AIN NEWS 1: आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन और इंटरनेट हर व्यक्ति की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। जानकारी, मनोरंजन और संवाद के साथ-साथ इंटरनेट पर ऐसी सामग्री भी मौजूद है, जो अगर बिना समझदारी के देखी जाए, तो मानसिक और सामाजिक नुकसान पहुंचा सकती है। पोर्नोग्राफी भी इसी तरह की एक सामग्री है, जिस पर समाज में अक्सर बहस होती रहती है। सवाल यह नहीं है कि पोर्न देखना सही है या गलत, बल्कि यह है कि इसे किस उम्र में, कितनी मात्रा में और किस मानसिक स्थिति में देखा जा रहा है।
📱 पोर्नोग्राफी क्या है और लोग इसे क्यों देखते हैं?
पोर्नोग्राफी ऐसी दृश्य या ऑडियो सामग्री होती है, जिसका उद्देश्य यौन उत्तेजना पैदा करना होता है। इंटरनेट के आसान और सस्ते होने के कारण यह सामग्री अब कुछ ही सेकंड में मोबाइल तक पहुंच जाती है।
कई लोग इसे जिज्ञासा, अकेलेपन, तनाव या मनोरंजन के तौर पर देखते हैं, लेकिन कई बार यही आदत धीरे-धीरे लत का रूप ले लेती है।
⚖️ कानूनी नजरिए से पोर्न देखना
भारत में कानून के अनुसार:
18 वर्ष से ऊपर का व्यक्ति निजी तौर पर पोर्न देखता है, तो यह अपराध नहीं है।
लेकिन नाबालिगों से जुड़ा कंटेंट,
हिंसा या जबरदस्ती वाला वीडियो,
पोर्न का प्रचार, शेयरिंग या बिक्री
ये सभी कानूनन अपराध की श्रेणी में आते हैं।
यानी कानून व्यक्ति की निजता का सम्मान करता है, लेकिन समाज और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।
🧠 मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर
शुरुआत में पोर्न देखने से कुछ लोगों को अस्थायी खुशी या तनाव से राहत महसूस हो सकती है, लेकिन लगातार और अत्यधिक सेवन कई समस्याएं पैदा कर सकता है।
दिमाग में गलत यौन अपेक्षाएं बनने लगती हैं
वास्तविक रिश्तों में असंतोष बढ़ता है
ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत
आत्मविश्वास में कमी
अकेलापन और चिड़चिड़ापन
विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार पोर्न देखने से दिमाग डोपामिन हार्मोन का आदी हो जाता है, जिससे सामान्य खुशी के साधन प्रभावहीन लगने लगते हैं।
👨👩👧👦 रिश्तों और समाज पर प्रभाव
पोर्न का अत्यधिक प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। इसका असर रिश्तों और सामाजिक सोच पर भी पड़ता है।
पति-पत्नी के रिश्तों में दूरी
भावनात्मक जुड़ाव में कमी
महिलाओं या पुरुषों को वस्तु की तरह देखने की सोच
युवाओं में सेक्स को लेकर भ्रम
जब कल्पना और वास्तविकता के बीच फर्क मिटने लगता है, तब समस्याएं गहरी हो जाती हैं।
🚨 पोर्न की लत के संकेत क्या हैं?
अगर कोई व्यक्ति:
बार-बार खुद को रोकने के बावजूद पोर्न देखता है
काम, पढ़ाई या रिश्तों पर इसका असर दिखने लगे
तनाव, उदासी या अकेलेपन में सिर्फ पोर्न का सहारा ले
देर रात तक मोबाइल पर समय बिताए
तो यह लत के शुरुआती संकेत हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
🔐 सतर्क रहने के लिए क्या जरूरी है?
✅ 1. उम्र का ध्यान रखें
18 साल से कम उम्र के बच्चों और किशोरों के लिए पोर्न देखना मानसिक विकास के लिए हानिकारक हो सकता है। माता-पिता को बच्चों के इंटरनेट उपयोग पर नजर रखनी चाहिए।
✅ 2. मोबाइल और इंटरनेट पर नियंत्रण
Safe Search और Parental Control का इस्तेमाल
स्क्रीन टाइम सीमित करना
सोते समय फोन दूर रखना
✅ 3. स्वस्थ विकल्प अपनाएं
योग और व्यायाम
किताबें पढ़ना
दोस्तों और परिवार से बातचीत
कोई रचनात्मक या सामाजिक गतिविधि
✅ 4. खुलकर बात करें
अगर किसी को लग रहा है कि वह इस आदत से बाहर नहीं निकल पा रहा, तो काउंसलर, मनोवैज्ञानिक या भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी है।
फोन या इंटरनेट पर पोर्न देखना अपने-आप में सबसे बड़ा खतरा नहीं है। असली समस्या तब शुरू होती है, जब यह आदत नियंत्रण से बाहर हो जाती है।
संयम, समझदारी और आत्म-नियंत्रण के साथ डिजिटल दुनिया का इस्तेमाल ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
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