AIN NEWS 1: भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास अनेक वीरों की गाथाओं से भरा हुआ है। इन्हीं में एक प्रमुख नाम है Vinayak Damodar Savarkar, जिन्हें हम वीर सावरकर के नाम से जानते हैं। हाल ही में Narendra Modi ने उनके संघर्ष, त्याग और अद्भुत साहस को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से उस ऐतिहासिक घटना का उल्लेख किया जब सावरकर ने अंग्रेजों की गिरफ्त से निकलने के लिए समुद्र में छलांग लगा दी थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह घटना केवल एक भागने का प्रयास नहीं था, बल्कि यह उस अटूट हौसले और देशभक्ति की मिसाल थी, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा दी।
सावरकर का क्रांतिकारी जीवन
वीर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में हुआ था। बचपन से ही उनमें देशभक्ति की भावना प्रबल थी। उन्होंने युवावस्था में ही अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी थी। वे न केवल एक क्रांतिकारी थे, बल्कि लेखक, विचारक और समाज सुधारक भी थे।
उन्होंने ‘अभिनव भारत’ नामक संगठन की स्थापना की और युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन के लिए प्रेरित किया। उस समय ब्रिटिश सरकार उनके विचारों और गतिविधियों से काफी चिंतित थी। सावरकर पर कई आरोप लगाए गए और अंततः उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
मार्सिले की ऐतिहासिक घटना
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में उस ऐतिहासिक घटना को याद किया, जब सावरकर को भारत लाने के लिए एक जहाज से ले जाया जा रहा था। यह जहाज जब फ्रांस के शहर Marseille के तट के पास पहुंचा, तब सावरकर ने एक असाधारण कदम उठाया।
उन्होंने जहाज के शौचालय की खिड़की से समुद्र में छलांग लगा दी। यह कदम अत्यंत जोखिम भरा था, क्योंकि समुद्र की लहरें तेज थीं और सामने ब्रिटिश सुरक्षाकर्मी तैनात थे। इसके बावजूद उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना यह प्रयास किया।
हालांकि अंततः उन्हें फिर से पकड़ लिया गया, लेकिन उनका यह साहसिक प्रयास स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अमिट हो गया। यह घटना बताती है कि सावरकर अंग्रेजी हुकूमत के सामने झुकने वाले नहीं थे।
पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वीर सावरकर का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि मार्सिले में समुद्र में छलांग लगाने की घटना केवल एक व्यक्ति की बहादुरी नहीं थी, बल्कि वह भारत की आजादी के लिए समर्पित एक क्रांतिकारी की अटूट इच्छाशक्ति का प्रमाण थी।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि देश को ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को हमेशा याद रखना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सावरकर के जीवन से प्रेरणा लें और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें।
साहस और संकल्प की मिसाल
सावरकर का जीवन कई कठिनाइयों से भरा रहा। उन्हें काला पानी की सजा सुनाई गई और अंडमान की सेल्युलर जेल में वर्षों तक कठोर यातनाएं झेलनी पड़ीं। लेकिन इन सबके बावजूद उनका मनोबल कभी नहीं टूटा।
मार्सिले की घटना इस बात का प्रतीक है कि जब कोई व्यक्ति अपने उद्देश्य के प्रति पूरी तरह समर्पित होता है, तो वह किसी भी हद तक जा सकता है। सावरकर ने यह दिखाया कि स्वतंत्रता केवल शब्द नहीं, बल्कि उसके लिए त्याग और साहस की आवश्यकता होती है।
आज के संदर्भ में सावरकर
आज जब हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं, तो हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह आजादी हजारों बलिदानों का परिणाम है। वीर सावरकर जैसे क्रांतिकारियों ने अपने जीवन का हर क्षण देश के नाम कर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उनकी स्मृति को नमन करना केवल एक औपचारिक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि यह संदेश है कि हमें अपने इतिहास और उन वीरों को याद रखना चाहिए जिन्होंने देश के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया।
युवाओं के लिए प्रेरणा
आज की युवा पीढ़ी के लिए सावरकर का जीवन एक मजबूत प्रेरणा है। उनका साहस, उनका आत्मविश्वास और देश के प्रति उनका समर्पण यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं माननी चाहिए।
मार्सिले की घटना यह दर्शाती है कि जब इरादे मजबूत हों, तो असंभव भी संभव लगने लगता है। यही भावना आज के भारत को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकती है।
Prime Minister Narendra Modi paid tribute to Veer Savarkar, recalling the historic Marseille incident in which the Indian freedom fighter jumped into the sea in an attempt to escape British custody. The daring act of Vinayak Damodar Savarkar during his journey near Marseille, France, remains a powerful symbol of courage and resistance in the Indian independence movement. Modi highlighted Savarkar’s bravery, determination, and immense contribution to India’s freedom struggle.


















