AIN NEWS 1: प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों और उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों के बीच आमना-सामना हो गया। यह विवाद इतना बढ़ गया कि मेला क्षेत्र में करीब दो घंटे तक अफरा-तफरी और हंगामे का माहौल बना रहा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, माघ मेले के दौरान किसी बात को लेकर पहले पुलिस और शंकराचार्य के शिष्यों के बीच कहासुनी हुई। देखते ही देखते यह कहासुनी धक्का-मुक्की में बदल गई। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने कुछ शिष्यों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया, जिस पर शंकराचार्य ने कड़ा विरोध जताया।
🔸 शिष्यों की गिरफ्तारी के बाद बढ़ा विवाद
घटना के दौरान पुलिस ने शंकराचार्य के सभी शिष्यों को हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि एक शिष्य को पुलिसकर्मी जबरन पकड़कर अस्थायी पुलिस चौकी की ओर ले गए। इसी दौरान मेला क्षेत्र में मौजूद लोगों ने पुलिस कार्रवाई का वीडियो बना लिया, जो बाद में सामने आया।
वीडियो फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि हिरासत में लिया गया शिष्य पुलिसकर्मियों से लगातार बहस कर रहा है। कुछ ही पलों में पुलिसकर्मी आक्रोशित हो जाते हैं। एक पुलिसकर्मी उसका हाथ पकड़कर खींचता नजर आता है, जबकि दूसरा उसके बाल पकड़कर धक्का देता है।
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🔸 कैंप के अंदर कथित मारपीट का आरोप
वीडियो में यह भी दिखाई देता है कि शिष्य को कैंप के भीतर ले जाकर धक्का दिया गया, जिससे वह जमीन पर गिर पड़ता है। इसके बाद उसके बाल पकड़कर घसीटा जाता है और कई बार मुक्के मारे जाते हैं। इस दौरान शिष्य बार-बार चीखता है और छोड़ने की गुहार लगाता है।
हालांकि, इस शिष्य की पहचान अभी तक सार्वजनिक नहीं हो पाई है, लेकिन वीडियो ने प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
🔸 शंकराचार्य का आरोप: प्रशासन ने की गुंडई
घटना को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा—
“हमें बताया गया कि जिन शिष्यों को पकड़कर अंदर ले जाया गया है, उनके साथ मारपीट की जा रही है। हमने खुद बाहर भी पीटते हुए देखा। बड़े-बड़े अधिकारी संतों को गिराकर मार रहे थे। ऐसा प्रशासनिक व्यवहार हमने पहली बार देखा है। यह सीधी गुंडई है।”
शंकराचार्य ने यह भी दावा किया कि उनके एक शिष्य मुकुंदानंद स्वामी को इस घटना में चोटें आई हैं।
🔸 माघ मेले की गरिमा पर उठे सवाल
माघ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में संतों और पुलिस के बीच इस तरह का टकराव प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। साधु-संतों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन कर रहे थे, लेकिन उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।
वहीं दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक इस पूरे घटनाक्रम पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
🔸 दो घंटे तक बना रहा तनाव
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शिष्यों की गिरफ्तारी और शंकराचार्य के विरोध के कारण मेला क्षेत्र में लगभग दो घंटे तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौके पर जमा हो गए, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई।
आखिरकार वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद हालात काबू में आए, लेकिन तब तक यह मामला चर्चा का विषय बन चुका था।
🔸 वीडियो ने बढ़ाई प्रशासन की मुश्किलें
दैनिक भास्कर के पास मौजूद वीडियो अब सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
धार्मिक संगठनों और संत समाज का कहना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते संयम दिखाया होता, तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती।
🔸 आगे क्या?
अब देखना होगा कि इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या मामला सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रह जाएगा—यह आने वाला वक्त बताएगा।
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