AIN NEWS 1: ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में हुए भीषण आतंकी हमले ने एक बार फिर दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। बॉन्डी बीच पर हनुक्का का त्योहार मना रहे यहूदी समुदाय को निशाना बनाकर किए गए इस हमले में 15 निर्दोष लोगों की जान चली गई, जबकि 40 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोक और आक्रोश का माहौल है। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की करीबी और अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड का एक बयान सामने आया है, जिसने वैश्विक बहस को और तेज कर दिया है।

कैसे हुआ बॉन्डी बीच आतंकी हमला?
रविवार को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बॉन्डी बीच पर यहूदी समुदाय के लोग हनुक्का पर्व मना रहे थे। तभी नवीद अकरम और उसके पिता साजिद अकरम ने वहां अचानक अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
इस हमले में 15 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि करीब 43 लोग घायल हो गए। हमले के दौरान पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला। जवाबी कार्रवाई में साजिद अकरम मारा गया, जबकि नवीद अकरम को एक आम नागरिक अहमद अल अहमद ने बहादुरी दिखाते हुए पकड़ लिया, जिससे कई और जानें बच सकीं। बाद में पुलिस ने नवीद को गिरफ्तार कर लिया।
आतंकियों की पृष्ठभूमि और जांच में क्या सामने आया?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, साजिद अकरम पहले भारत से पाकिस्तान गया था और बाद में ऑस्ट्रेलिया में नौकरी करने के लिए शिफ्ट हुआ। नवीद अकरम का जन्म ऑस्ट्रेलिया में ही हुआ था। शुरुआती जांच में दोनों के कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा से प्रभावित होने की पुष्टि हुई है।
सबसे गंभीर बात यह है कि जांच के दौरान दोनों के इस्लामिक स्टेट (ISIS) जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन से संपर्क होने के संकेत मिले हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं।
दुनिया भर के नेताओं की प्रतिक्रिया
इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई वैश्विक नेताओं ने ऑस्ट्रेलिया के साथ एकजुटता जताई है। सभी नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की जरूरत पर जोर दिया।
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तुलसी गबार्ड का बयान क्यों है अहम?
इस हमले के बाद तुलसी गबार्ड ने सोशल मीडिया पर एक तीखा बयान जारी किया। उन्होंने लिखा कि ऑस्ट्रेलिया में हुआ यह हमला किसी के लिए भी चौंकाने वाला नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह कट्टर इस्लामी विचारधारा के बढ़ते प्रभाव का नतीजा है।
तुलसी गबार्ड के मुताबिक, बड़ी संख्या में कट्टरपंथी इस्लामवादियों का बिना सख्त जांच के किसी देश में प्रवेश करना उस देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन जाता है। उन्होंने कहा कि इनका उद्देश्य सिर्फ किसी एक देश का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का इस्लामीकरण करना है।
“इस्लामवाद आज़ादी और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा”
तुलसी गबार्ड ने अपने बयान में कहा कि इस्लामवाद और कट्टर इस्लामी सोच आज पूरी दुनिया की आज़ादी, सुरक्षा और शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप के कई देशों में अब हालात काबू से बाहर होते जा रहे हैं और ऑस्ट्रेलिया भी उसी रास्ते पर जाता दिख रहा है।
अमेरिका को लेकर तुलसी की चेतावनी
अपने बयान में तुलसी गबार्ड ने अमेरिका को लेकर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास अभी भी समय है, लेकिन अगर सख्त कदम नहीं उठाए गए तो वहां भी हालात बिगड़ सकते हैं।
उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि ट्रंप ने सीमा सुरक्षा, अवैध प्रवासन पर रोक और संदिग्ध आतंकियों को देश से बाहर निकालने को प्राथमिकता दी, जो अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
आतंकवाद पर वैश्विक बहस फिर तेज
सिडनी के इस आतंकी हमले और तुलसी गबार्ड के बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या दुनिया कट्टरपंथी विचारधाराओं को नजरअंदाज कर रही है? क्या बिना सख्त जांच के माइग्रेशन वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह हमला सिर्फ ऑस्ट्रेलिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है।
बॉन्डी बीच आतंकी हमला एक बार फिर यह दिखाता है कि आतंकवाद किसी एक देश या समुदाय की समस्या नहीं है। यह वैश्विक चुनौती है, जिससे निपटने के लिए देशों को मिलकर सख्त और संतुलित कदम उठाने होंगे। तुलसी गबार्ड का बयान भले ही विवादास्पद हो, लेकिन उसने सुरक्षा, कट्टरवाद और माइग्रेशन पर एक जरूरी बहस को जरूर जन्म दिया है।
The Sydney Bondi Beach terror attack has once again highlighted the growing threat of Islamic terrorism across the world. Trump ally Tulsi Gabbard strongly condemned the attack and warned that Islamism has become the biggest global threat to freedom and security. The Australia terror attack, targeting Jewish celebrations during Hanukkah, has reignited discussions on border security, radicalization, and global counter-terrorism efforts.



















