AIN NEWS 1: पिछले पांच साल से अधिक समय से जेल में बंद Umar Khalid और Sharjeel Imam की किस्मत का फैसला आज देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट में होना है। दोनों ही नाम 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में लंबे समय से विचाराधीन कैदियों के रूप में जेल में बंद हैं। आज की सुनवाई पर न केवल उनके परिवारों की नजरें टिकी हैं, बल्कि पूरे देश में इस मामले को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी हलकों में खास दिलचस्पी देखी जा रही है।

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🔹 मामला क्या है?
Umar Khalid और Sharjeel Imam पर दिल्ली दंगों के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने और हिंसा फैलाने की साजिश रचने के आरोप लगाए गए थे। इन मामलों में उनके खिलाफ UAPA (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत केस दर्ज किया गया, जो अपने सख्त प्रावधानों के लिए जाना जाता है। इसी कानून के कारण उनकी जमानत याचिकाएं अब तक मंजूर नहीं हो सकी हैं।
दोनों आरोपियों का कहना है कि वे निर्दोष हैं और उन्हें केवल उनके विचारों और भाषणों के कारण निशाना बनाया गया है। वहीं, जांच एजेंसियों का दावा है कि उनके बयानों और गतिविधियों ने हिंसा को बढ़ावा दिया।
🔹 पांच साल से ज्यादा की कैद, लेकिन ट्रायल अधूरा
इस मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि Umar Khalid और Sharjeel Imam दोनों ही पांच साल से ज्यादा समय से जेल में हैं, लेकिन अब तक मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं हो पाई है। उनके वकीलों का तर्क है कि इतने लंबे समय तक बिना दोष सिद्ध हुए जेल में रखना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है। इसी आधार पर बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत की मांग की है।
🔹 सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा आज?
आज सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि:
क्या लंबी न्यायिक हिरासत जमानत का आधार बन सकती है?
क्या UAPA जैसे सख्त कानून के बावजूद व्यक्तिगत स्वतंत्रता को दिखा जाना चाहिए?
क्या ट्रायल में हो रही देरी आरोपियों को राहत देने का कारण बन सकती है?
कोर्ट के सामने यह भी सवाल है कि क्या किसी व्यक्ति को सिर्फ आरोपों के आधार पर सालों तक जेल में रखा जाना न्यायसंगत है।
🔹 पहले के फैसलों का असर
पिछले कुछ समय में सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में यह टिप्पणी की है कि जमानत नियम है और जेल अपवाद। अदालत यह भी कह चुकी है कि यदि ट्रायल में अत्यधिक देरी हो रही है, तो आरोपी को राहत दी जा सकती है, भले ही मामला गंभीर क्यों न हो।
इन्हीं पुराने फैसलों के आधार पर Umar Khalid और Sharjeel Imam के वकीलों को उम्मीद है कि अदालत आज कोई राहतभरा फैसला दे सकती है।
🔹 राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी तीखी बहस होती रही है। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देखते हैं, जबकि कुछ का मानना है कि कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी #UmarKhalid और #SharjeelImam ट्रेंड करते रहे हैं। कई मानवाधिकार संगठन लंबे समय से उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं।
🔹 परिवारों की उम्मीद और इंतजार
जेल में बंद दोनों आरोपियों के परिवारों के लिए यह दिन बेहद अहम है। वर्षों से चल रहा इंतजार शायद आज खत्म हो जाए। परिवारों का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया की सुस्ती ने उनकी जिंदगी को ठहराव में डाल दिया है।
उनका यह भी कहना है कि चाहे फैसला जो भी हो, कम से कम न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आनी चाहिए ताकि सच जल्द सामने आ सके।
🔹 आगे क्या?
अगर सुप्रीम कोर्ट जमानत देता है, तो यह फैसला न केवल इन दोनों मामलों के लिए, बल्कि UAPA के तहत चल रहे अन्य मामलों के लिए भी मिसाल बन सकता है। वहीं, अगर जमानत खारिज होती है, तो कानूनी लड़ाई और लंबी खिंच सकती है।
आज का फैसला यह भी तय करेगा कि देश में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन किस दिशा में जाता है।
The Supreme Court of India is set to deliver a crucial verdict today on the bail pleas of Umar Khalid and Sharjeel Imam, who have been in jail for over five years in connection with the Delhi riots case under the UAPA law. The decision is expected to have a significant impact on debates around personal liberty, prolonged incarceration, and bail rights in serious criminal cases.


















