AIN NEWS 1: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने हाल ही में वीर विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न देने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि यदि सावरकर को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया जाता है, तो इससे न केवल उनके योगदान का सम्मान होगा, बल्कि भारत रत्न की प्रतिष्ठा भी और मजबूत होगी।
इसके साथ ही उन्होंने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उनका कहना था कि UCC जैसे संवेदनशील विषय पर सभी वर्गों और समुदायों को विश्वास में लेना बेहद जरूरी है। यह प्रक्रिया समाज में मतभेद बढ़ाने के बजाय समरसता को मजबूत करने वाली होनी चाहिए।
सावरकर और भारत रत्न पर भागवत का दृष्टिकोण
डॉ. मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि वीर सावरकर का जीवन देशभक्ति, त्याग और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपने विचारों से राष्ट्रीय चेतना को प्रभावित किया।
भागवत के अनुसार, सावरकर को भारत रत्न देने से इस सम्मान की गरिमा और बढ़ेगी। उनका मानना है कि भारत रत्न केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उन व्यक्तित्वों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक है जिन्होंने देश के निर्माण में असाधारण योगदान दिया है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सावरकर को लेकर राजनीतिक मतभेद भले ही हों, लेकिन उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता। ऐसे में देश को उनके कार्यों का मूल्यांकन निष्पक्ष दृष्टिकोण से करना चाहिए।
सावरकर: योगदान और विवाद
वीर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख चेहरों में से रहे हैं। उन्हें ‘हिंदुत्व’ विचारधारा के प्रमुख प्रवर्तक के रूप में भी जाना जाता है। अंडमान की सेल्युलर जेल में उन्होंने लंबी सजा काटी, जिसे देश के स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास में महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।
हालांकि, सावरकर का नाम कई बार राजनीतिक बहसों के केंद्र में भी रहा है। कुछ लोग उन्हें महान क्रांतिकारी मानते हैं, तो कुछ उनके विचारों और कार्यों पर सवाल उठाते हैं।
ऐसे माहौल में भारत रत्न देने की मांग अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विषय बन जाता है। भागवत का बयान इसी बहस को नई दिशा देता हुआ दिखाई देता है।
भारत रत्न की प्रतिष्ठा और राष्ट्रीय विमर्श
भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। इसे उन व्यक्तित्वों को दिया जाता है जिन्होंने कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा या मानवता के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया हो।
डॉ. भागवत का कहना है कि सावरकर को यह सम्मान मिलने से पुरस्कार की गरिमा बढ़ेगी। उनके अनुसार, ऐसे व्यक्तित्व जिनका जीवन राष्ट्र को समर्पित रहा, उन्हें सर्वोच्च स्तर पर सम्मानित करना देश की जिम्मेदारी है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को लेकर नए सिरे से चर्चा हो रही है। कई संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से भी समय-समय पर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग उठती रही है।
UCC पर संतुलित दृष्टिकोण की अपील
अपने संबोधन में डॉ. भागवत ने समान नागरिक संहिता (UCC) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि UCC जैसे विषय पर जल्दबाजी या टकराव की राजनीति से बचना चाहिए।
उनका स्पष्ट संदेश था कि यह प्रक्रिया सभी समुदायों को विश्वास में लेकर आगे बढ़ाई जानी चाहिए। यदि किसी नीति से समाज में मतभेद बढ़ते हैं, तो उसका उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाता है।
भागवत ने जोर दिया कि UCC का उद्देश्य सामाजिक एकरूपता और न्याय स्थापित करना है, न कि किसी वर्ग को असहज करना। इसलिए संवाद, सहमति और संवेदनशीलता इस प्रक्रिया के मूल तत्व होने चाहिए।
सामाजिक समरसता पर विशेष जोर
RSS प्रमुख ने कहा कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में कोई भी बड़ा निर्णय व्यापक चर्चा और सहमति के आधार पर ही सफल हो सकता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि UCC का मुद्दा समाज को बांटने का कारण नहीं बनना चाहिए। बल्कि इसे एक ऐसे कदम के रूप में देखा जाना चाहिए जो समानता और न्याय की भावना को मजबूत करे।
उनकी इस टिप्पणी को कई विश्लेषक संतुलित संदेश के रूप में देख रहे हैं, जहां एक ओर सावरकर को सम्मान देने की मांग है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील भी।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया की संभावना
भागवत के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया आना स्वाभाविक माना जा रहा है। सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पहले भी विवाद का विषय रही है।
एक वर्ग इसे ऐतिहासिक न्याय मानता है, जबकि दूसरा वर्ग इसे राजनीतिक एजेंडा करार देता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और अन्य दल इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं।
UCC को लेकर भी देश में बहस जारी है। कई राज्यों में इसे लागू करने की प्रक्रिया पर चर्चा हो रही है। ऐसे समय में RSS प्रमुख का बयान व्यापक संवाद की आवश्यकता पर जोर देता है।
डॉ. मोहन भागवत के हालिया बयान ने दो बड़े राष्ट्रीय मुद्दों—वीर सावरकर को भारत रत्न और समान नागरिक संहिता—को एक साथ चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
एक ओर उन्होंने सावरकर को सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की वकालत करते हुए इसे भारत रत्न की प्रतिष्ठा से जोड़ा, वहीं दूसरी ओर UCC को लेकर संयम और संवाद की जरूरत पर बल दिया।
उनका संदेश साफ है—सम्मान और नीति दोनों का उद्देश्य राष्ट्र को मजबूत करना होना चाहिए। मतभेदों को बढ़ाने के बजाय समाज में विश्वास और समरसता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
RSS Chief Mohan Bhagwat has supported conferring the Bharat Ratna on Veer Savarkar, stating that honoring Savarkar would enhance the prestige of India’s highest civilian award. He also emphasized that the implementation of the Uniform Civil Code (UCC) must be carried out with consensus, dialogue, and social harmony. The statement has reignited debate around Veer Savarkar’s legacy, the Bharat Ratna award, and the broader political discussion on UCC in India.


















