AIN NEWS 1 | महाराष्ट्र की राजनीति इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख नेता और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन ने न सिर्फ उनके समर्थकों को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि पूरी राजनीतिक व्यवस्था को भी हिला कर रख दिया है।
अजित पवार सिर्फ एक नेता नहीं थे — वे सत्ता, संगठन और रणनीति का ऐसा केंद्र थे, जिनके इर्द-गिर्द महाराष्ट्र की राजनीति घूमती थी। उनके अचानक चले जाने से एक साथ कई मोर्चों पर खालीपन पैदा हो गया है।
एक तरफ NCP अपना सबसे मजबूत स्तंभ खो चुकी है, तो दूसरी ओर महाराष्ट्र सरकार में डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री का पद भी रिक्त हो गया है। इसके साथ ही बारामती जैसे प्रभावशाली राजनीतिक गढ़ में भी नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।
अब पूरे राज्य की निगाहें चार बड़े सवालों पर टिकी हैं —
ये वही सवाल हैं, जो आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करेंगे।
सवाल नंबर 1: महाराष्ट्र का अगला डिप्टी सीएम कौन बनेगा?
अजित पवार के निधन के बाद सबसे पहला और सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब महाराष्ट्र का नया उपमुख्यमंत्री कौन होगा?
इस पद को लेकर एनसीपी खेमे में गहन मंथन चल रहा है।
सबसे आगे जो नाम सामने आ रहा है, वह है —
सुनेत्रा पवार
अजित पवार की पत्नी और वर्तमान राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार को लेकर पार्टी के भीतर मजबूत समर्थन दिखाई दे रहा है। एनसीपी के कई नेता और कार्यकर्ता चाहते हैं कि अजित पवार की राजनीतिक विरासत को वही आगे बढ़ाएं।
उनके नाम के पीछे भावनात्मक कारण भी है — पार्टी मानती है कि इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बना रहेगा।
हालांकि रेस में अन्य दावेदार भी हैं:
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प्रफुल्ल पटेल – पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष
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छगन भुजबल – ओबीसी समुदाय का बड़ा चेहरा
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सुनील तटकरे – प्रदेश संगठन में मजबूत पकड़
इन सभी नामों पर गंभीर चर्चा चल रही है।
सवाल नंबर 2: अब महाराष्ट्र का बजट कौन पेश करेगा?
अजित पवार न सिर्फ डिप्टी सीएम थे, बल्कि राज्य के वित्त मंत्री भी थे। ऐसे में उनके निधन के बाद एक बड़ा संवैधानिक प्रश्न खड़ा हो गया है।
महाराष्ट्र का बजट 2026 बेहद नजदीक है।
अब सवाल यह है कि —
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बजट तैयार कौन करेगा?
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विधानसभा में इसे पेश कौन करेगा?
संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार, जब किसी मंत्री का निधन होता है, तो उसके अधीन सभी विभाग अस्थायी रूप से मुख्यमंत्री के पास चले जाते हैं।
इस आधार पर माना जा रहा है कि:
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ही फिलहाल वित्त विभाग संभालेंगे
और वही विधानसभा में बजट पेश कर सकते हैं।
हालांकि बाद में विभागों का स्थायी बंटवारा किया जाएगा।
सवाल नंबर 3: बारामती का अगला विधायक कौन होगा?
बारामती सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं है —
यह पवार परिवार की राजनीतिक पहचान रही है।
दशकों तक शरद पवार और फिर अजित पवार ने इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। यहां की जनता उन्हें सिर्फ नेता नहीं, बल्कि अपने परिवार का सदस्य मानती थी।
अजित पवार के निधन के बाद बारामती में गहरा शोक है।
अब बड़ा सवाल यह है कि—
अजित पवार की राजनीतिक विरासत बारामती में कौन संभालेगा?
संभावित नामों में शामिल हैं:
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सुनेत्रा पवार
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पार्थ पवार (बड़े बेटे)
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जय पवार (छोटे बेटे)
इसके अलावा एक और नाम चर्चा में है —
रोहित पवार
जो शरद पवार गुट से आते हैं और क्षेत्र में अच्छी पकड़ रखते हैं।
वहीं युगेंद्र पवार का नाम भी सामने आता है, हालांकि वे पहले बारामती से चुनाव लड़ चुके हैं और भारी अंतर से हार का सामना कर चुके हैं। फिर भी शरद गुट के कार्यकर्ता उन्हें “नवा दादा” कहकर समर्थन देते हैं।
बारामती सीट पर फैसला पवार परिवार के भीतर ही होने की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही है।
सवाल नंबर 4: NCP का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन बनेगा?
अजित पवार के नेतृत्व में एनसीपी ने नया रूप लिया था। शरद पवार से अलग होने के बाद कई राजनीतिक जानकारों को शक था कि पार्टी टिक पाएगी या नहीं।
लेकिन अजित पवार ने अपने राजनीतिक कौशल से:
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संगठन को मजबूत किया
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सरकार में अहम हिस्सेदारी हासिल की
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पार्टी को स्थायित्व दिया
अब उनके जाने से पार्टी नेतृत्व का संकट सबसे गंभीर बन गया है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए जिन नामों पर चर्चा है:
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प्रफुल्ल पटेल
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सुनेत्रा पवार
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पार्थ पवार
इनमें सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं प्रफुल्ल पटेल, क्योंकि वे:
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संगठन के हर पहलू से परिचित हैं
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राजनीति का लंबा अनुभव रखते हैं
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वर्तमान में कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं
एनसीपी के अधिकांश नेता चाहते हैं कि पार्टी संगठन की कमान प्रफुल्ल पटेल को सौंपी जाए।
सत्ता और संगठन की अलग-अलग जिम्मेदारी?
एनसीपी के भीतर यह राय तेजी से मजबूत हो रही है कि:
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डिप्टी सीएम पद सुनेत्रा पवार को मिले
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राष्ट्रीय अध्यक्ष पद प्रफुल्ल पटेल संभालें
इस प्रस्ताव को लेकर पार्टी नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी मुलाकात की है।
संकेत मिल रहे हैं कि फिलहाल:
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दोनों एनसीपी गुट अलग रह सकते हैं
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विलय पर फैसला बाद में लिया जाएगा
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस विषय पर अंतिम निर्णय शरद पवार की भूमिका से ही तय होगा।
महाराष्ट्र की राजनीति किस मोड़ पर खड़ी है?
अजित पवार का जाना केवल एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि यह सत्ता संतुलन में बड़ा बदलाव है।
अब यह देखना बेहद अहम होगा कि:
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नेतृत्व किसे सौंपा जाता है
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सरकार स्थिर रहती है या नहीं
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एनसीपी संगठन किस दिशा में जाता है
आने वाले कुछ हफ्ते महाराष्ट्र की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।


















