AIN NEWS 1: बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अपने निलंबन को लेकर चल रहे विवाद के बीच उन्होंने आध्यात्मिक और कानूनी—दोनों मोर्चों पर सक्रियता बढ़ा दी है। हाल ही में उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया और इसके बाद प्रयागराज पहुंचकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से कानूनी सलाह-मशविरा किया।
इस पूरी कवायद को उनके अगले बड़े कदम की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। खुद अलंकार अग्निहोत्री ने भी संकेत दिए हैं कि वे अपने निलंबन नोटिस को कानूनी रूप से चुनौती देने जा रहे हैं।
🔶 आध्यात्मिक मुलाकात से मिला संबल
अलंकार अग्निहोत्री ने हाल ही में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से भेंट की। इस मुलाकात को उन्होंने केवल औपचारिक नहीं, बल्कि आत्मिक शक्ति और नैतिक समर्थन प्राप्त करने का माध्यम बताया। उनके करीबी सूत्रों के अनुसार, अग्निहोत्री मानते हैं कि जब कोई व्यक्ति अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है, तो उसे आध्यात्मिक संतुलन और मार्गदर्शन की भी जरूरत होती है।
शंकराचार्य से आशीर्वाद लेने के बाद अग्निहोत्री का आत्मविश्वास और स्पष्ट रूप से सामने आया। समर्थकों का कहना है कि यह मुलाकात उनके आंदोलन और कानूनी लड़ाई दोनों को नई दिशा दे सकती है।
🔶 प्रयागराज में हाईकोर्ट के वकीलों से अहम बैठक
आध्यात्मिक आशीर्वाद के तुरंत बाद अलंकार अग्निहोत्री प्रयागराज पहुंचे, जहां उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान निलंबन आदेश, उससे जुड़े कानूनी पहलुओं और संभावित याचिका पर गहन चर्चा हुई।
सूत्रों के मुताबिक, अग्निहोत्री ने अपने निलंबन को “प्रशासनिक अन्याय” करार देते हुए कहा कि उन्हें बिना समुचित प्रक्रिया के कार्रवाई का सामना करना पड़ा। वकीलों के साथ बातचीत में इस बात पर भी विचार हुआ कि किस कानूनी आधार पर निलंबन को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
🔶 SC-ST एक्ट पर खुलकर बोले अलंकार अग्निहोत्री
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस बयान को लेकर है, जिसमें उन्होंने SC-ST एक्ट को लेकर कड़ा रुख अपनाया। अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि जिस तरह से इस कानून का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह सामान्य वर्ग के लोगों के लिए “काले कानून” जैसा बनता जा रहा है।
उनका कहना है कि किसी भी कानून का उद्देश्य सामाजिक न्याय होना चाहिए, लेकिन यदि उसी कानून का दुरुपयोग होने लगे, तो उस पर खुली बहस जरूरी हो जाती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे किसी वर्ग के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि कानून के संतुलित और निष्पक्ष प्रयोग की मांग कर रहे हैं।
🔶 6 फरवरी की डेडलाइन और 7 फरवरी से दिल्ली कूच का ऐलान
अलंकार अग्निहोत्री पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि यदि 6 फरवरी तक उनकी मांगों को लेकर कोई विशेष सत्र या ठोस पहल नहीं होती, तो वे 7 फरवरी से दिल्ली कूच करेंगे। उनका कहना है कि यह आंदोलन सिर्फ उनके निजी मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि उन तमाम अधिकारियों और आम नागरिकों की आवाज है, जो खुद को सिस्टम के सामने असहाय महसूस करते हैं।
दिल्ली कूच को लेकर उनके समर्थकों में भी उत्साह देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर #AlankarAgnihotri ट्रेंड कर रहा है और कई लोग उनके फैसले का समर्थन कर रहे हैं।
🔶 प्रशासनिक कार्रवाई या वैचारिक टकराव?
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक निलंबन मामला नहीं माना जा रहा। जानकारों का कहना है कि यह मामला धीरे-धीरे वैचारिक बहस और सामाजिक विमर्श का रूप लेता जा रहा है।
एक ओर सरकार और प्रशासन अपनी कार्रवाई को नियमों के तहत बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अलंकार अग्निहोत्री इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विचारधारा से जोड़कर देख रहे हैं।
🔶 आगे क्या?
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अलंकार अग्निहोत्री कब और किस आधार पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं। यदि वे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हैं, तो यह मामला कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी और अधिक चर्चित हो सकता है।
फिलहाल, शंकराचार्य से आशीर्वाद और हाईकोर्ट के वकीलों से मुलाकात यह साफ संकेत देती है कि अलंकार अग्निहोत्री पीछे हटने के मूड में नहीं हैं और अपनी लड़ाई को हर मंच पर ले जाने के लिए तैयार हैं।
Former Bareilly City Magistrate Alankar Agnihotri has intensified his legal and public battle after his suspension by consulting senior Allahabad High Court lawyers in Prayagraj. After seeking blessings from Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand, Agnihotri indicated that he may legally challenge the suspension notice. He also raised concerns over the alleged misuse of the SC-ST Act and announced a Delhi march starting February 7 if no action is taken by February 6, making this issue a significant administrative and political development.


















