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मॉक ड्रिल क्या होती है और इसे क्यों कराया जाता है? पूरी जानकारी आसान भाषा में!

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AIN NEWS 1: आजकल जब भी कहीं सायरन बजता है या अचानक ब्लैकआउट की घोषणा होती है, तो आम लोगों के मन में डर और सवाल दोनों पैदा होते हैं। लोग सोचने लगते हैं—क्या कोई बड़ा खतरा है? क्या युद्ध होने वाला है?

दरअसल, ज़्यादातर मामलों में यह मॉक ड्रिल का हिस्सा होता है, न कि कोई असली आपदा।

मॉक ड्रिल का मकसद डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सुरक्षित रखना होता है। इसे सरकार और प्रशासन समय-समय पर आयोजित करते हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में अफरा-तफरी न मचे और सभी को पता हो कि क्या करना है।

मॉक ड्रिल क्या होती है?

मॉक ड्रिल एक तरह का पूर्वाभ्यास (Practice Exercise) है। इसमें यह परखा जाता है कि अगर अचानक—

युद्ध की स्थिति बन जाए

हवाई हमला हो

बम धमाका या आतंकी हमला हो

भूकंप, आग या किसी बड़ी आपदा का सामना करना पड़े

तो आम नागरिक, पुलिस-प्रशासन, अस्पताल, फायर ब्रिगेड और आपात सेवाएं कैसे प्रतिक्रिया देंगी।

इस दौरान कोई असली खतरा नहीं होता। सब कुछ पहले से तय योजना के तहत किया जाता है, ताकि कमियों को पहचाना जा सके और भविष्य में सुधार हो सके।

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मॉक ड्रिल क्यों कराई जाती है?

मॉक ड्रिल के पीछे कई व्यावहारिक और जरूरी कारण होते हैं। सबसे बड़ा कारण है—तैयारी।

जनता को जागरूक करने के लिए

ताकि लोग जान सकें कि सायरन बजने पर क्या करना है और क्या नहीं।

प्रशासन की तैयारियों की जांच

पुलिस, सिविल डिफेंस, मेडिकल टीम और राहत एजेंसियां कितनी जल्दी और सही तरीके से काम कर पाती हैं।

ब्लैकआउट जैसी स्थितियों का अभ्यास

ताकि युद्ध या हवाई हमले की स्थिति में रोशनी बंद रखने की आदत बने।

अफवाह और भगदड़ से बचाव

मॉक ड्रिल से लोग मानसिक रूप से तैयार रहते हैं और घबराहट कम होती है।

जान-माल का नुकसान कम करना

असली संकट आने पर नुकसान कम से कम हो, यही इसका मूल उद्देश्य है।

सीधे शब्दों में कहें तो मॉक ड्रिल संकट से पहले की समझदारी भरी तैयारी है।

भारत में पहले कब-कब मॉक ड्रिल हुई?

भारत में मॉक ड्रिल कोई नई चीज नहीं है। इतिहास में कई बार इसकी जरूरत पड़ी है।

🔹 युद्ध के समय (1962, 1965, 1971)

इन युद्धों के दौरान बड़े शहरों में:

ब्लैकआउट अभ्यास कराया गया

रात में लाइट बंद रखने के निर्देश दिए गए

हवाई हमले की चेतावनी वाले सायरन बजाए गए

🔹 26/11 मुंबई हमले के बाद

आतंकी हमले के बाद:

मॉल, रेलवे स्टेशन और होटल में सुरक्षा मॉक ड्रिल

पुलिस और एटीएस की ट्रेनिंग

आम नागरिकों को सुरक्षित निकासी के तरीके सिखाए गए

🔹 कोरोना काल (2020–21)

कोविड-19 के समय:

अस्पतालों में हेल्थ इमरजेंसी ड्रिल

ऑक्सीजन, आईसीयू और एंबुलेंस सिस्टम का अभ्यास

प्रशासनिक समन्वय की जांच

🔹 हाल के वर्षों में

अब मॉक ड्रिल नियमित रूप से होती है:

एयरपोर्ट

मेट्रो स्टेशन

स्कूल और कॉलेज

सरकारी कार्यालय

अब फिर से मॉक ड्रिल क्यों हो रही है?

हाल के समय में:

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ा है

सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं

सरकार चाहती है कि हर नागरिक और हर सिस्टम तैयार रहे

इसी वजह से कई राज्यों, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में व्यापक मॉक ड्रिल कराई जाती है।

इसमें:

तय समय पर बिजली बंद की जाती है

हवाई हमले का सायरन बजाया जाता है

घायलों को अस्पताल पहुंचाने का अभ्यास होता है

यह सब केवल अभ्यास होता है, न कि कोई वास्तविक खतरा।

मॉक ड्रिल के दौरान आम लोगों को क्या करना चाहिए?

मॉक ड्रिल तभी सफल होती है जब जनता सहयोग करे।

✔ घबराएं नहीं

✔ अफवाहों पर ध्यान न दें

✔ प्रशासन और पुलिस के निर्देश मानें

✔ अगर कहा जाए तो लाइट और मोबाइल टॉर्च बंद रखें

✔ सुरक्षित स्थान पर शांत रहें

याद रखें—डर से नहीं, समझदारी से जान बचती है।

मॉक ड्रिल का मतलब है—आपदा से पहले अभ्यास, ताकि आपदा में अफरा-तफरी न हो।

Mock Drill is an emergency preparedness exercise conducted in India to train citizens and authorities for situations like war, air attacks, blackouts, terrorist threats, and natural disasters. Civil defence mock drills help test the readiness of police, hospitals, fire brigades, and emergency services while educating the public on how to respond calmly during real emergencies.

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