AIN NEWS 1: वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनरुद्धार और सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर इन दिनों विवाद गहराता जा रहा है। आरोप है कि इस दौरान कुछ प्राचीन चबूतरों और पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर की एक प्रतिमा को बुलडोजर से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। जैसे ही इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, लोगों में नाराज़गी फैल गई और प्रशासन पर सवाल उठने लगे।
मणिकर्णिका घाट केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि काशी की आत्मा माना जाता है। यहां हर दिन सैकड़ों अंतिम संस्कार होते हैं और यह घाट सदियों से आस्था, परंपरा और इतिहास का प्रतीक रहा है। ऐसे में किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ या लापरवाही की खबर लोगों की भावनाओं को आहत करती है। यही कारण है कि जैसे ही मूर्तियों और ऐतिहासिक संरचनाओं के टूटने की तस्वीरें वायरल हुईं, विरोध के स्वर तेज हो गए।
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सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों से बढ़ा विवाद
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ तस्वीरें और वीडियो तेजी से साझा किए गए, जिनमें मणिकर्णिका घाट क्षेत्र में टूटी हुई संरचनाएं दिखाई दे रही थीं। इन्हें लेकर यह दावा किया गया कि घाट के पुनरुद्धार के नाम पर ऐतिहासिक विरासत को नष्ट किया जा रहा है। कई लोगों ने इसे सांस्कृतिक धरोहर पर हमला बताते हुए सरकार से जवाब मांगा।
विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे को उठाया और कहा कि विकास के नाम पर इतिहास से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, अहिल्याबाई होल्कर जैसी ऐतिहासिक शख्सियत की मूर्ति को नुकसान पहुंचना बेहद गंभीर मामला है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान
इस विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी पहुंचे। उन्होंने पूरे मामले पर खुलकर अपनी बात रखी और आरोपों को सिरे से खारिज किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर काशी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाने के लिए अधूरी और भ्रामक तस्वीरें साझा की जा रही हैं।
सीएम योगी ने कहा,
“मुझे याद है जब काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का काम शुरू हुआ था, तब भी इसी तरह की साजिशें रची गई थीं। आज फिर वही लोग काशी को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। टूटी हुई मूर्तियों की तस्वीरें डालकर यह झूठ फैलाया जा रहा है कि मूर्तियां तोड़ी जा रही हैं। इससे बड़ा सफेद झूठ कुछ नहीं हो सकता।”
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सरकार का उद्देश्य काशी की विरासत को संवारना है, न कि उसे नुकसान पहुंचाना। उन्होंने कहा कि विकास और संरक्षण दोनों को साथ लेकर चलना ही सरकार की प्राथमिकता है।
सरकार का पक्ष और पुनरुद्धार की मंशा
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मणिकर्णिका घाट पर जो कार्य चल रहा है, वह पूरी तरह से योजनाबद्ध और विशेषज्ञों की निगरानी में किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि कुछ अस्थायी या जर्जर संरचनाओं को हटाया गया है, जिन्हें लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है।
सरकार का दावा है कि अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को कोई स्थायी नुकसान नहीं पहुंचाया गया है और यदि कहीं मरम्मत की जरूरत है तो उसे विधिवत तरीके से पूरा किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, घाट के पुनरुद्धार का उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाना, सुरक्षा सुनिश्चित करना और काशी की ऐतिहासिक पहचान को और मजबूत करना है।
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से जुड़ी पुरानी यादें
सीएम योगी ने अपने बयान में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी कई तरह की अफवाहें फैलाई गई थीं, लेकिन आज वही परियोजना काशी की पहचान बन चुकी है और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इसकी सराहना कर रहे हैं।
उनके मुताबिक, कुछ लोग हर बड़े विकास कार्य का विरोध करते हैं और बिना तथ्यों की जांच किए भावनात्मक मुद्दे खड़े करते हैं। मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सरकारी कार्यों की सच्चाई को समझें।
जनता की भावनाएं और आगे की राह
हालांकि मुख्यमंत्री के बयान के बाद भी स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की भावनाएं पूरी तरह शांत नहीं हुई हैं। कई लोगों का कहना है कि काशी जैसे पवित्र और ऐतिहासिक शहर में हर कार्य अत्यंत संवेदनशीलता के साथ होना चाहिए और जनता को समय-समय पर सही जानकारी दी जानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शिता और संवाद ही ऐसे विवादों को खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका है। यदि सरकार और प्रशासन पुनरुद्धार कार्य की पूरी जानकारी सार्वजनिक करें और स्थानीय लोगों को विश्वास में लें, तो गलतफहमियों की गुंजाइश कम हो सकती है।
मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनरुद्धार कार्य को लेकर उठा विवाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि विकास और विरासत के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ शब्दों में आरोपों को झूठा बताते हुए इसे काशी को बदनाम करने की साजिश करार दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस मुद्दे को किस तरह सुलझाता है और जनता के भरोसे को कैसे मजबूत करता है।
The Manikarnika Ghat controversy in Varanasi has sparked intense debate after allegations surfaced about the demolition of historical structures and the Ahilyabai Holkar statue during redevelopment work. Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath strongly denied the claims, calling them misleading and politically motivated attempts to defame Kashi. The issue highlights the ongoing challenge of balancing heritage conservation with urban redevelopment in one of India’s most sacred cities.


















