AIN NEWS 1: दिल्ली के पश्चिमी हिस्से में स्थित कुंवर सिंह कॉलोनी इन दिनों एक ऐसे संकट से गुजर रही है, जो धीरे-धीरे लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को बीमार बना रहा है। यह संकट किसी तूफान या बाढ़ का नहीं है, बल्कि उस चीज़ का है, जिसके बिना ज़िंदगी की कल्पना भी नहीं की जा सकती—पानी।
हर सुबह और शाम तय समय पर नल खुलते हैं। घरों के बाहर बाल्टियाँ, ड्रम और केन पहले से सजे रहते हैं। महिलाएं नलों के पास खड़ी होती हैं, बच्चे स्कूल जाने से पहले पानी भरने में मदद करते हैं। लेकिन बीते करीब दो महीनों से इन बर्तनों में जो भर रहा है, उसे लोग अब पानी कहने से हिचकने लगे हैं।
बदबू से शुरू होकर डर तक पहुंचा पानी
स्थानीय लोगों के अनुसार, पानी की समस्या अचानक नहीं आई। पहले हल्की बदबू महसूस हुई। फिर पानी का रंग बदला—कभी पीला, कभी मटमैला। कुछ दिनों बाद नल से निकलने वाला पानी झाग छोड़ने लगा। अब हालात ऐसे हैं कि लोग नल खोलते वक्त ही डर जाते हैं।
कुंवर सिंह कॉलोनी की रहने वाली सीमा देवी बताती हैं,
“पहले लगा कुछ दिन की बात होगी। लेकिन अब तो हाल यह है कि पानी उबालने के बाद भी डर लगता है। बच्चों को पिलाते वक्त मन कांप जाता है।”
बीमारियां बढ़ीं, लेकिन जवाबदेही नहीं
गंदे पानी का असर अब साफ दिखने लगा है। कॉलोनी में दस्त, उल्टी, पेट दर्द, त्वचा संक्रमण और बुखार के मामले तेजी से बढ़े हैं। कई घरों में एक-एक करके सभी सदस्य बीमार पड़ रहे हैं।
स्थानीय मेडिकल स्टोर संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में पेट से जुड़ी दवाओं की बिक्री अचानक बढ़ गई है। एक दुकानदार ने बताया,
“हर दूसरा ग्राहक पानी से जुड़ी बीमारी की दवा मांग रहा है। लेकिन बीमारी की जड़ पर कोई काम नहीं हो रहा।”
बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
इस पूरे संकट में सबसे ज्यादा खतरे में हैं बच्चे और बुजुर्ग। कमजोर इम्युनिटी के कारण वे जल्दी बीमार पड़ रहे हैं। कई माता-पिता अब बच्चों को नल का पानी पूरी तरह बंद कर चुके हैं, लेकिन हर परिवार के लिए रोज़ाना बोतलबंद पानी खरीदना संभव नहीं है।
एक बुजुर्ग निवासी कहते हैं,
“पेंशन में दवा खरीदें या पानी? सरकार को यह सोचना चाहिए।”
शिकायतें हुईं, लेकिन सिस्टम खामोश
कॉलोनी के लोगों का कहना है कि उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड, स्थानीय पार्षद और हेल्पलाइन नंबरों पर कई बार शिकायत की है। कुछ जगहों पर पानी के सैंपल भी लिए गए, लेकिन न तो रिपोर्ट सामने आई और न ही हालात सुधरे।
लोगों का आरोप है कि अधिकारी आते हैं, तस्वीरें खिंचवाते हैं और चले जाते हैं। न पाइपलाइन बदली गई, न टैंकों की सफाई हुई।
क्या सीवर और पानी की लाइनें मिल गई हैं?
स्थानीय लोगों को आशंका है कि कहीं सीवर लाइन और पानी की पाइपलाइन आपस में लीक होकर मिल तो नहीं गईं। कई इलाकों में पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिनके कारण पूरा मोहल्ला महीनों तक बीमार रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते जांच और मरम्मत नहीं हुई, तो यह स्थिति बड़े स्तर की जनस्वास्थ्य आपदा में बदल सकती है।
भागीरथपुरा की याद दिलाता संकट
दिल्ली के लोग अभी भूले नहीं हैं कि कैसे कुछ साल पहले भागीरथपुरा में गंदे पानी ने सैकड़ों लोगों को बीमार कर दिया था। कुंवर सिंह कॉलोनी के हालात अब उसी कहानी की याद दिलाने लगे हैं—शुरुआत में शिकायतें, फिर बीमारी, और अंत में प्रशासन की देर से जाग।
पानी नहीं, यह भरोसे का संकट है
यह सिर्फ पानी की समस्या नहीं है। यह सिस्टम पर भरोसे का संकट है। जब लोगों को अपने ही घर के नल से डर लगने लगे, तो यह किसी भी शहर के लिए खतरनाक संकेत है।
कुंवर सिंह कॉलोनी के लोग अब सिर्फ साफ पानी नहीं, बल्कि जवाब चाहते हैं—
कब सुधरेगा पानी?
कौन जिम्मेदार है?
और अगर अब नहीं, तो कब?
Kunwar Singh Colony in West Delhi is facing a severe water crisis as residents report contaminated tap water with foul smell, discoloration, and rising cases of water borne diseases. The Delhi water crisis has once again raised concerns about public health, failing infrastructure, and contaminated drinking water. Locals fear that without urgent action, Kunwar Singh Colony may become the next major public health crisis zone in Delhi.



















