AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मंगलवार को प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित रूप से अवैध निर्माण पर बुलडोजर चला दिया। यह कार्रवाई वाजिद वेग से जुड़े एक भवन पर की गई, जिन्हें बरेली दंगों के मामले में आरोपी बताया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि यह इमारत एक मैरिज हॉल के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी और बिना किसी नक्शा स्वीकृति के बनाई गई थी।

कैसा था यह भवन
प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, यह निर्माण लगभग 800 वर्ग गज क्षेत्रफल में फैला हुआ था। दो मंजिला इस भवन में कुल पांच कमरे, नीचे की मंजिल पर एक छोटा हाल और ऊपर की मंजिल पर एक बड़ा हाल बना हुआ था। अधिकारियों का कहना है कि यह संरचना पिछले पांच वर्षों में बिना किसी वैधानिक अनुमति के खड़ी की गई थी।
बताया जा रहा है कि इस भवन के निर्माण में करीब 5 करोड़ रुपये की लागत आई थी। बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) का कहना है कि न तो नक्शा पास कराया गया था और न ही किसी तरह की निर्माण अनुमति ली गई थी।
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दंगे के बाद सील हुआ था भवन
सूत्रों के मुताबिक, बरेली में हुए हालिया सांप्रदायिक दंगों के बाद वाजिद वेग का नाम सामने आने के बाद यह भवन करीब एक महीने पहले सील कर दिया गया था। आरोप है कि वाजिद वेग ने इस्लामिया ग्राउंड में भीड़ जुटाने में अहम भूमिका निभाई थी, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई।
दंगे के बाद से वाजिद वेग फरार बताए जा रहे हैं और पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
कैसे हुई बुलडोजर कार्रवाई
मंगलवार दोपहर को बरेली विकास प्राधिकरण की टीम तीन बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंची। उनके साथ भारी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर दी गई और आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई।
कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल लगातार क्षेत्र में गश्त करता रहा, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
परिवार ने आरोपों को किया खारिज
इस कार्रवाई पर वाजिद वेग के परिवार ने कड़ा ऐतराज जताया है। वाजिद वेग के भाई आजिद वेग का कहना है कि जिस इमारत को मैरिज हॉल बताया जा रहा है, वह असल में उनका पुस्तैनी मकान है।
आजिद वेग ने कहा,
“यह कोई मैरिज हॉल नहीं है। यह हमारा पुराना घर है, जहां सिर्फ घरेलू कार्यक्रम होते हैं। इसे हाल ही में थोड़ा नया बनवाया गया था। हमारे भाई के खिलाफ झूठी शिकायतें की गई हैं और मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इसके बावजूद बिना अंतिम फैसले के यह कार्रवाई की जा रही है।”
तौकीर रजा से संबंधों पर सफाई
परिवार ने यह भी साफ किया कि उनका तौकीर रजा से कोई संबंध नहीं है। आजिद वेग का कहना है कि राजनीतिक और सामाजिक माहौल के चलते उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला अदालत में है, तो फिर प्रशासन ने फैसला आने से पहले ही बुलडोजर क्यों चला दिया।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। अधिकारियों के अनुसार, कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद निर्माण को वैध साबित करने से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।
प्रशासन का दावा है कि यह कदम अवैध निर्माण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है और इसमें किसी प्रकार का पक्षपात नहीं किया गया है।
इलाके में चर्चा और सियासी हलचल
इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे कानून का सख्त पालन बता रहे हैं, तो कुछ इसे चयनात्मक कार्रवाई कह रहे हैं। विपक्षी दलों ने भी प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बुलडोजर कार्रवाई अब उत्तर प्रदेश की राजनीति और कानून व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुकी है, जहां हर कार्रवाई पर सामाजिक और राजनीतिक बहस शुरू हो जाती है।
आगे क्या?
फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई जारी है और पुलिस वाजिद वेग की तलाश में जुटी हुई है। दूसरी ओर, परिवार कोर्ट के जरिए राहत की उम्मीद कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर और तूल पकड़ सकता है।
The Bareilly administration carried out a major bulldozer action on an allegedly illegal marriage hall linked to Wajid Baig, who is accused in the Bareilly riots case. The Bareilly Development Authority stated that the structure was built without approved maps, while the family denied the allegations, calling it an ancestral home. The demolition has sparked political debate and raised questions about illegal construction, law enforcement, and riot-related investigations in Uttar Pradesh.





