 का है। उस समय केंद्र सरकार ने पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजित सिंह से दिल्ली स्थित उनकी सरकारी कोठी खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसी फैसले के विरोध में किसानों, भारतीय किसान यूनियन और राष्ट्रीय लोकदल से जुड़े कार्यकर्ताओं ने आंदोलन छेड़ दिया था।
आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने गाजियाबाद के मुरादनगर क्षेत्र में गंगनहर पर एकत्र होकर प्रदर्शन किया, जिससे यातायात और आम जनजीवन प्रभावित हुआ। प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
🔹 लाठीचार्ज और FIR
प्रशासन के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ने और सड़क जाम करने की कोशिश की। हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इसके बाद मुरादनगर थाने में 36 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
पुलिस ने इस मामले में कई धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। हालांकि, समय के साथ यह मामला अदालतों में लंबित रहा और लंबे समय तक इस पर कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हो सकी।
🔹 11 साल बाद आरोप तय
करीब 11 साल बाद अब जाकर अदालत ने इस केस में आरोप तय किए हैं। अदालत का मानना है कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए दस्तावेज और गवाहों के बयान यह संकेत देते हैं कि आरोपियों की भूमिका की न्यायिक जांच जरूरी है।
अदालत ने साफ किया है कि आरोप तय करना किसी को दोषी ठहराना नहीं है, बल्कि इसका मतलब यह है कि मामले में सुनवाई और साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
🔹 आरोपियों का पक्ष
राकेश टिकैत और अन्य आरोपियों की ओर से पहले ही यह दावा किया जाता रहा है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और किसानों की आवाज दबाने के लिए उनके खिलाफ राजनीतिक दबाव में मुकदमा दर्ज किया गया।
किसान संगठनों का कहना है कि वे केवल लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज करा रहे थे और उन पर लगाए गए आरोप मनगढ़ंत और राजनीति से प्रेरित हैं। अब अदालत में ट्रायल के दौरान इन सभी बिंदुओं पर बहस होगी।
🔹 अब आगे क्या?
आरोप तय होने के बाद अब यह मामला साक्ष्य चरण में जाएगा। अभियोजन पक्ष अपने गवाहों और सबूतों को अदालत में पेश करेगा, जबकि बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।
कानूनी जानकारों के मुताबिक, यह मुकदमा अभी लंबा चल सकता है क्योंकि आरोपियों की संख्या अधिक है और मामला पुराना है। फिर भी, आरोप तय होने के बाद इसे एक अहम कानूनी प्रगति माना जा रहा है।
🔹 राजनीतिक और किसान आंदोलन पर असर
राकेश टिकैत किसान आंदोलन का बड़ा चेहरा रहे हैं। ऐसे में यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। आने वाले समय में अदालत का फैसला किसान राजनीति और संगठनों की रणनीति पर असर डाल सकता है।
The MP-MLA court in Ghaziabad has framed charges against Rakesh Tikait, the national spokesperson of the Bharatiya Kisan Union, along with 36 others in a 2014 farmer protest case. The case is linked to protests against the eviction of former Union Minister Ajit Singh from his Delhi bungalow. The incident took place at Muradnagar Ganganahar, where police had to resort to lathi-charge to control the situation. This development marks a major legal step in the long-pending Rakesh Tikait case and brings renewed focus on farmer protest cases in India.


















