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कफ सिरप लेने के बाद बिगड़ी हालत: चार महीने तक जिंदगी से जूझता रहा 4 साल का मासूम, नागपुर में मौत!

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AIN NEWS 1: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से सामने आई यह घटना हर माता-पिता को झकझोर देने वाली है। एक मामूली सी बीमारी के इलाज के लिए दिया गया कफ सिरप चार साल के मासूम बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो गया। चार महीने तक अस्पतालों के चक्कर, लगातार इलाज और उम्मीदों के बीच आखिरकार बच्चे ने नागपुर में दम तोड़ दिया।

मृतक बच्चे की पहचान हर्ष यदुवंशी के रूप में हुई है। हर्ष बैतूल जिले का रहने वाला था और उम्र महज चार साल थी। परिजनों के मुताबिक, कुछ महीने पहले हर्ष को हल्की सर्दी-खांसी की शिकायत थी, जिसके बाद उसे कफ सिरप दिया गया। सिरप पीने के कुछ ही समय बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। पहले उल्टी, फिर बेहोशी और धीरे-धीरे उसकी हालत गंभीर होती चली गई।

कफ सिरप लेने के बाद अचानक बिगड़ी हालत

परिवार के लोगों का कहना है कि हर्ष पूरी तरह से स्वस्थ था। कफ सिरप लेने से पहले उसमें किसी तरह की गंभीर बीमारी के लक्षण नहीं थे। लेकिन सिरप सेवन के कुछ घंटों के भीतर उसकी हालत बिगड़ गई। सांस लेने में दिक्कत, शरीर में सुस्ती और प्रतिक्रिया न देना—ये सभी लक्षण देखकर परिजन घबरा गए।

पहले हर्ष को बैतूल के एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार किया गया। लेकिन हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बच्चे को नागपुर रेफर करने की सलाह दी।

नागपुर के एम्स अस्पताल में चार महीने तक चला इलाज

इसके बाद हर्ष को नागपुर स्थित एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम लगातार उसका इलाज करती रही। बच्चे को आईसीयू में रखा गया और जीवन रक्षक दवाएं दी गईं। परिजन दिन-रात अस्पताल में ही डटे रहे, हर दिन यही उम्मीद करते हुए कि उनका बच्चा ठीक होकर घर लौट आएगा।

चार महीने तक इलाज चला। कई बार हालत में हल्का सुधार दिखा, तो कई बार स्थिति फिर से बिगड़ जाती थी। इस दौरान हर्ष ज्यादातर समय बेहोशी की हालत में रहा। डॉक्टरों ने हरसंभव प्रयास किए, लेकिन बच्चे की स्थिति पूरी तरह से स्थिर नहीं हो सकी।

रविवार रात टूट गई परिवार की आखिरी उम्मीद

रविवार की रात करीब 9 बजे वह पल आया, जिसका डर परिजन पिछले चार महीनों से महसूस कर रहे थे। डॉक्टरों ने बताया कि तमाम कोशिशों के बावजूद बच्चे को बचाया नहीं जा सका। हर्ष ने नागपुर के एम्स अस्पताल में अंतिम सांस ली।

बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। चार साल के मासूम की जिंदगी इस तरह खत्म हो जाएगी, यह किसी ने सोचा भी नहीं था।

परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल

हर्ष के परिजनों ने कफ सिरप को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जिस सिरप के सेवन के बाद बच्चे की हालत बिगड़ी, उसकी जांच होनी चाहिए। परिजन यह जानना चाहते हैं कि क्या सिरप की गुणवत्ता में कोई कमी थी या फिर वह बच्चे के लिए सुरक्षित नहीं था।

परिवार ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते सच्चाई सामने नहीं आई, तो ऐसे ही और मासूम बच्चों की जान खतरे में पड़ सकती है।

कफ सिरप की सुरक्षा पर फिर उठी बहस

यह घटना कफ सिरप और बच्चों को दी जाने वाली दवाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता पैदा करती है। इससे पहले भी देश के अलग-अलग हिस्सों में कफ सिरप से जुड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को दी जाने वाली दवाओं में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है।

डॉक्टरों की सलाह है कि बिना चिकित्सकीय परामर्श के बच्चों को कोई भी दवा नहीं देनी चाहिए। खासतौर पर छोटे बच्चों के मामले में हल्की सी लापरवाही भी गंभीर परिणाम ला सकती है।

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर दबाव

घटना के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों की मांग है कि मामले की जांच कराई जाए और अगर किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई हो।

यह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है कि दवाओं की गुणवत्ता और निगरानी को और मजबूत किया जाए।

एक मासूम की मौत, कई सवाल छोड़ गई

चार साल का हर्ष अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी मौत कई सवाल छोड़ गई है। क्या कफ सिरप सुरक्षित था? क्या समय पर सही इलाज मिल पाया? क्या ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है?

इन सवालों के जवाब अभी आना बाकी हैं, लेकिन इतना तय है कि यह मामला केवल एक खबर नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है—खासकर बच्चों के इलाज में जरा-सी चूक भी भारी पड़ सकती है।

A tragic incident from Betul district in Madhya Pradesh has raised serious concerns over pediatric medicine safety in India. A 4-year-old child died after consuming cough syrup, following nearly four months of treatment at AIIMS Nagpur. The case highlights the potential side effects of cough syrup in children and has sparked demands for investigation into drug safety, quality control, and medical accountability.

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