AIN NEWS 1: हम जिस हवा में सांस लेते हैं, वही अगर ज़हर बन जाए तो ज़िंदगी पर उसका असर कितना गहरा हो सकता है, यह आज देश के कई शहरों में साफ़ देखा जा सकता है। 4 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजे तक जारी वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़े बताते हैं कि भारत के कई बड़े शहरों में हवा अब भी स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) क्या होता है?
AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स, हवा में मौजूद प्रदूषकों के स्तर को मापने का एक पैमाना है। इसके जरिए यह समझा जाता है कि हवा सांस लेने के लिए कितनी सुरक्षित या खतरनाक है। AQI जितना ज़्यादा होता है, हवा उतनी ही ज़्यादा प्रदूषित मानी जाती है।
AQI को आमतौर पर छह श्रेणियों में बांटा गया है:
अच्छी (0–50) – स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह सुरक्षित
संतोषजनक (51–100) – हल्का असर
माध्यम (101–200) – संवेदनशील लोगों को परेशानी
खराब (201–300) – सांस की दिक्कत, आंखों में जलन
बहुत खराब (301–400) – गंभीर स्वास्थ्य प्रभाव
गंभीर (401 से ऊपर) – सभी के लिए खतरनाक
देश के प्रमुख शहरों की वायु गुणवत्ता स्थिति
4 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजे तक जारी आंकड़ों के मुताबिक कई बड़े शहरों में AQI चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुका है।
दिल्ली (शादिपुर) में AQI 241 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। राजधानी में लगातार बढ़ता प्रदूषण न सिर्फ बुजुर्गों और बच्चों बल्कि आम लोगों के लिए भी खतरा बनता जा रहा है।
नोएडा (सेक्टर-1) में स्थिति और भी खराब है, जहां AQI 322 रिकॉर्ड किया गया। यह ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है और लंबे समय तक इस हवा में सांस लेना गंभीर बीमारियों को न्योता दे सकता है।
गुरुग्राम (विकास सदन) में AQI 307 रहा, जो साफ़ तौर पर बताता है कि एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण अब नियंत्रण से बाहर होता जा रहा है।
चंडीगढ़ (सेक्टर-25) में AQI 156 दर्ज किया गया, जिसे ‘माध्यम’ श्रेणी में रखा गया है। हालांकि स्थिति दिल्ली-एनसीआर जितनी खराब नहीं है, लेकिन यहां भी सतर्कता जरूरी है।
लखनऊ (लालबाग, पश्चिम) में AQI 140 रहा, जो मध्यम स्तर का प्रदूषण दर्शाता है। यह स्तर खासतौर पर अस्थमा और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।
महानगरों की स्थिति
देश के अन्य बड़े शहरों की बात करें तो तस्वीर वहां भी ज्यादा राहत देने वाली नहीं है।
मुंबई (चाकला, अंधेरी ईस्ट) – AQI 173
कोलकाता (रवींद्र भारती विश्वविद्यालय) – AQI 178
चेन्नई (मणाली) – AQI 182
बेंगलुरु (BTM) – AQI 136
हैदराबाद (बोलारम औद्योगिक क्षेत्र) – AQI 165
पटना (IGSC प्लैनेटेरियम परिसर) – AQI 148
ये सभी शहर ‘माध्यम’ श्रेणी में आते हैं, लेकिन लगातार ऐसे स्तर पर बनी रहने वाली हवा लंबे समय में स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकती है।
राहत की सांस लेने वाला शहर
इन सबके बीच शिलांग (लंपिंगनगाड) एक ऐसा शहर है, जहां AQI सिर्फ 25 दर्ज किया गया। यह ‘अच्छी’ श्रेणी में आता है और यह दिखाता है कि प्राकृतिक वातावरण और कम औद्योगिक गतिविधियों वाले इलाकों में अब भी शुद्ध हवा संभव है।
AQI आंकड़ों का सारांश
देशभर में AQI श्रेणियों का आंकड़ा इस प्रकार है:
अच्छी – 2 शहर
संतोषजनक – 16 शहर
माध्यम – 60 शहर
खराब – 3 शहर
बहुत खराब – 3 शहर
गंभीर – 0 शहर
यह साफ़ संकेत देता है कि देश के अधिकतर शहर अभी भी सुरक्षित हवा से दूर हैं।
वायु प्रदूषण से सेहत पर असर
खराब हवा का सीधा असर फेफड़ों, दिल और आंखों पर पड़ता है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी, हार्ट डिज़ीज़ और यहां तक कि समय से पहले मौत का खतरा भी बढ़ जाता है।
आम लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
AQI ज्यादा होने पर बाहर निकलने से बचें
मास्क का उपयोग करें
घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें
बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें
खुले में व्यायाम से बचें
देश के कई बड़े शहरों में वायु प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण की समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है। जरूरत है कि सरकार, प्रशासन और आम लोग मिलकर इसके समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएं। वरना जिस हवा में हम सांस लेते हैं, वही धीरे-धीरे हमारी सेहत की सबसे बड़ी दुश्मन बन जाएगी।
India’s Air Quality Index continues to raise serious concerns as major cities like Delhi, Noida, Gurugram, Mumbai, Kolkata, Chennai, and Bengaluru report moderate to very poor pollution levels. Rising AQI levels highlight the growing impact of air pollution on public health, making it crucial for authorities and citizens to take preventive measures to improve air quality across urban India.


















