उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने 101 बटुक ब्राह्मणों का किया सम्मान, प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य से बदसलूकी पर दिया बड़ा बयान

AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की राजनीति और धार्मिक परंपराओं के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम उस समय सामने आया जब राज्य के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अपने सरकारी आवास पर 101 बटुक ब्राह्मणों का सम्मान किया। यह कार्यक्रम न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि हाल ही में प्रयागराज में आयोजित माघ मेला के दौरान एक शंकराचार्य और उनके शिष्यों के साथ कथित बदसलूकी के मामले पर दिए गए उनके बयान ने इसे और भी चर्चा का विषय बना दिया।
बटुक ब्राह्मणों का सम्मान क्यों खास?
लखनऊ स्थित अपने आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ने 101 बटुक ब्राह्मणों को अंगवस्त्र, पूजन सामग्री और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में सनातन परंपरा और वेदों का अध्ययन करने वाले बटुक ब्राह्मणों का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा कि युवा पीढ़ी को धर्म, संस्कृति और परंपराओं के प्रति जागरूक करने में इन बटुकों की बड़ी भूमिका है। ऐसे में उनका सम्मान करना केवल एक परंपरा नहीं बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी भी है।
माघ मेले की घटना पर जताई चिंता
हाल ही में प्रयागराज में चल रहे माघ मेला के दौरान एक शंकराचार्य और उनके शिष्यों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार की खबरें सामने आई थीं। इस घटना ने संत समाज में नाराजगी पैदा कर दी थी और कई धार्मिक संगठनों ने इसकी आलोचना की थी।
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट कहा कि किसी भी संत, महात्मा या धार्मिक गुरु के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल अनुचित है बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था के खिलाफ भी है।
उन्होंने कहा कि सरकार इस प्रकार की घटनाओं को गंभीरता से ले रही है और सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति न हो।
संत समाज के सम्मान की बात
उपमुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा कि संत समाज भारतीय संस्कृति की आत्मा है और उनके सम्मान की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संतों और धर्माचार्यों के मार्गदर्शन से ही समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना होती है।
इस दौरान उन्होंने प्रशासन को भी निर्देश दिए कि धार्मिक आयोजनों में आने वाले संतों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सम्मान का विशेष ध्यान रखा जाए।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
ब्रजेश पाठक के इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। जहां एक ओर संत समाज ने उनके इस कदम की सराहना की है, वहीं विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की तैयारियों पर सवाल भी उठाए हैं।
हालांकि, उपमुख्यमंत्री ने यह साफ कर दिया कि सरकार हर धार्मिक आयोजन को शांतिपूर्ण और सम्मानजनक वातावरण में संपन्न कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था और पारंपरिक धार्मिक आयोजनों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। माघ मेले जैसे विशाल आयोजनों में लाखों श्रद्धालु और सैकड़ों संत-महात्मा शामिल होते हैं, ऐसे में व्यवस्थाओं को संवेदनशील और सतर्क बनाना बेहद जरूरी हो जाता है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आयोजन कराना नहीं बल्कि हर सहभागी को सम्मानजनक अनुभव देना है।
लखनऊ में 101 बटुक ब्राह्मणों का सम्मान और प्रयागराज माघ मेले की घटना पर दिया गया उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का बयान इस समय चर्चा के केंद्र में है। जहां एक ओर यह कार्यक्रम भारतीय परंपराओं के संरक्षण का संदेश देता है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक आयोजनों में संतों के सम्मान और सुरक्षा की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाती है ताकि भविष्य में किसी भी संत या धार्मिक गुरु के साथ इस प्रकार की घटनाएं न हों और धार्मिक आयोजनों की गरिमा बनी रहे।
Uttar Pradesh Deputy Chief Minister Brajesh Pathak recently honored 101 Batuk Brahmins at his official residence in Lucknow and addressed the controversy surrounding the alleged misbehavior with Shankaracharya and his disciples during the Prayagraj Magh Mela. The incident has drawn political attention and raised concerns about the treatment of religious leaders at major spiritual gatherings like Magh Mela 2026 in Uttar Pradesh.


















