AIN NEWS 1: बांग्लादेश में आगामी आम चुनाव से ठीक पहले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बीते कुछ हफ्तों में जिस तरह से हिंदू नागरिकों को निशाना बनाया गया है, उसने न सिर्फ वहां के सामाजिक ताने-बाने को झकझोर दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। पिछले 23 दिनों में सात हिंदू नागरिकों की हत्या की पुष्टि हो चुकी है, जिससे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
चुनावी माहौल और बढ़ता तनाव
बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने हैं। ऐसे समय में जब राजनीतिक माहौल पहले से ही तनावपूर्ण है, अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा ने हालात को और भयावह बना दिया है। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंकलाब मंच के नेता उस्मान हादी की मौत के बाद से हालात और बिगड़ गए हैं। इसके बाद कई जिलों में हिंदू समुदाय के लोगों को लगातार धमकियों, हमलों और हत्या जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
समीर कुमार दास की निर्मम हत्या
ताजा मामला 28 वर्षीय समीर कुमार दास का है, जो पेशे से ऑटोरिक्शा चालक था। बताया गया कि समीर बीते रविवार शाम करीब 7 बजे ऑटोरिक्शा लेकर घर से निकला था, लेकिन देर रात तक जब वह वापस नहीं लौटा तो परिजनों को चिंता हुई। परिवार और रिश्तेदारों ने उसकी तलाश शुरू की।
रात करीब 2 बजे स्थानीय लोगों को जगतपुर गांव के एक खेत में समीर का शव मिला। उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे। पुलिस के मुताबिक, समीर को पहले बेरहमी से पीटा गया और फिर चाकू से गोदकर उसकी हत्या कर दी गई। इतना ही नहीं, हमलावर उसका ऑटोरिक्शा भी लूटकर फरार हो गए।
पुलिस की जांच और बयान
बांग्लादेश पुलिस ने इस हत्या को लेकर शुरुआती बयान जारी किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हत्या में देसी हथियारों का इस्तेमाल किया गया है और प्रथम दृष्टया यह मामला साजिशन हत्या का प्रतीत होता है। हालांकि, इस मामले में अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पुलिस का दावा है कि जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा।
इससे पहले भी हो चुकी हैं हत्याएं
समीर की हत्या कोई अकेली घटना नहीं है। इससे पहले 5 जनवरी को नरसिंदी जिले में एक हिंदू दुकानदार शरत मणि चक्रवर्ती पर धारदार हथियारों से हमला किया गया था। गंभीर रूप से घायल शरत मणि ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
इसी तरह, एक और सनसनीखेज मामला हिंदू पत्रकार राणा प्रताप बैरागी की हत्या का है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मोटरसाइकिल पर सवार हमलावर उन्हें उनकी बर्फ फैक्ट्री से बाहर बुलाकर पास की गली में ले गए। वहां कहासुनी के बाद उनके सिर में कई गोलियां मार दी गईं। यह हत्या दिनदहाड़े हुई, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।
भीड़ की हिंसा और ईशनिंदा के आरोप
कुछ मामलों में हिंसा भीड़ द्वारा की गई। दीपू दास नामक युवक की कथित तौर पर ईशनिंदा के आरोप में हत्या कर दी गई। बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के भीड़ ने उसे दोषी ठहराकर जान ले ली। वहीं, कारोबारी खोकोन दास पर भीड़ ने हमला किया और पेट्रोल डालकर उन्हें जिंदा जला दिया गया।
अब तक जिन हिंदू नागरिकों की हत्या की पुष्टि हुई है, उनमें राणा प्रताप बैरागी, दीपू दास, अमृत मंडल, बज्रेंद विश्वास, खोकोन दास और समीर कुमार दास शामिल हैं। इन घटनाओं ने पूरे देश में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।
हिंदू समुदाय में भय का माहौल
लगातार हो रही हत्याओं और हमलों के कारण बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कई परिवारों ने अपने बच्चों को घर से बाहर भेजना बंद कर दिया है, वहीं कुछ लोग पलायन की भी सोच रहे हैं। स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
भारत ने जताई कड़ी चिंता
इन घटनाओं पर भारत ने भी गहरी चिंता व्यक्त की है। पिछले सप्ताह भारत के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि वह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा,
“हम बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं और उनकी संपत्तियों पर बार-बार हो रहे हमलों का एक चिंताजनक पैटर्न देख रहे हैं। ऐसी घटनाओं से सख्ती और तुरंत निपटा जाना चाहिए।”
भारत ने उम्मीद जताई है कि बांग्लादेश सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाएगी।
आगे क्या?
चुनाव से पहले बढ़ती हिंसा ने बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि बांग्लादेश सरकार इन घटनाओं पर कैसे प्रतिक्रिया देती है और दोषियों को कब तक न्याय के कटघरे में लाया जाता है।
Violence against Hindus in Bangladesh has intensified ahead of the national elections, with at least seven Hindu citizens killed in just 23 days. These Bangladesh Hindu killings have raised serious concerns about minority safety, law and order, and political instability. Reports of targeted attacks, mob violence, and murders have drawn international attention, including strong concern from India. The situation highlights growing fears among minorities and questions the effectiveness of security measures during the Bangladesh election period.


















