AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के ट्रॉनिका सिटी इलाके में रविवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब प्रस्तावित डंपिंग ग्राउंड का विरोध कर रहे किसानों और ग्रामीणों की पुलिस से तीखी झड़प हो गई। देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई और पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान कई महिलाएं, बुजुर्ग और किसान घायल हो गए।

क्या है पूरा मामला?
ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र के मीरपुर हिंदू गांव में प्रशासन की ओर से डंपिंग ग्राउंड बनाए जाने की प्रक्रिया चल रही है। आसपास के गांवों—पचायरा, बदरपुर और मीरपुर—के किसान और ग्रामीण लंबे समय से इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि कूड़ा डंपिंग साइट बनने से पूरे इलाके में बदबू फैलेगी और बीमारियों का खतरा बढ़ेगा।
ग्रामीणों का दावा है कि वे शांतिपूर्वक धरना दे रहे थे और प्रशासन को ज्ञापन देने वाले थे। इसी दौरान पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया।
कैसे बिगड़ा माहौल?
ग्रामीणों के अनुसार, पुलिस ने अचानक लोगों को जबरन वहां से हटाना शुरू कर दिया और कुछ को गाड़ियों में बैठाने लगी। महिलाओं ने जब इसका विरोध किया तो माहौल और गरमा गया। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।
स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब गुस्साए लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया। इस झड़प के वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दे रहा है।
कितने लोग हुए घायल?
गांववालों का दावा है कि इस लाठीचार्ज में करीब 50 से 60 लोग घायल हुए हैं। इनमें महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं।
एक बुजुर्ग महिला के सिर में गंभीर चोट आने की बात कही जा रही है।
एक ग्रामीण के कूल्हे की हड्डी टूटने की खबर है।
कई अन्य लोगों को भी चोटें आई हैं।
कुछ लोग बेहोश भी हो गए थे, जिन्हें बाद में अस्पताल ले जाया गया।
हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक घायलों की आधिकारिक संख्या जारी नहीं की गई है।
किसानों का पक्ष
पंचायरा गांव के मनोज का कहना है कि वे सिर्फ अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। उनका कहना है कि यह जमीन गांव के विकास के लिए इस्तेमाल होनी चाहिए। ग्रामीणों की मांग है कि यहां स्कूल या अस्पताल बनाया जाए, न कि कूड़ा डंपिंग साइट।
विनीत शर्मा नामक ग्रामीण ने आरोप लगाया कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिलाओं पर भी बल प्रयोग किया। उनका कहना है कि गांव के लोग लंबे समय से पर्यावरण और स्वास्थ्य को लेकर चिंता जता रहे हैं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी जा रही।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी कई बार इस मुद्दे को लेकर प्रशासन से बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
पुलिस का पक्ष
मौके पर एसीपी लोनी Siddharth Gautam चार थानों की फोर्स के साथ पहुंचे थे।
एसीपी सिद्धार्थ गौतम का कहना है कि पुलिस ने पहले किसानों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन जब लोग नहीं माने और ताला तोड़कर डंपिंग ग्राउंड के अंदर घुस गए, तब स्थिति बिगड़ गई।
पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की ओर से ईंट-पत्थर फेंके गए, जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। दोनों को अस्पताल भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए “हल्का बल प्रयोग” किया गया।
गांव में तनावपूर्ण स्थिति
घटना के बाद गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है और आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है।
स्थानीय लोगों में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। कई ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया गया।
डंपिंग ग्राउंड को लेकर चिंता क्यों?
डंपिंग ग्राउंड बनने से जुड़े कई सवाल उठ रहे हैं:
क्या इससे आसपास के गांवों में प्रदूषण बढ़ेगा?
क्या भूजल प्रभावित होगा?
क्या इससे बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है?
ग्रामीणों का कहना है कि पहले से ही आसपास बदबू की समस्या है और अगर यहां बड़े पैमाने पर कूड़ा डंप किया गया तो हालात और खराब हो जाएंगे।
पहले भी हो चुका है विरोध
ट्रॉनिका सिटी क्षेत्र में डंपिंग ग्राउंड का मुद्दा नया नहीं है। पचायरा, बदरपुर और मीरपुर गांव के किसान पहले भी कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। कई बार पुलिस और किसानों के बीच कहासुनी भी हो चुकी है।
इस बार मामला ज्यादा बढ़ गया और हिंसक झड़प में बदल गया।
आगे क्या?
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार है। पुलिस वीडियो फुटेज की जांच कर रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
ग्रामीणों ने संकेत दिया है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
गाजियाबाद के ट्रॉनिका सिटी में डंपिंग ग्राउंड को लेकर शुरू हुआ विरोध अब बड़ा विवाद बनता जा रहा है। एक ओर किसान और ग्रामीण अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण की चिंता जता रहे हैं, तो दूसरी ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कह रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन के सवाल को सामने ला दिया है। आने वाले दिनों में प्रशासन और किसानों के बीच बातचीत से ही समाधान निकल पाएगा या नहीं—इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
Tension escalated in Ghaziabad’s Tronica City area after farmers protesting against a proposed dumping ground clashed with police. The situation turned violent with reports of lathi charge, stone pelting, and multiple injuries including women and elderly residents. According to local villagers, dozens were injured, while police officials stated that force was used to disperse the crowd after stone pelting. The incident from Mirpur village has intensified the dumping ground controversy in Uttar Pradesh, drawing attention to environmental and public health concerns raised by farmers.




















