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ग्रेटर नोएडा में फर्जी मुठभेड़ का मामला: पूर्व SHO समेत 12 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज, कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई?

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Greater Noida Fake Encounter: FIR Against Former SHO and 11 Police Personnel

ग्रेटर नोएडा फर्जी मुठभेड़ मामला: पूर्व SHO समेत 12 पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुआ मुकदमा

AIN NEWS 1: ग्रेटर नोएडा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें जेवर कोतवाली के पूर्व थाना प्रभारी समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगाते हुए कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है।

कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा

मथुरा निवासी तरुण गौतम ने फरवरी 2024 में गौतमबुद्ध नगर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक अर्जी दाखिल की थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी अनुपस्थिति में पुलिस ने उनके बेटे को गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार किया और उसके साथ मारपीट कर उसे फर्जी मुठभेड़ में फंसा दिया। कोर्ट ने उनकी याचिका को संज्ञान में लेते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।

क्या है पूरा मामला?

तरुण गौतम का आरोप है कि 4 सितंबर 2022 की शाम को जेवर कोतवाली के पुलिसकर्मी उनके घर में बिना किसी वारंट के घुस आए। इस दौरान उन्होंने घर में तोड़फोड़ की, गाली-गलौज की और अलमारी से 22,000 रुपये भी जब्त कर लिए।

पुलिस का कहना था कि तरुण का बेटा सोमेश गौतम जेवर क्षेत्र के नीमका गांव में हुई हत्या के मामले में संदिग्ध है। जबकि पीड़ित पक्ष का दावा है कि उनका बेटा बीटेक का छात्र है और दिल्ली में कोचिंग कर रहा था।

बेटे को उठाकर ले गई पुलिस, फिर हुई बर्बरता

तरुण गौतम के अनुसार, पुलिस उनके बेटे को दिल्ली से उठाकर ले गई, जहां पहले उसे बुरी तरह पीटा गया। इसके बाद आंखों पर पट्टी बांधकर अज्ञात स्थान पर ले जाया गया और वहां उसके पैर में गोली मार दी गई। पुलिस ने इस पूरी घटना को मुठभेड़ का रूप दे दिया।

इतना ही नहीं, सोमेश के खिलाफ कई फर्जी मुकदमे भी दर्ज कर दिए गए और उस पर गैंगस्टर एक्ट तक लगा दिया गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अंततः उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।

कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुआ केस

अदालत के आदेश के बाद जेवर पुलिस ने इस मामले में पूर्व थाना प्रभारी सहित 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस आयुक्त से अनुमति प्राप्त करने के बाद केस दर्ज किया गया।

FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस मामले की जांच कर रही है। आरोपित पुलिसकर्मियों में से कई अभी भी जिले में कार्यरत हैं, जिससे पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच को लेकर आशंका बनी हुई है।

निष्पक्ष जांच की मांग

तरुण गौतम और उनका परिवार इस पूरे मामले की सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्थानीय पुलिस पर उन्हें भरोसा नहीं है क्योंकि आरोपितों में वही पुलिसकर्मी शामिल हैं जो अब भी सिस्टम का हिस्सा हैं।

यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह एक बेहद गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का मामला होगा। न्यायालय के हस्तक्षेप से यह जरूर साबित होता है कि आम नागरिकों को न्याय मिलने की उम्मीद अब भी बची है, लेकिन यह भी जरूरी है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी हो।

In a shocking development from Greater Noida, a fake encounter case has resulted in an FIR against a former SHO and 11 police personnel from the Jevar police station. The incident, which allegedly involved police brutality, illegal detention, and a staged encounter, has raised serious concerns about law enforcement in Uttar Pradesh. The court-ordered FIR adds a new layer to this ongoing Greater Noida police controversy, drawing public and media attention.

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