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फिल्म निर्माता अमित जानी की ‘कल्कि संभल’ पर बर्क परिवार का विरोध, सपा सांसद के पिता बोले—हिंदू-मुस्लिम माहौल बिगाड़ने की कोशिश!

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AIN NEWS 1: संभल दंगों पर आधारित फिल्म ‘कल्कि संभल’ के पोस्टर के जारी होने के बाद विवाद शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) सांसद जियाउर्रहमान बर्क के परिवार ने इस फिल्म पर आपत्ति जताई है और कहा है कि इससे समुदायों के बीच तनाव बढ़ सकता है।

सपा सांसद के पिता ममलूकुर्रहमान बर्क ने दीपा सराय स्थित अपने आवास बर्क मंजिल में कहा कि जब मामला अदालत में विचाराधीन है, तो इस पर फिल्म बनाने का कोई औचित्य नहीं है। उनका कहना था कि अदालत ही इस मामले का फैसला करेगी, फिल्म बनाने से किसी भी तरह का निर्णय नहीं होगा।

उन्होंने फिल्म निर्माताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी। ममलूकुर्रहमान ने कहा, “ये लोग केवल हालात बिगाड़ना चाहते हैं और हिंदू-मुस्लिम को आपस में लड़ाने का प्रयास कर रहे हैं। हम इसके खिलाफ कोर्ट जाएंगे।”

फिल्म और पोस्टर का विवरण

फिल्म निर्माता अमित जानी ने 1 जनवरी को संभल में फिल्म का नाम ‘कल्कि संभल’ बताया था। इसके बाद 2 फरवरी को उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर फिल्म का पहला पोस्टर जारी किया। पोस्टर में दो मुख्य किरदार – अब्बाजान और भाईजान – को उजागर किया गया है। अब्बाजान की भूमिका में महेश मांजेरकर और भाईजान की भूमिका में बॉलीवुड अभिनेता विजय राज नजर आएंगे।

ममलूकुर्रहमान बर्क ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि फिल्म में दिखाए गए दृश्य और कथानक समाज में सौहार्द और शांति को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उनका मानना है कि जब घटना पहले ही हो चुकी है और न्यायिक प्रक्रिया चल रही है, तो फिल्म बनाना अनावश्यक और हानिकारक है।

1978 के दंगों का इतिहास

ममलूकुर्रहमान ने 1978 के संभल दंगों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क संभल में मौजूद नहीं थे। दंगों की शुरुआत मुसलमानों द्वारा नहीं हुई थी। उन्होंने बताया कि उस समय एक गैर-मुस्लिम व्यक्ति जामा मस्जिद में जल अर्पित करने की कोशिश कर रहा था। जब इमाम साहब ने उसे रोकने का प्रयास किया, तो उसने धारदार हथियार से हमला कर दिया, जिससे इमाम शहीद हो गए। इमाम की कब्र आज भी जामा मस्जिद में मौजूद है।

ममलूकुर्रहमान ने यह भी कहा कि फिल्म में 1978 के दंगों में हिन्दुओं या मुसलमानों को प्रताड़ित दिखाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इस पर कोई प्रमाण या गवाह नहीं है। उनका कहना था, “अब सोशल मीडिया पर भी लोग किसी की छवि बदलकर उसे किसी और रूप में पेश कर देते हैं। इसी तरह फिल्म में भी केवल कहानी दिखाकर हकीकत नहीं बदल दी जा सकती।”

2024 के दंगों पर प्रतिक्रिया

24 नवंबर 2024 को संभल में हुई हिंसा को लेकर भी बर्क परिवार ने अपना पक्ष रखा। ममलूकुर्रहमान ने स्पष्ट किया कि सांसद जियाउर्रहमान बर्क उस दिन संभल में मौजूद नहीं थे। वे केरल में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में शामिल होने गए थे। इस बात की पुष्टि सपा के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी की है।

ममलूकुर्रहमान ने कहा कि ऐसे मामले पर फिल्म बनाकर लोगों की भावनाओं को भड़का देना सही नहीं है। उनका मानना है कि जो लोग इस तरह की अनुमति दे रहे हैं, वे शांति के दुश्मन हैं और समाज में अमन पसंद नहीं रखते।

फिल्म का प्रभाव और कानूनी चेतावनी

बर्क परिवार ने फिल्म निर्माताओं को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने फिल्म जारी की तो वे कानूनी कदम उठाएंगे। ममलूकुर्रहमान ने कहा कि इस तरह की फिल्में समाज में तनाव बढ़ाने का माध्यम बन सकती हैं। उनका मानना है कि अदालत ही न्यायिक प्रक्रिया का सही माध्यम है और फिल्म किसी भी तरह का निर्णय नहीं दे सकती।

उन्होंने कहा, “कहानी में जो दिखाया जा रहा है वह केवल कल्पना है। अगर किसी ने इसे वास्तविकता समझ लिया और इससे समाज में तनाव फैल गया, तो इसके लिए जिम्मेदार निर्माता होंगे।”

‘कल्कि संभल’ फिल्म के पोस्टर और घोषणा ने संभल के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में हलचल पैदा कर दी है। बर्क परिवार की प्रतिक्रिया से यह साफ है कि विवाद केवल फिल्म के कथानक या पोस्टर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कानूनी और सामाजिक बहस का रूप ले सकता है।

संपादकीय दृष्टि से कहा जाए, तो जब समाज में संवेदनशील मुद्दे हों, अदालत में मामले चल रहे हों, तब फिल्में बनाने और पोस्टर जारी करने में बेहद सतर्कता की आवश्यकता है। यह केवल फिल्म का मनोरंजन नहीं बल्कि समाज की भावनाओं और सामुदायिक शांति का भी मुद्दा बन सकता है।

The Kalki Sambhal movie controversy has drawn strong objections from the Bark family, who claim that the film on the 1978 and 2024 Sambhal riots may incite Hindu-Muslim tensions. The family argues that the matter is already in court and no movie can influence the legal outcome. Filmmaker Amit Jani released the first poster featuring actors Mahesh Manjrekar and Vijay Raj, which has sparked debate on communal harmony and freedom of expression in Indian cinema.

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