मध्य प्रदेश में ‘लाल सड़कें’: भारत में पहली बार हाइवे पर टेबल-टॉप रेड मार्किंग, जानिए क्यों है यह पहल बेहद खास!

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AIN NEWS 1: मध्य प्रदेश एक बार फिर देश में नई मिसाल कायम करने जा रहा है। इस बार बात सड़कों की है, लेकिन ये सड़कें सामान्य नहीं हैं। मध्य प्रदेश में पहली बार हाइवे पर ‘टेबल-टॉप रेड मार्किंग’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसे आम भाषा में ‘लाल सड़कें’ कहा जा रहा है। यह प्रयोग न सिर्फ भारत में पहली बार हुआ है, बल्कि सड़क सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से भी इसे एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

यह अनोखी सड़क वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनाई गई है। इस इलाके में अक्सर तेज रफ्तार वाहनों के कारण दुर्घटनाएं होती थीं, जिनमें इंसानों के साथ-साथ वन्यजीव भी शिकार बनते थे। इसी समस्या के समाधान के लिए सरकार और प्रशासन ने मिलकर यह नई तकनीक अपनाई है।

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क्या है टेबल-टॉप रेड मार्किंग?

टेबल-टॉप रेड मार्किंग दरअसल सड़क पर बनाई जाने वाली एक विशेष प्रकार की लाल रंग की मोटी परत होती है, जो दूर से ही साफ दिखाई देती है। यह साधारण पेंट नहीं है, बल्कि हाई-फ्रिक्शन मटीरियल से बनी होती है, जिससे वाहन की गति अपने-आप कम हो जाती है।

जब कोई वाहन इस लाल सतह पर पहुंचता है, तो ड्राइवर को यह अहसास होता है कि वह किसी संवेदनशील क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है। इससे चालक सतर्क हो जाता है और बिना किसी स्पीड ब्रेकर के ही गाड़ी की रफ्तार कम कर देता है।

क्यों चुना गया लाल रंग?

लाल रंग को दुनियाभर में खतरे और सावधानी का संकेत माना जाता है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, लाल रंग मानव मस्तिष्क पर तुरंत प्रभाव डालता है और अलर्ट करता है। यही कारण है कि इस तकनीक में सड़क को लाल रंग दिया गया है, ताकि ड्राइवर का ध्यान तुरंत आकर्षित हो सके।

रात के समय भी यह लाल सतह रिफ्लेक्टिव होने के कारण साफ दिखाई देती है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना और कम हो जाती है।

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वन्यजीवों के लिए क्यों जरूरी थी यह पहल?

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश के महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में से एक है। यहां बाघ, तेंदुआ, हिरण, जंगली सूअर जैसे कई वन्यजीव पाए जाते हैं। यह हाइवे उनके प्राकृतिक आवास को दो हिस्सों में बांटता है।

पहले तेज रफ्तार वाहनों की वजह से आए दिन जानवर सड़क हादसों का शिकार हो जाते थे। कई बार इंसानी जान भी खतरे में पड़ जाती थी। लाल सड़क तकनीक के जरिए अब वाहन चालकों को पहले ही सतर्क कर दिया जाता है कि वे वन्यजीव कॉरिडोर से गुजर रहे हैं।

स्पीड ब्रेकर से कैसे अलग है यह तकनीक?

अब तक गति नियंत्रित करने के लिए स्पीड ब्रेकर का इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन हाइवे पर स्पीड ब्रेकर कई बार खतरनाक साबित होते हैं। अचानक ब्रेक लगाने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

टेबल-टॉप रेड मार्किंग में ऐसा नहीं है।

इसमें झटका नहीं लगता

वाहन धीरे-धीरे स्लो होता है

ट्रैफिक फ्लो बाधित नहीं होता

भारी वाहनों के लिए भी सुरक्षित है

यही वजह है कि इसे भविष्य की स्मार्ट रोड टेक्नोलॉजी माना जा रहा है।

प्रशासन और विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?

सड़क परिवहन और वन विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह प्रयोग पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है। शुरुआती नतीजे बेहद सकारात्मक सामने आ रहे हैं। वाहन चालकों की औसत स्पीड में कमी आई है और लोग खुद को ज्यादा सतर्क महसूस कर रहे हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो देश के अन्य नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व के आसपास भी इसे लागू किया जा सकता है।

क्या पूरे भारत में लागू होगी यह तकनीक?

अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में

जंगलों से गुजरने वाले हाइवे

स्कूल और अस्पताल जोन

एक्सीडेंट-प्रोन एरिया

जैसी जगहों पर रेड रोड मार्किंग अपनाई जा सकती है। इससे सड़क हादसों में कमी आएगी और लोगों में सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता भी बढ़ेगी।

मध्य प्रदेश की एक और नई पहचान

मध्य प्रदेश पहले ही पर्यटन, वन्यजीव संरक्षण और नवाचार के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुका है। अब ‘लाल सड़कें’ राज्य को स्मार्ट और सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में आगे ले जा रही हैं।

यह सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि जिंदगी बचाने की एक सोच है — इंसानों की भी और जंगल के बेजुबान जानवरों की भी।

Madhya Pradesh has launched India’s first table-top red road marking on a highway passing through the Veerangana Durgavati Tiger Reserve. This innovative red road technology is designed to slow down vehicles naturally, reduce road accidents, and protect wildlife corridors. The red marking enhances driver alertness, improves highway safety, and sets a new benchmark for smart road infrastructure in India.

 

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