AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक विवादित वीडियो को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ‘भाभीजान’ नाम से पहचानी जाने वाली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर समरीन निशा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि उन्होंने एक वीडियो में हिंदू समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक और भड़काऊ भाषा का प्रयोग किया, जिसके बाद यह मामला तेजी से तूल पकड़ गया।
क्या है पूरा मामला?
कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में एक महिला कथित तौर पर हिंदू धर्म और विशेष रूप से हिंदू लड़कियों के बारे में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करती हुई दिखाई दी। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया।
वीडियो वायरल होते ही स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया। कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की। मामला इतना बढ़ा कि अमरोहा पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी।
पुलिस ने कैसे की कार्रवाई?
अमरोहा पुलिस ने वायरल वीडियो की सत्यता की जांच की। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि वीडियो में दिखाई देने वाली महिला समरीन निशा है, जो सोशल मीडिया पर ‘भाभीजान’ नाम से सक्रिय हैं।
पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। बताया जा रहा है कि उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की उन धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है जो धार्मिक भावनाएं भड़काने और समाज में वैमनस्य फैलाने से संबंधित हैं। साथ ही आईटी एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई है।
जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने समरीन निशा को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
सोशल मीडिया की भूमिका
यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया की जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करता है। आज के समय में कोई भी वीडियो कुछ ही मिनटों में हजारों-लाखों लोगों तक पहुंच जाता है। ऐसे में सार्वजनिक मंच पर दिए गए बयान का असर बहुत व्यापक हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति किसी धर्म, समुदाय या समूह के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करे। कानून ऐसे मामलों में स्पष्ट है और धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने वाली सामग्री को गंभीरता से लिया जाता है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
अमरोहा और आसपास के क्षेत्रों में इस मामले को लेकर काफी चर्चा रही। कई लोगों ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की, जबकि कुछ ने सोशल मीडिया पर संयम बरतने की अपील की।
स्थानीय प्रशासन ने भी लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून अपना काम करेगा और किसी को भी समाज में नफरत फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
कानूनी पहलू क्या कहते हैं?
भारतीय कानून में धार्मिक भावनाओं को आहत करने, समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने या भड़काऊ बयान देने पर सख्त प्रावधान हैं। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ऐसा कंटेंट प्रसारित करता है जिससे शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है।
आईटी एक्ट के तहत ऑनलाइन माध्यम से प्रसारित आपत्तिजनक सामग्री पर भी कार्रवाई संभव है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर की गई गतिविधियां भी कानून के दायरे में आती हैं।
बढ़ती डिजिटल जिम्मेदारी की जरूरत
यह घटना सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। यह एक बड़ा संदेश भी देती है कि सोशल मीडिया का उपयोग जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
आजकल कई लोग लाइक्स और फॉलोअर्स के लिए विवादित बयान देने से भी नहीं हिचकते। लेकिन यह समझना जरूरी है कि ऐसा कदम कानूनी मुसीबत का कारण बन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, समाज में सद्भाव बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। डिजिटल माध्यम पर कही गई बात भी उतनी ही प्रभावशाली होती है जितनी सार्वजनिक मंच पर कही गई।
पुलिस का बयान
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वीडियो की जांच के बाद ही कार्रवाई की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाली गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भड़काऊ सामग्री साझा न करें और यदि ऐसी कोई सामग्री दिखे तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें।
आगे क्या?
मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है। अदालत में सुनवाई के दौरान यह तय होगा कि आरोप कितने गंभीर हैं और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, यह मामला सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की सीमा और जिम्मेदारी को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
Samreen Nisha, popularly known as ‘Bhabhijan’ on social media, has been arrested by Amroha Police in Uttar Pradesh after a viral video allegedly containing anti-Hindu remarks sparked controversy. The case has been registered under relevant IPC sections and the IT Act for objectionable and inflammatory content. The incident highlights concerns over social media responsibility, religious sensitivity, and legal consequences of posting offensive videos online in India.


















