AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिला जेल से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन से लेकर आम लोगों तक को गंभीर चिंता में डाल दिया है। किन्नर समुदाय के दो गुटों के बीच हुए विवाद के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुल 13 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। लेकिन जेल में कराई गई नियमित मेडिकल जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने इस पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया।
किन्नर गुटों के विवाद से शुरू हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, प्रतापगढ़ में किन्नर समुदाय के दो गुट—मिस्बा और अंजलि—के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने दोनों पक्षों के कुल 13 लोगों को हिरासत में लेकर जिला जेल भेज दिया।
जेल प्रशासन ने कराई अनिवार्य मेडिकल जांच
जेल पहुंचने के बाद, जेल प्रशासन की ओर से सभी बंदियों की नियमित स्वास्थ्य जांच कराई गई। इसी प्रक्रिया के तहत इन 13 लोगों की भी मेडिकल स्क्रीनिंग की गई। जांच के दौरान डॉक्टरों ने एचआईवी टेस्ट समेत अन्य जरूरी जांचें कीं, ताकि जेल के भीतर किसी भी तरह के स्वास्थ्य जोखिम को रोका जा सके।
मेडिकल रिपोर्ट में सामने आया गंभीर सच
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में सामने आया कि 13 में से 7 किन्नर HIV पॉजिटिव पाए गए हैं। यह जानकारी मिलते ही जेल प्रशासन अलर्ट हो गया। अधिकारियों ने बिना देर किए सभी संक्रमित पाए गए कैदियों को अन्य बंदियों से अलग रखने की व्यवस्था कर दी, ताकि किसी भी तरह के संक्रमण का खतरा न फैले।
एक व्यक्ति निकला पुरुष, पहचान को लेकर उठा सवाल
मेडिकल जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि 13 लोगों में से एक व्यक्ति जैविक रूप से पुरुष है, जो लंबे समय से किन्नर के रूप में रह रहा था। पूछताछ में पता चला कि वह काफी समय से किन्नरों के साथ रह रहा था और उसने अपनी पहचान उसी समुदाय से जोड़ ली थी।
सूत्रों के मुताबिक, उस व्यक्ति ने स्वीकार किया कि उसने आर्थिक कारणों से किन्नर समुदाय की वेशभूषा और जीवनशैली अपनाई थी। धीरे-धीरे वह उसी माहौल में घुलता-मिलता चला गया और अब खुद को अलग पहचान में महसूस नहीं करता।
प्रशासन ने बरती अतिरिक्त सतर्कता
HIV पॉजिटिव रिपोर्ट सामने आने के बाद जेल प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू कर दी। सभी संक्रमित कैदियों के ब्लड सैंपल को आगे की विस्तृत जांच के लिए लैब भेजा गया है। साथ ही जेल के मेडिकल स्टाफ को विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
संपर्क में आए लोगों को दी गई सलाह
जेल अधीक्षक ऋषभ द्विवेदी ने बताया कि एहतियात के तौर पर उन सभी लोगों को भी जागरूक किया गया है, जो हाल के समय में इन कैदियों के संपर्क में रहे हों। मंगलवार को जब कुछ परिचित जेल में मुलाकात के लिए पहुंचे, तो प्रशासन ने उन्हें स्पष्ट सलाह दी कि वे अपनी सुरक्षा के लिए स्वेच्छा से HIV जांच जरूर कराएं।
समाज में फैल रही नई चुनौती
इस घटना के बाद समाज में एक नई बहस भी शुरू हो गई है। कुछ लोगों का कहना है कि किन्नर समुदाय की आड़ में अब कुछ पुरुष भी इस पेशे से जुड़ रहे हैं, क्योंकि बधाई, नेग और अन्य पारंपरिक माध्यमों से उन्हें अच्छी कमाई हो जाती है। कई युवक अपने गांव-घर से दूर जाकर नई पहचान बना लेते हैं, जिससे उनकी वास्तविक पहचान सामने आना मुश्किल हो जाता है।
संवेदनशील मुद्दों पर संतुलित सोच की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि HIV को लेकर डर और भ्रम के बजाय जागरूकता और जांच पर जोर दिया जाना चाहिए। HIV कोई अपराध नहीं, बल्कि एक चिकित्सकीय स्थिति है, जिसका समय पर इलाज और सावधानी से प्रबंधन संभव है। साथ ही, ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े मामलों में भी संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।
जांच जारी, रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल जेल प्रशासन को विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि जेल के भीतर स्वास्थ्य और सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
The UP Jail HIV Case from Pratapgarh District Jail has raised serious public health concerns after medical screening revealed that 7 transgenders tested HIV positive. The Pratapgarh jail administration immediately isolated the infected prisoners and sent samples for further testing. This transgender HIV case highlights the importance of regular medical screening in Uttar Pradesh jails and the need for awareness, safety protocols, and responsible handling of sensitive health issues within prisons.


















