AIN NEWS 1: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले ने देश की राजनीति में जबरदस्त हलचल मचा दी है। वेनेजुएला में अमेरिकी सेना भेजने और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के आदेश को लेकर अमेरिका के भीतर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। खास बात यह है कि इस फैसले का विरोध केवल विपक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि कई सत्तारूढ़ दल के सांसद और भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद भी खुलकर ट्रंप के खिलाफ खड़े हो गए हैं।

🟠 क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप को हरी झंडी दे दी है। इस कार्रवाई का मकसद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करना और वहां की मौजूदा सरकार को हटाना बताया जा रहा है। अमेरिका पहले से ही मादुरो सरकार को अवैध मानता रहा है और उस पर ड्रग तस्करी, मानवाधिकार उल्लंघन और तानाशाही के आरोप लगाता रहा है।
हालांकि, इस बार मामला सिर्फ कूटनीतिक दबाव या आर्थिक प्रतिबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे सैन्य कार्रवाई की बात हो रही है। यही वजह है कि अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस में इस फैसले को लेकर गुस्सा फूट पड़ा है।
🟠 सांसदों का आरोप – असंवैधानिक और गैरकानूनी फैसला
कई अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप के इस कदम को अमेरिकी संविधान के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि किसी भी देश में युद्ध या सैन्य कार्रवाई का फैसला राष्ट्रपति अकेले नहीं ले सकता। इसके लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होती है।
भारतीय मूल के अमेरिकी सांसदों ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि ट्रंप सत्ता का खुला दुरुपयोग कर रहे हैं और देश को एक ऐसे युद्ध में धकेलना चाहते हैं, जिसका अंत दिखाई नहीं देता।
एक सांसद ने साफ शब्दों में कहा,
“यह फैसला न केवल असंवैधानिक है, बल्कि अमेरिका की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए भी खतरा है।”
🟠 “एक और अंतहीन युद्ध की ओर अमेरिका”
सांसदों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अमेरिका पहले ही इराक, अफगानिस्तान और सीरिया जैसे युद्धों का खामियाजा भुगत चुका है। हजारों सैनिकों की जान गई, अरबों डॉलर खर्च हुए और अंत में कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।
अब वेनेजुएला में सैन्य दखल से भी वही स्थिति पैदा होने का डर है। सांसदों का कहना है कि ट्रंप अमेरिका को एक और “एंडलेस वॉर” यानी अंतहीन युद्ध में झोंक रहे हैं, जिसका नुकसान आम अमेरिकी नागरिकों को उठाना पड़ेगा।
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🟠 भारतीय मूल के सांसद क्यों हैं ज्यादा नाराज?
भारतीय मूल के अमेरिकी सांसदों का मानना है कि अमेरिका को अपनी विदेश नीति में संयम और समझदारी दिखानी चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी देश की आंतरिक राजनीति में सेना भेजना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।
एक सांसद ने कहा,
“हम लोकतंत्र की बात करते हैं, लेकिन जबरन किसी सरकार को गिराने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।”
🟠 ट्रंप का तर्क क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थकों का कहना है कि वेनेजुएला में मादुरो सरकार ड्रग माफिया से जुड़ी हुई है और वहां की जनता अत्याचार झेल रही है। ट्रंप का दावा है कि सैन्य कार्रवाई से वेनेजुएला को तानाशाही से मुक्ति मिलेगी।
हालांकि, सांसदों का कहना है कि यह तर्क पहले भी इराक और अफगानिस्तान के लिए दिया गया था, लेकिन नतीजे सबके सामने हैं।
🟠 अमेरिका की वैश्विक छवि पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई करता है, तो इससे उसकी वैश्विक छवि को भारी नुकसान होगा। लैटिन अमेरिकी देश पहले से ही अमेरिका की दखलअंदाजी को लेकर सशंकित रहते हैं।
इसके अलावा, रूस और चीन जैसे देश भी वेनेजुएला के समर्थन में खड़े हो सकते हैं, जिससे यह संघर्ष अंतरराष्ट्रीय टकराव का रूप ले सकता है।
🟠 आगे क्या?
फिलहाल यह मामला अमेरिकी कांग्रेस में गरमाया हुआ है। कई सांसद इस मुद्दे पर आपात बहस और प्रस्ताव लाने की तैयारी में हैं, ताकि राष्ट्रपति की शक्तियों पर रोक लगाई जा सके।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति का बड़ा चुनावी सवाल बन सकता है।
The controversy surrounding Donald Trump’s decision to launch US military action in Venezuela has sparked strong reactions from US lawmakers. Many members of Congress, including Indian-American lawmakers, have criticized the move to arrest Venezuelan President Nicolas Maduro, calling it unconstitutional and illegal. They warn that Trump is pushing the United States toward another endless war, similar to past conflicts in the Middle East. The Venezuela crisis has now become a major political issue in the United States, raising serious questions about presidential power, foreign policy, and international law.


















