यूपी में सियासी हलचल तेज, मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। राज्य की योगी सरकार के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेजी से चल रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ हफ्तों में सरकार के भीतर कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं, जिनका असर सीधे तौर पर आगामी 2027 विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है।
हाल ही में दिल्ली में हुई बैठक के बाद इन अटकलों को और मजबूती मिली है। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के बीच बातचीत हुई। इसके बाद से यह चर्चा तेज हो गई है कि सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
2027 चुनाव से पहले संतुलन बनाने की कोशिश
सूत्रों के मुताबिक भाजपा नेतृत्व अब 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए नई रणनीति पर काम कर रहा है। पार्टी मानती है कि चुनाव जीतने के लिए सिर्फ सरकारी योजनाओं का प्रदर्शन ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि संगठन की मजबूती, सामाजिक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व भी उतना ही जरूरी होगा।
इसी को ध्यान में रखते हुए भाजपा सरकार और संगठन दोनों को नए स्वरूप में ढालने की तैयारी में है। जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक कई पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव संभव माना जा रहा है।
संगठन में युवाओं और अनुभवी नेताओं का संतुलन
पार्टी के अंदर चर्चा है कि जल्द ही प्रदेश संगठन की नई टीम की घोषणा की जा सकती है। इसमें कुछ पुराने चेहरों को नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं, जबकि कई नए नेताओं को संगठन में जगह मिल सकती है।
भाजपा की कोशिश है कि संगठन में अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा चेहरों को भी मौका दिया जाए, ताकि चुनावी मैदान में पार्टी ज्यादा सक्रिय और प्रभावी नजर आए।
मंत्रिमंडल विस्तार में 15 नए चेहरों की एंट्री संभव
राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में योगी मंत्रिमंडल का संभावित विस्तार भी है। बताया जा रहा है कि इस विस्तार में करीब 15 नए चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है। इनमें कुछ विधायक और कुछ संगठन से जुड़े सक्रिय नेताओं को भी मौका मिल सकता है।
इसके अलावा कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी भी संभव है। सरकार प्रदर्शन के आधार पर मंत्रियों का मूल्यांकन कर नई टीम बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार एक संतुलित और प्रभावी मंत्रिमंडल तैयार करना चाहती है, ताकि प्रदेश के सभी क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
तीसरे डिप्टी सीएम की चर्चा क्यों?
सबसे ज्यादा चर्चा तीसरे उपमुख्यमंत्री पद को लेकर हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपना राजनीतिक संतुलन मजबूत करने के लिए यह बड़ा कदम उठा सकती है।
वर्तमान में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक सरकार में अहम भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन लंबे समय से यह चर्चा चल रही है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और ब्रज क्षेत्र को सरकार में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है।
इसी असंतुलन को दूर करने के लिए पश्चिम यूपी से किसी प्रभावशाली नेता को तीसरा डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है।
पश्चिमी यूपी की अहमियत
पश्चिमी उत्तर प्रदेश को भाजपा राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानती है। विधानसभा की बड़ी संख्या में सीटें इसी क्षेत्र से आती हैं, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती हैं।
पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं द्वारा यह मुद्दा उठाया जा चुका है कि पश्चिमी क्षेत्र को सरकार और संगठन दोनों में मजबूत भागीदारी मिलनी चाहिए। ऐसे में भाजपा इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए संगठनात्मक और राजनीतिक स्तर पर नए प्रयोग कर सकती है।
ब्राह्मण समीकरण साधने की रणनीति
सूत्रों के अनुसार भाजपा ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की दिशा में भी काम कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि पश्चिम यूपी में संगठन की कमान किसी ब्राह्मण नेता को सौंपी जा सकती है।
भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग रणनीति पहले भी चुनावों में कारगर साबित हुई है। ऐसे में पार्टी जातीय संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए अपने नेतृत्व ढांचे में बदलाव कर सकती है।
पूर्वांचल से सत्ता का झुकाव
वर्तमान में सरकार और संगठन दोनों में पूर्वांचल क्षेत्र का प्रभाव ज्यादा नजर आता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य जैसे बड़े नेता इसी क्षेत्र से आते हैं।
यही कारण है कि अब भाजपा पूरे प्रदेश में राजनीतिक संतुलन बनाने के लिए नई रणनीति तैयार कर रही है, ताकि सभी क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व का संदेश दिया जा सके।
2027 चुनाव पर सीधी नजर
भाजपा की पूरी तैयारी अब 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर की जा रही है। मजबूत संगठन, संतुलित मंत्रिमंडल और सामाजिक समीकरणों का सही तालमेल पार्टी की चुनावी सफलता की कुंजी माने जा रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में भाजपा सरकार और संगठन दोनों में बड़े बदलाव कर सकती है, जो प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं।


















