AIN NEWS 1: ज्योतिषपीठ बदरिकाश्रम के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर अपने तीखे और स्पष्ट बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने गौमाता को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को सीधे चुनौती देते हुए 40 दिन का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि यदि इस अवधि में गौमाता को “राष्ट्रमाता” घोषित नहीं किया गया और गौमांस के निर्यात पर पूरी तरह रोक नहीं लगी, तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
शंकराचार्य का यह बयान न सिर्फ धार्मिक बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बड़ी बहस को जन्म दे रहा है। प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि गौमाता केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, अर्थव्यवस्था और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा रही हैं।
‘गौमाता केवल पशु नहीं, संस्कृति का आधार’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि भारत में गाय को हजारों वर्षों से माता का दर्जा दिया गया है। वेदों, उपनिषदों और पुराणों में गौमाता का उल्लेख जीवनदायिनी के रूप में किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश की अधिकांश आबादी गाय को माता मानती है, तो फिर उसे राष्ट्रमाता घोषित करने में सरकार को क्या आपत्ति है?
उनका कहना था कि सरकारें केवल चुनाव के समय गौ-रक्षा की बात करती हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल देती हैं। शंकराचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय चाहिए।
गौमांस निर्यात पर कड़ा सवाल
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गौमांस के निर्यात को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक ओर देश में गौ-रक्षा की बातें होती हैं, वहीं दूसरी ओर भारत दुनिया के बड़े गौमांस निर्यातक देशों में शामिल है। उन्होंने इसे दोहरे चरित्र की राजनीति बताया।
उनका कहना था कि यदि सरकार सच में गौ-रक्षा चाहती है, तो सबसे पहले गौमांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि गौमाता की हत्या केवल धार्मिक अपराध नहीं, बल्कि नैतिक और सांस्कृतिक अपराध भी है।
यूपी सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम
शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश सरकार, विशेष रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 40 दिन का समय देते हुए कहा कि इस अवधि में सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। उन्होंने कहा कि योगी सरकार स्वयं को हिंदुत्व समर्थक बताती है, ऐसे में गौमाता के मुद्दे पर चुप्पी समझ से परे है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि 40 दिनों में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो साधु-संत, धर्माचार्य और आम जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।
‘हमें हिंदू होने का प्रमाण दें’ वाला बयान
शंकराचार्य के बयान का सबसे विवादित हिस्सा तब सामने आया जब उन्होंने कहा,
“आप हमें 40 दिन में हिंदू होने का प्रमाण दें।”
इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। हालांकि, बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आशय किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि व्यवस्था से है। उन्होंने कहा कि हिंदू होने का मतलब केवल मंदिर जाना नहीं, बल्कि हिंदू मूल्यों की रक्षा करना भी है।
माघ मेला और संत समाज की भूमिका
प्रयागराज माघ मेला क्षेत्र में मौजूद कई संतों ने शंकराचार्य के बयान का समर्थन किया। संत समाज का कहना है कि गौमाता के नाम पर राजनीति तो बहुत हुई, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस हैं।
कई संतों ने यह भी कहा कि यदि सरकारें धार्मिक भावनाओं का सम्मान नहीं करेंगी, तो समाज में असंतोष बढ़ेगा।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
शंकराचार्य के बयान पर अभी तक यूपी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कुछ नेताओं ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश करार दिया।
आंदोलन की चेतावनी
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ कहा कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि समाधान है। लेकिन यदि सरकारें आंख मूंदे रहीं, तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण होगा, लेकिन देशव्यापी होगा।
गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने और गौमांस निर्यात पर रोक की मांग कोई नई नहीं है, लेकिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का 40 दिन का अल्टीमेटम इस मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ले आया है। अब देखना होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।
यह मुद्दा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक भी है। आने वाले 40 दिन इस बहस की दिशा तय कर सकते हैं।
https://youtube.com/@ainnews1_?si=nyuzf42x_QF-LeCt
Shankaracharya Avimukteshwaranand has issued a 40-day ultimatum to the Uttar Pradesh government demanding that the cow be declared the National Mother of India and that beef exports be completely banned. Speaking at Prayagraj Magh Mela, the Shankaracharya emphasized the cultural, religious, and ethical importance of Gau Mata in Indian society. His statement has triggered political reactions and renewed debate on cow protection, beef export policies, and the role of the UP government under CM Yogi Adityanath.






