AIN NEWS 1: पाकिस्तान की बिगड़ती आर्थिक हालत अब केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उसकी छवि को नुकसान पहुंचा रही है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिक रोज़गार की तलाश या मजबूरी में खाड़ी देशों का रुख कर रहे हैं, लेकिन वहां जाकर भीख मांगने जैसी गतिविधियों में लिप्त पाए जा रहे हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
सऊदी अरब की कड़ी कार्रवाई
सऊदी अरब ने भीख मांगने के आरोप में 56,000 से अधिक पाकिस्तानी नागरिकों को देश से निर्वासित कर दिया है। सऊदी प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों, मस्जिदों और बाजारों में भीख मांगने की घटनाएं लगातार बढ़ रही थीं, जिनमें बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिक शामिल थे।
यह कार्रवाई न केवल कानून व्यवस्था के लिहाज से अहम मानी जा रही है, बल्कि इससे पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय साख को भी गहरा झटका लगा है।
UAE भी हुआ सख्त
सिर्फ सऊदी अरब ही नहीं, बल्कि UAE ने भी पाकिस्तानी नागरिकों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी है। वहां भी पाकिस्तानी भिखारियों की बढ़ती संख्या को लेकर चिंता जताई गई है। कई मामलों में वीजा रद्द कर लोगों को वापस भेजा गया है, जबकि भविष्य में और सख्त नियम लागू करने के संकेत दिए गए हैं।
पाकिस्तान में आर्थिक बदहाली की तस्वीर
पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है।
महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर है
बेरोज़गारी लगातार बढ़ रही है
विदेशी कर्ज़ का बोझ बढ़ता जा रहा है
आम जनता के लिए दो वक्त की रोटी भी मुश्किल होती जा रही है
ऐसे हालात में लोग मजबूरी में विदेश जाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जब वैध रोज़गार नहीं मिलता, तो कुछ लोग गलत रास्ता अपना लेते हैं, जिससे पूरे देश की बदनामी होती है।
नो-फ्लाई लिस्ट में 66 हजार से ज्यादा लोग
अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद पाकिस्तान सरकार ने भी कार्रवाई शुरू की है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 66,154 यात्रियों को नो-फ्लाई लिस्ट में डाल दिया गया है, ताकि वे खाड़ी देशों में जाकर भीख मांगने या अवैध गतिविधियों में शामिल न हो सकें।
पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि इनमें से कई लोग पहले भी डिपोर्ट हो चुके हैं, लेकिन बार-बार नए पासपोर्ट बनवाकर विदेश जाने की कोशिश कर रहे थे।
शहबाज शरीफ सरकार पर सवाल
इस पूरे मामले ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार:
रोजगार के अवसर पैदा करने में नाकाम रही
विदेश नीति को सही ढंग से संभाल नहीं पाई
अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की छवि सुधारने में विफल रही
आलोचकों का कहना है कि यह स्थिति पाकिस्तान के लिए “इंटरनेशनल एंबैरसमेंट” बन चुकी है।
खाड़ी देशों की सख्ती के पीछे वजह
खाड़ी देशों में पहले से ही प्रवासी मजदूरों की बड़ी संख्या मौजूद है। ऐसे में भीख मांगने जैसी गतिविधियों से:
स्थानीय कानून व्यवस्था पर असर पड़ता है
धार्मिक स्थलों की गरिमा प्रभावित होती है
अवैध नेटवर्क को बढ़ावा मिलता है
इसी कारण सऊदी अरब और UAE ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है।
आम पाकिस्तानी नागरिकों पर असर
इस सख्ती का असर उन पाकिस्तानी नागरिकों पर भी पड़ रहा है जो ईमानदारी से काम करना चाहते हैं।
वीजा प्रक्रिया और सख्त हो गई है
नौकरी के अवसर सीमित हो रहे हैं
खाड़ी देशों में पाकिस्तानियों को शक की निगाह से देखा जा रहा है
कई परिवारों की रोज़ी-रोटी अब खतरे में पड़ गई है।
समाधान क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान को दीर्घकालिक समाधान की जरूरत है:
देश में रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं
कौशल विकास पर ध्यान दिया जाए
विदेश जाने से पहले नागरिकों की सख्त जांच हो
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसा बहाल किया जाए
केवल पुलिसिया कार्रवाई से समस्या का स्थायी हल संभव नहीं है।
सऊदी अरब और UAE की कार्रवाई पाकिस्तान के लिए एक चेतावनी है। यह मामला सिर्फ भिखारियों का नहीं, बल्कि एक गहरे आर्थिक और सामाजिक संकट का संकेत है। अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में पाकिस्तान को और कड़े अंतरराष्ट्रीय कदमों का सामना करना पड़ सकता है।
यह वक्त है कि पाकिस्तान सरकार जमीनी हकीकत को समझे और अपने नागरिकों को मजबूरी में गलत रास्ते पर जाने से रोके।
Pakistan is facing a severe economic crisis that has led to a rise in Pakistani beggars in Gulf countries like Saudi Arabia and the UAE. Saudi Arabia has deported over 56,000 Pakistani nationals for begging, while Pakistan has placed more than 66,000 people on a no-fly list. This situation has caused international embarrassment for the Shahbaz Sharif government and raised concerns about Pakistan’s economy, unemployment, and global image.


















