AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सामने आया एक मामला न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि यह दिखाता है कि निजी रिश्तों में उपजी कड़वाहट किस हद तक अपराध का रूप ले सकती है। गौ-तस्करी जैसे गंभीर और संवेदनशील आरोप में एक व्यक्ति को फंसाने के लिए उसकी ही पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर ऐसी साजिश रची, जिसने पुलिस से लेकर समाज तक सभी को हैरान कर दिया।
यह मामला तब सामने आया जब पुलिस की एक सामान्य कार्रवाई के पीछे छिपा एक बड़ा षड्यंत्र धीरे-धीरे उजागर होने लगा। जांच आगे बढ़ी तो रिश्तों की परतें खुलीं, झूठी पहचान सामने आई और यह साफ हो गया कि यह सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि भरोसे और विश्वास के टूटने का भी मामला है।
बजरंग दल की सूचना से शुरू हुई कार्रवाई
घटना लखनऊ के काकोरी थाना क्षेत्र की है। 14 जनवरी को बजरंग दल की ओर से पुलिस को सूचना दी गई कि दुर्गागंज इलाके के पास एक वाहन में गोमांस की तस्करी की जा रही है। सूचना गंभीर थी, इसलिए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बताए गए स्थान पर पहुंचकर एक ऑनलाइन बुक किए गए पोर्टर वाहन को रोका।
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वाहन की तलाशी लेने पर उसमें एक गत्ते के डिब्बे में करीब 12 किलो गोमांस बरामद हुआ। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तत्काल मामले को गंभीर मानते हुए वाहन और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की।
फैक्ट्री मालिक बना आरोपी
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि वाहन अमीनाबाद निवासी वासिफ के नाम पर बुक किया गया था। वासिफ काकोरी के हरदोई रोड स्थित कुसमौरा गांव मोड़ के पास एक पेपर फैक्ट्री चलाता है। प्रारंभिक जांच में ऐसा लगने लगा कि कहीं न कहीं वासिफ इस पूरे मामले से जुड़ा हो सकता है।
गोकशी जैसे गंभीर आरोप के कारण वासिफ की मुश्किलें बढ़ती जा रही थीं। लेकिन पुलिस ने जब मामले को गहराई से खंगालना शुरू किया, तो कहानी ने एक अलग ही मोड़ ले लिया।
पत्नी और प्रेमी की साजिश का खुलासा
पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस पूरे मामले के पीछे वासिफ नहीं, बल्कि उसकी पत्नी आमीना और उसका प्रेमी आमान थे। आमीना का आमान से संपर्क वर्ष 2022 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए हुआ था। बातचीत बढ़ी और यह दोस्ती धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई।
इसी रिश्ते के चलते दोनों ने मिलकर वासिफ को रास्ते से हटाने और उसे एक गंभीर अपराध में फंसाने की योजना बनाई। योजना इतनी सोच-समझकर बनाई गई थी कि शुरुआत में पुलिस भी भ्रम में आ गई।
फर्जी पहचान और ऑनलाइन बुकिंग का खेल
जांच में सामने आया कि भोपाल निवासी आमान ने आमीना की मदद से वासिफ की पहचान का इस्तेमाल किया। वासिफ की आईडी का उपयोग कर अमीनाबाद से काकोरी तक के लिए एक ऑनलाइन पोर्टर वाहन बुक किया गया।
इसके बाद भोपाल से लाया गया गोमांस एक गत्ते में पैक कर चोरी-छिपे उसी वाहन में रख दिया गया। पूरा प्रयास यह दिखाने का था कि यह तस्करी वासिफ द्वारा कराई जा रही है।
खुद ही दी बजरंग दल को सूचना
साजिश को विश्वसनीय बनाने के लिए आमान ने एक और कदम उठाया। उसने खुद को ‘विशाल’ नाम से परिचित कराते हुए बजरंग दल को इस तथाकथित तस्करी की सूचना दी। यही सूचना बाद में पुलिस कार्रवाई की वजह बनी।
इतना ही नहीं, पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आमान ने ‘विशाल’ के नाम से बजरंग दल की सदस्यता भी ली थी। इसके लिए उसने करीब दो हजार रुपये का भुगतान किया था, ताकि उसकी पहचान पर किसी को शक न हो।
हाईकोर्ट परिसर से गिरफ्तारी और पुलिस पर कार्रवाई
मामले की जांच उस समय और तेज हो गई जब हाईकोर्ट परिसर से महिला को पकड़ने की कोशिश के दौरान विवाद खड़ा हो गया। इस घटनाक्रम में लापरवाही और नियमों के उल्लंघन के आरोप में तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया।
इसके बाद उच्च स्तर पर जांच के आदेश दिए गए, जिसमें पूरे मामले की परत-दर-परत जांच की गई। तभी जाकर यह साफ हुआ कि यह मामला गौ-तस्करी का नहीं, बल्कि एक सोची-समझी पारिवारिक और प्रेम संबंधों से जुड़ी साजिश का है।
इंस्पेक्टर का बयान
काकोरी थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सतीश चंद्र राठौर ने बताया कि जांच में यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि वासिफ को झूठे आरोप में फंसाया गया था। आरोपी आमान और आमीना ने मिलकर न केवल कानून को गुमराह करने की कोशिश की, बल्कि सामाजिक और धार्मिक भावनाओं का भी गलत इस्तेमाल किया।
समाज के लिए सबक
यह मामला केवल एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, फर्जी पहचान और निजी रिश्तों का दुरुपयोग कैसे गंभीर कानूनी और सामाजिक परिणाम पैदा कर सकता है। साथ ही यह भी कि किसी भी सूचना पर कार्रवाई से पहले निष्पक्ष और गहन जांच कितनी जरूरी है।
पुलिस अब दोनों आरोपियों के खिलाफ साजिश रचने, फर्जीवाड़ा करने और झूठी सूचना देने जैसे मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
The Lucknow cow smuggling case has exposed a shocking conspiracy where a wife and her lover allegedly framed an innocent man in a false cow slaughter case. The UP Police investigation revealed misuse of online transport booking, fake identity creation, and manipulation of religious organizations. This incident highlights the complexities of modern crimes involving social media relationships, digital fraud, and personal vendettas in Uttar Pradesh.


















