AIN NEWS 1: राजस्थान के बाड़मेर जिले के बायतु क्षेत्र में किसानों का आंदोलन अब तेज़ रूप ले चुका है। एक समान मुआवजे की मांग को लेकर बड़ी संख्या में किसान सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शन के दौरान हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए जब जिला कलेक्टर कार्यालय की ओर कूच कर रहे किसानों को पुलिस ने टोल प्लाजा के पास रोक दिया। इसके बाद महिलाओं और पुलिस के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। फिलहाल किसान नेशनल हाईवे पर धरने पर बैठे हुए हैं और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
क्या है पूरा मामला?
बायतु क्षेत्र के किसान पिछले कुछ समय से मुआवजे को लेकर नाराज़ चल रहे हैं। उनका कहना है कि अलग-अलग किसानों को अलग-अलग दरों से मुआवजा दिया जा रहा है, जिससे असमानता की स्थिति पैदा हो गई है। किसानों की मांग है कि सभी को एक समान दर से मुआवजा दिया जाए, ताकि किसी के साथ अन्याय न हो।
किसानों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। कई बार ज्ञापन देने और अधिकारियों से बातचीत के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। इसी के चलते किसानों ने आंदोलन का रास्ता चुना।
कलेक्टर कार्यालय की ओर बढ़े किसान
मंगलवार को बड़ी संख्या में किसान जिला कलेक्टर कार्यालय की ओर कूच करने निकले। किसानों का उद्देश्य प्रशासन तक अपनी आवाज सीधे पहुंचाना था। लेकिन रास्ते में टोल प्लाजा के पास पुलिस बल पहले से तैनात था।
पुलिस ने किसानों को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसी दौरान माहौल गरमा गया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। महिलाओं ने पुलिस की घेराबंदी तोड़ने की कोशिश की। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
महिलाओं और पुलिस के बीच झड़प
आंदोलन में शामिल महिलाओं का कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने जा रही थीं। उनका आरोप है कि पुलिस ने उन्हें अनावश्यक रूप से रोका। महिलाओं ने पुलिस की रोक के बावजूद आगे बढ़ने की कोशिश की, जिससे हल्की झड़प की स्थिति बन गई।
इस दौरान कुछ समय के लिए वहां अफरा-तफरी का माहौल रहा। हालांकि बाद में स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया, लेकिन किसानों का गुस्सा शांत नहीं हुआ।
हाईवे पर धरना
पुलिस से रोक के बाद किसानों ने अपना रुख नेशनल हाईवे की ओर कर लिया। बड़ी संख्या में किसान हाईवे पर बैठ गए और धरना शुरू कर दिया। इससे यातायात प्रभावित हुआ और कुछ समय के लिए वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
किसानों का साफ कहना है कि जब तक उन्हें एक समान मुआवजे का लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे आंदोलन जारी रखेंगे। उनका कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि सम्मान और न्याय की है।
किसानों की प्रमुख मांग
किसानों की मुख्य मांग है कि जिन परियोजनाओं या अधिग्रहण के तहत जमीन ली गई है, उसके बदले सभी प्रभावित किसानों को समान दर से मुआवजा दिया जाए। उनका तर्क है कि एक ही इलाके में अलग-अलग दरें तय करना उचित नहीं है।
कुछ किसानों ने बताया कि पड़ोसी खेतों के मालिकों को अलग-अलग राशि दी गई है, जिससे असंतोष बढ़ा है। उनका कहना है कि इस असमानता को खत्म करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
अब तक प्रशासन की ओर से स्थिति को संभालने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है। साथ ही किसानों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।
हालांकि आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उन्हें ठोस और लिखित निर्णय चाहिए।
स्थानीय लोगों की चिंता
हाईवे पर धरने के कारण आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई वाहन घंटों तक फंसे रहे। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि आंदोलन लंबा चला तो व्यापार पर भी असर पड़ सकता है।
फिर भी, इलाके के कई लोग किसानों के समर्थन में खड़े नजर आए। उनका कहना है कि यदि मुआवजे में भेदभाव हुआ है तो आवाज उठाना जरूरी है।
आगे क्या?
स्थिति फिलहाल संवेदनशील बनी हुई है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और तेज हो सकता है। प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की संभावना जताई जा रही है।
किसानों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन उनकी मांगों को अनदेखा किया गया तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
Farmers in Baytu, Barmer district of Rajasthan have intensified their protest demanding uniform compensation for land acquisition. The Rajasthan farmers protest escalated when police stopped demonstrators near a toll plaza, leading to clashes between women protesters and police personnel. Currently, farmers are staging a dharna on the National Highway, causing traffic disruption. The Barmer Baytu protest highlights concerns over unequal compensation rates and has drawn significant local attention across Rajasthan.




















