AIN NEWS 1: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई, जिनमें कुछ की मौत हो गई। इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय लोगों को सदमे में डाल दिया है, बल्कि अब यह मामला गंभीर राजनीतिक विवाद का रूप भी ले चुका है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले कई दिनों से नलों में बदबूदार और गंदा पानी आ रहा था। शिकायतों के बावजूद जल आपूर्ति व्यवस्था को ठीक नहीं किया गया, जिसका नतीजा यह भयावह त्रासदी बनी।
कांग्रेस का आरोप: हादसा नहीं, भ्रष्टाचार का परिणाम
इस घटना पर कांग्रेस ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह कोई प्राकृतिक हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही, भ्रष्टाचार और सिस्टम की विफलता का सीधा नतीजा है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद न तो पानी की गुणवत्ता की जांच कराई गई और न ही सप्लाई को रोका गया। पार्टी का दावा है कि अगर समय रहते प्रशासन हरकत में आता, तो मासूम जानें बचाई जा सकती थीं।
पीड़ित परिवारों के लिए ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग
कांग्रेस ने इस मामले में मृतकों के परिजनों को ₹1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह केवल आर्थिक मदद का सवाल नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही तय करने का मामला है।
उनका कहना है कि जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उनके लिए यह नुकसान कभी पूरा नहीं हो सकता, लेकिन सरकार की जिम्मेदारी है कि वह कम से कम आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करे।
‘इंदौर बंद’ की चेतावनी
कांग्रेस ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई और मुआवजे की घोषणा नहीं की गई, तो पार्टी ‘इंदौर बंद’ का आह्वान करेगी।
नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई राजनीति की नहीं, बल्कि जनता के जीवन और स्वास्थ्य की है। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्तर तक ले जाया जाएगा।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
भागीरथपुरा समेत आसपास के इलाकों में लोगों का गुस्सा साफ देखा जा सकता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे लंबे समय से गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
कई लोगों ने बताया कि पानी पीने के बाद बच्चों और बुजुर्गों को उल्टी-दस्त और तेज बुखार की शिकायत हुई। अस्पतालों में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ गई, जिससे स्थिति और भयावह हो गई।
प्रशासन पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने नगर निगम और जल आपूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि—
पानी की नियमित जांच क्यों नहीं की गई?
शिकायतों के बाद भी सप्लाई क्यों जारी रही?
क्या पाइपलाइन में गंदे नालों का पानी मिल रहा था?
इन सवालों के जवाब अब तक स्पष्ट नहीं हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस मामले में जांच के आदेश दिए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन कांग्रेस का कहना है कि सिर्फ जांच से काम नहीं चलेगा। जब तक जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक ऐसे हादसे दोहराए जाते रहेंगे।
विशेषज्ञों की राय
जल विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी इलाकों में पुरानी पाइपलाइनों, अवैध कनेक्शनों और खराब सीवेज सिस्टम के कारण अक्सर दूषित पानी की समस्या पैदा होती है। यदि समय-समय पर ऑडिट और मेंटेनेंस न हो, तो इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ता है।
एक चेतावनी भरी घटना
इंदौर का यह मामला केवल एक शहर तक सीमित नहीं है। यह पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी है कि अगर बुनियादी सुविधाओं में लापरवाही बरती गई, तो उसकी कीमत आम जनता को अपनी जान देकर चुकानी पड़ सकती है।
अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन इस त्रासदी से क्या सबक लेते हैं—या फिर यह मामला भी कुछ दिनों बाद फाइलों में दबकर रह जाएगा।
The Indore water contamination deaths have triggered widespread outrage as residents blame contaminated drinking water for multiple fatalities. The Congress party has accused the Madhya Pradesh government of corruption and systemic failure, demanding ₹1 crore compensation for each victim’s family and warning of an Indore bandh. The incident has intensified concerns over water quality, municipal negligence, and public health safety in Indore, making it a major political and civic issue.


















