AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां एंटी करप्शन टीम ने पुलिस विभाग के एक इंस्पेक्टर को थाने के अंदर ही 75 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई उस समय की गई जब इंस्पेक्टर एक दर्ज मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाने के बदले आरोपी पक्ष से पैसे ले रहा था।

📌 कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, यह मामला बारा थाने से जुड़ा हुआ है। यहां एक केस में फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए इंस्पेक्टर विनोद कुमार सोनकर द्वारा आरोपी पक्ष से 75 हजार रुपये की मांग की गई थी। आरोपी पक्ष ने जब इस मांग को गंभीरता से लिया तो उन्होंने इसकी शिकायत एंटी करप्शन टीम से कर दी।
शिकायत मिलने के बाद टीम ने पूरे मामले की प्राथमिक जांच की और रिश्वत लेने की पुष्टि होने पर इंस्पेक्टर को पकड़ने के लिए एक सुनियोजित जाल बिछाया। योजना के तहत आरोपी पक्ष को इंस्पेक्टर को तय रकम देने के लिए कहा गया।
📌 रंगे हाथों पकड़े गए इंस्पेक्टर
मंगलवार दोपहर जैसे ही आरोपी पक्ष ने थाने के अंदर इंस्पेक्टर को 75 हजार रुपये की रिश्वत दी, पहले से मौके पर मौजूद एंटी करप्शन टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के दौरान इंस्पेक्टर ने पहले अपने पद का रौब दिखाने की कोशिश की, लेकिन जब टीम उन्हें थाने से बाहर ले जाने लगी तो उनका रवैया बदल गया। वे टीम के सामने गिड़गिड़ाने लगे और खुद को छोड़ देने की अपील करते हुए कहने लगे कि “मुझे छोड़ दीजिए, मैं बर्बाद हो जाऊंगा। यह स्टाफ का मामला है, कुछ रहम कीजिए।”
हालांकि, टीम ने किसी भी दबाव या भावनात्मक अपील को नजरअंदाज करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया और आगे की कार्रवाई के लिए घूरपुर थाने ले जाया गया।
📌 किस केस में मांगी गई थी रिश्वत?
यह रिश्वत एक गंभीर आपराधिक मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए मांगी गई थी। दरअसल, नवंबर महीने में एक महिला ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप एक व्यक्ति पर लगाया था। साथ ही, भदोही जिले के सुरियावां थाना क्षेत्र के लुकमानपुर निवासी संतोष कुमार दुबे और दो अन्य लोगों पर पीड़िता से सुलह करने के लिए दबाव बनाने का भी आरोप लगाया गया था।
इस संबंध में बारा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था और पुलिस द्वारा जांच की जा रही थी।
📌 पीड़िता के बयान के बाद बदला केस का रुख
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुछ दिन पहले ही पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराया, जिसमें उसने कहा कि उसने गलतफहमी के चलते मुकदमा दर्ज कराया था और अब वह इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं चाहती।
इस बयान के बाद यह लगभग तय हो गया था कि मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाई जाएगी। इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए इंस्पेक्टर ने आरोपी पक्ष से 75 हजार रुपये की रिश्वत की मांग कर दी।
उन्हें यह मालूम था कि पीड़िता का बयान अदालत में दर्ज हो चुका है और अब केस बंद करने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। ऐसे में उन्होंने फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर पैसों की मांग की।
📌 इंस्पेक्टर का सेवा इतिहास
गिरफ्तार इंस्पेक्टर विनोद कुमार सोनकर मूल रूप से वाराणसी के सारनाथ क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं। वे वर्ष 2012 में दरोगा पद से प्रमोट होकर इंस्पेक्टर बने थे और वर्तमान में बारा थाने में तैनात थे।
उनकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस विभाग में भी हलचल मच गई है और विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
📌 आगे की कार्रवाई
एंटी करप्शन टीम ने इंस्पेक्टर को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। साथ ही, पूरे मामले में विभागीय कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि किसी भी स्तर पर रिश्वतखोरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
In a major anti-corruption crackdown in Prayagraj, an Anti-Corruption Team arrested UP Police Inspector Vinod Kumar Sonkar while accepting a Rs 75,000 bribe for filing a final report in a rape case investigation. The accused had approached the Anti-Corruption Bureau after the inspector demanded money despite the victim withdrawing her complaint before a magistrate. This incident highlights rising concerns over police corruption in Uttar Pradesh and reinforces the need for strict accountability within the law enforcement system.


















