यूपी में बदलेगा मौसम का मिजाज: पूर्वांचल में बारिश-आंधी का अलर्ट, दिन में गर्मी तो रात में ठंड बरकरार
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मौसम करवट लेने की तैयारी में है। खासतौर पर पूर्वांचल के कई जिलों में आसमान पर बादलों का डेरा जमना शुरू हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में इन इलाकों में हल्की बारिश के साथ तेज हवाएं और आंधी देखने को मिल सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी का असर अब मैदानी इलाकों तक पहुंचने लगा है, जिसकी वजह से दिन और रात के तापमान में अंतर साफ महसूस किया जा रहा है।
पूर्वांचल में बदलेगा मौसम, बारिश और तेज हवाओं की संभावना
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेश के कई हिस्सों में अगले चार दिनों तक मौसम अस्थिर बना रह सकता है। इस दौरान 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। बादलों की आवाजाही के बीच कहीं-कहीं हल्की बारिश भी हो सकती है। हालांकि फिलहाल किसी बड़े वेदर सिस्टम के सक्रिय होने के संकेत नहीं मिले हैं, जिससे भारी बारिश या तूफान जैसी स्थिति बनने की आशंका कम है।
शनिवार सुबह प्रदेश के ज्यादातर जिलों में मौसम साफ रहा, लेकिन गोरखपुर समेत पांच शहरों में हल्का कोहरा दर्ज किया गया। वहीं, कई जगहों पर दिन में तेज धूप खिलने से तापमान में बढ़ोतरी हुई। तेज हवा चलने की वजह से हल्की ठंड का अहसास भी बना रहा।
तापमान में उतार-चढ़ाव जारी
पिछले 24 घंटों के दौरान बांदा प्रदेश का सबसे ठंडा जिला रहा, जहां न्यूनतम तापमान 9.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। दूसरी ओर गाजीपुर सबसे गर्म रहा, जहां दिन का तापमान 31.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
प्रमुख जिलों का अधिकतम तापमान (°C में)
गाजीपुर: 31.5°C
बांदा: 30.2°C
वाराणसी: 29.9°C
बहराइच: 29.8°C
लखनऊ: 29.5°C
प्रमुख जिलों का न्यूनतम तापमान (°C में)
बांदा: 9.2°C
निजामाबाद: 11°C
मुजफ्फरनगर: 11.4°C
फतेहपुर: 12°C
फुर्सतगंज: 12.4°C
दिन में बढ़ती गर्माहट और रात में ठंडक का यह मिश्रण आने वाले कुछ हफ्तों तक जारी रह सकता है।
इस बार सर्दी क्यों रही कमजोर?
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इस साल उत्तर प्रदेश में ठंड का असर पिछले दो सालों के मुकाबले कम देखने को मिला। दिसंबर और जनवरी के दौरान औसत अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ज्यादा दर्ज किए गए। 1 जनवरी से 11 फरवरी के बीच ठंड में करीब 36 फीसदी की कमी देखी गई।
इस बार ना तो कड़ाके की ठंड पड़ी और ना ही लंबे समय तक शीतलहर चली। इसका एक बड़ा कारण पश्चिमी विक्षोभ की कम सक्रियता माना जा रहा है। सर्दियों के दौरान सामान्य से कम बारिश भी इसी वजह से हुई।
अब ठंड का आखिरी दौर
विशेषज्ञों का मानना है कि अब सर्दी अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और धीरे-धीरे तापमान में बढ़ोतरी शुरू होगी। फिलहाल वसंत ऋतु का समय चल रहा है, इसलिए सुबह और रात के समय हल्की ठंड बनी रह सकती है, जबकि दोपहर में धूप तेज महसूस होगी। अगले दो से तीन हफ्तों तक मौसम में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है।
मार्च से शुरू होगा गर्मी का असर
मार्च के पहले सप्ताह से ही मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। दिन और रात दोनों के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी की संभावना है। महीने के आखिरी तक प्रदेश के कई जिलों में अधिकतम तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
अप्रैल से जून तक बढ़ेगी तपिश
अप्रैल: तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है
मई: अधिकतम तापमान 42 से 44 डिग्री तक पहुंचने की संभावना
जून: कई जिलों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है
इन महीनों में हीट वेव के दिनों की संख्या भी सामान्य से अधिक रह सकती है, जिससे दिन के साथ-साथ रात में भी गर्मी से राहत मिलना मुश्किल हो जाएगा।
रबी की फसलों पर मंडराया खतरा
तापमान में समय से पहले हो रही बढ़ोतरी किसानों के लिए चिंता का विषय बन सकती है। खासतौर पर रबी की फसलों पर इसका असर पड़ने की आशंका है। गेहूं के दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाएंगे, जिससे उत्पादन घट सकता है।
इसके अलावा सरसों, चना और मटर जैसी फसलें भी गर्म हवाओं की वजह से प्रभावित हो सकती हैं। बढ़ते तापमान के चलते खेतों की नमी तेजी से खत्म होगी, जिससे सिंचाई की जरूरत बढ़ेगी और लागत में इजाफा होगा।
समय से पहले गर्मी से बढ़ेगा संकट
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आने वाले महीनों में गर्मी का यही रुख बना रहता है तो हीट वेव की घटनाएं ज्यादा बार और लंबे समय तक देखने को मिल सकती हैं। खासतौर पर शहरी इलाकों में अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट के कारण तापमान और अधिक बढ़ सकता है।
The latest Uttar Pradesh weather update indicates cloudy skies, rain and thunderstorm alerts in Purvanchal region along with rising daytime temperatures and fluctuating night temperatures. According to IMD weather prediction, heatwave conditions are likely to increase from March to June 2026 across North India, which may significantly impact rabi crops such as wheat, mustard and gram due to early temperature rise and reduced soil moisture.


















