AIN NEWS 1: संभल हिंसा मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अनुज चौधरी को अंतरिम राहत देते हुए संभल की सीजेएम अदालत द्वारा दिए गए एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह फैसला उत्तर प्रदेश सरकार और एएसपी अनुज चौधरी की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद फिलहाल संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया है कि मामले की आगे की सुनवाई जारी रहेगी और सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 24 नवंबर 2024 की उस घटना से जुड़ा है, जब संभल के शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में पुलिस कार्रवाई के दौरान गोली चलने की घटना सामने आई थी। संभल के नखासा थाना क्षेत्र के खग्गू सराय मोहल्ले के निवासी यामीन ने सीजेएम (मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि उनके बेटे आलम को पुलिस कार्रवाई के दौरान गोली लगी थी।
याचिका में यह भी कहा गया कि गोली लगने की घटना पुलिस की कार्रवाई का परिणाम थी और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। इसी आधार पर सीजेएम कोर्ट ने संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।
निचली अदालत के इस आदेश के बाद मामला चर्चा में आ गया और पुलिस प्रशासन के भीतर भी हलचल मच गई।
हाईकोर्ट में क्यों पहुंचा मामला?
सीजेएम कोर्ट के आदेश को उत्तर प्रदेश सरकार और एएसपी अनुज चौधरी की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि निचली अदालत ने तथ्यों और कानूनी प्रक्रियाओं पर पर्याप्त विचार किए बिना एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे दिया।
सरकार और अधिकारी की ओर से दायर याचिकाओं में कई कानूनी आधारों का हवाला दिया गया। इनमें यह भी शामिल था कि पुलिस कार्रवाई उस समय कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई थी और घटना की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से एफआईआर के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।
अंतरिम राहत का क्या मतलब है?
हाईकोर्ट द्वारा दी गई यह राहत फिलहाल के लिए है। इसका अर्थ यह है कि जब तक अदालत इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं देती, तब तक सीजेएम कोर्ट का आदेश प्रभावी नहीं रहेगा।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तारीख पर होगी, जहां सभी पक्ष अपनी दलीलें विस्तार से रखेंगे। इसके बाद ही तय होगा कि एफआईआर दर्ज करने का आदेश बरकरार रहेगा या उसे रद्द किया जाएगा।
कानूनी दृष्टिकोण से क्या मायने?
यह मामला केवल एक व्यक्ति या अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। एक ओर याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि उनके बेटे को पुलिस कार्रवाई के दौरान गोली लगी और इसकी जांच होनी चाहिए। वहीं, दूसरी ओर पुलिस और सरकार का पक्ष है कि कार्रवाई परिस्थितियों के अनुरूप थी और बिना विस्तृत जांच के एफआईआर का आदेश उचित नहीं है।
हाईकोर्ट का यह कदम दर्शाता है कि अदालत ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। अंतरिम रोक यह संकेत देती है कि मामले में विस्तृत कानूनी परीक्षण आवश्यक है।
पीड़ित पक्ष की दलील
याचिकाकर्ता यामीन का आरोप है कि उनके बेटे आलम को 24 नवंबर 2024 को पुलिस कार्रवाई के दौरान गोली लगी थी। उन्होंने अदालत से मांग की थी कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाए।
उनका कहना है कि घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अतिरेक हुआ है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
प्रशासन का पक्ष
दूसरी ओर, प्रशासन का तर्क है कि उस दिन क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति थी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि बिना विस्तृत जांच के सीधे एफआईआर दर्ज करने का आदेश देना उचित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
सरकार की ओर से दायर याचिका में यह भी कहा गया कि निचली अदालत के आदेश में कई कानूनी कमियां हैं, जिन्हें उच्च न्यायालय के समक्ष रखा गया है।
आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मामले की अगली सुनवाई में सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। इसके बाद अदालत तय करेगी कि एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी रहेगा या उसे निरस्त कर दिया जाएगा।
इस बीच, अंतरिम राहत के कारण फिलहाल एएसपी अनुज चौधरी और अन्य पुलिस कर्मियों को राहत मिली है। लेकिन अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है।
संभल हिंसा प्रकरण में इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह आदेश कानूनी प्रक्रिया का अहम चरण माना जा रहा है। अदालत ने निचली अदालत के आदेश पर अस्थायी रोक लगाकर यह संकेत दिया है कि मामले की गहराई से समीक्षा आवश्यक है।
एक ओर जहां पीड़ित पक्ष न्याय की मांग कर रहा है, वहीं प्रशासन अपनी कार्रवाई को परिस्थितियों के अनुरूप बता रहा है। अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले की दिशा तय होगी।
The Allahabad High Court has granted interim relief to ASP Anuj Chaudhary in the Sambhal violence case by staying the CJM court’s order directing the registration of an FIR against police officials. The case is linked to an alleged firing incident near Shahi Jama Masjid in Sambhal on November 24, 2024. The Uttar Pradesh government challenged the lower court’s order, arguing procedural and legal concerns. The High Court’s stay order has temporarily halted action while further hearings will determine the legal course in this high-profile Uttar Pradesh police case.


















