AIN NEWS 1: देश की राजधानी दिल्ली इस समय भीषण ठंड की चपेट में है। सर्द हवाओं, घने कोहरे और गिरते तापमान ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। इसी बीच राजनीतिक मोर्चे पर भी माहौल गर्म है। महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव से पहले भाषा और पहचान को लेकर राज ठाकरे के बयान ने एक नई बहस छेड़ दी है। एक ओर लोग ठंड से जूझ रहे हैं, तो दूसरी ओर देश की राजनीति में बयानबाज़ी का ताप बढ़ता जा रहा है।
दिल्ली में सीजन की सबसे ठंडी रात
मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली में इस सर्दी का अब तक का सबसे कम तापमान 2.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। यह सामान्य से कई डिग्री कम है। पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं ने ठंड को और अधिक तेज कर दिया है। सुबह और रात के समय ठिठुरन इतनी बढ़ गई है कि लोग घरों से निकलने से बच रहे हैं।
सड़कों पर कोहरा छाया हुआ है, जिससे ट्रैफिक की रफ्तार धीमी पड़ गई है। ट्रेनें और उड़ानें भी प्रभावित हो रही हैं। बेघर लोगों के लिए यह ठंड जानलेवा साबित हो सकती है, ऐसे में प्रशासन ने रैन बसेरों और अलाव की व्यवस्था बढ़ाई है।
उत्तर भारत में शीतलहर का प्रकोप
दिल्ली के साथ-साथ राजस्थान के कई इलाकों में तापमान शून्य से नीचे चला गया है। माउंट आबू जैसे पर्यटन स्थलों पर पानी जमने की खबरें सामने आई हैं। पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में भी शीतलहर का असर साफ दिखाई दे रहा है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक ठंड से राहत मिलने की संभावना कम है। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
राजनीति में गरमाया भाषा का मुद्दा
जहां एक ओर मौसम की ठंड लोगों को कंपा रही है, वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाज़ी का पारा चढ़ा हुआ है। मुंबई में आयोजित एक संयुक्त चुनावी रैली में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने हिंदी भाषा और उत्तर प्रदेश-बिहार से आए लोगों को लेकर विवादित बयान दिया।
राज ठाकरे ने कहा कि यूपी और बिहार के लोगों को यह समझना चाहिए कि “हिंदी आपकी भाषा नहीं है।” उनके इस बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
नगर निकाय चुनाव से पहले बड़ा संदेश
15 जनवरी को होने वाले मुंबई नगर निकाय चुनाव से पहले यह रैली बेहद अहम मानी जा रही है। इस रैली में शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे भी मौजूद थे। दोनों नेताओं ने लंबे समय बाद एक मंच साझा किया और मराठी अस्मिता, हिंदुत्व और महाराष्ट्र के हितों की बात की।
उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने और राज ठाकरे ने अपने पुराने मतभेदों को भुला दिया है। उनका कहना था कि मुंबई और महाराष्ट्र को “बचाने” के लिए उनका साथ आना जरूरी था।
मुंबई को लेकर साझा रणनीति
रैली में दोनों नेताओं ने खुद को मुंबई की राजनीति में एकमात्र मजबूत विकल्प के रूप में पेश किया। उनका संदेश साफ था कि मराठी मानुष और स्थानीय संस्कृति को प्राथमिकता दी जाएगी।
हालांकि, राज ठाकरे के हिंदी वाले बयान को लेकर विरोधी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कई नेताओं ने इसे विभाजनकारी और देश की एकता के खिलाफ बताया है।
बयान बनाम जमीनी हकीकत
राज ठाकरे का यह बयान ऐसे समय आया है जब मुंबई देश के हर कोने से आए लोगों का शहर है। यहां उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक के लोग रहते और काम करते हैं। ऐसे में भाषा को लेकर दिया गया बयान एक बार फिर पुरानी बहस को हवा देता नजर आ रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में इस तरह के बयान भावनाओं को भड़काने के लिए दिए जाते हैं, ताकि एक खास वोट बैंक को साधा जा सके।
देश इस समय दो तरह की चुनौतियों से जूझ रहा है—एक प्राकृतिक और दूसरी राजनीतिक। उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, वहीं महाराष्ट्र में भाषा और पहचान की राजनीति ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है।
आने वाले दिनों में मौसम कितना बदलेगा और राजनीति किस दिशा में जाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल आम जनता को ठंड से बचाव और नेताओं को शब्दों की जिम्मेदारी दोनों पर ध्यान देने की जरूरत है।
India is witnessing extreme contrasts as Delhi records its coldest temperature of the season at 2.9 degrees Celsius amid a severe cold wave affecting North India, while political heat rises in Maharashtra. Raj Thackeray’s remarks on the Hindi language and migrants from Uttar Pradesh and Bihar during a Mumbai civic election rally have sparked fresh debate on language identity, Marathi pride, and regional politics ahead of the crucial municipal elections.



















