AIN NEWS 1: डिजिटल दौर में जहां ऑनलाइन मनोरंजन के साधनों ने लोगों की जिंदगी को आसान और सुविधाजनक बनाया है, वहीं दूसरी ओर इंटरनेट पर बढ़ते अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट ने समाज के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए पांच ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय यानी Ministry of Information and Broadcasting ने इंटरनेट पर प्रसारित हो रहे अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इन प्लेटफॉर्म्स की पहुंच को देशभर में तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्देश जारी किया है। यह कदम डिजिटल स्पेस में बढ़ती अनियंत्रित सामग्री को नियंत्रित करने की दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है।
📌 क्यों उठाया गया यह कदम?
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, जिन ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक किया गया है, उन पर लंबे समय से ऐसी सामग्री स्ट्रीम की जा रही थी जो न केवल भारतीय कानूनों का उल्लंघन करती थी बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों के भी खिलाफ थी। इन प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद कंटेंट सार्वजनिक शालीनता और मर्यादा के मानकों पर खरा नहीं उतर रहा था।
सरकार का मानना है कि डिजिटल माध्यमों पर उपलब्ध कंटेंट का सीधा प्रभाव समाज, खासकर युवाओं और बच्चों पर पड़ता है। ऐसे में यदि बिना किसी निगरानी के आपत्तिजनक या अश्लील सामग्री प्रसारित होती है, तो यह सामाजिक संरचना को प्रभावित कर सकती है।
⚖️ किन नियमों के तहत हुई कार्रवाई?
इस कार्रवाई को लागू करने के लिए सरकार ने आईटी नियम 2021 और आईटी एक्ट 2000 की धारा 69A के तहत अपने अधिकारों का उपयोग किया है। इन नियमों के अनुसार, यदि कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म देश की संप्रभुता, सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या नैतिक मूल्यों के लिए खतरा बनता है, तो सरकार उसके खिलाफ सख्त कदम उठा सकती है।
सरकार द्वारा जारी निर्देशों के बाद सभी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISPs) को आदेश दिया गया कि वे इन प्लेटफॉर्म्स की वेबसाइट्स और एप्लिकेशन तक पहुंच को तुरंत प्रभाव से बंद कर दें। इसके चलते अब देश के भीतर इन प्लेटफॉर्म्स को एक्सेस करना संभव नहीं होगा।
🌐 डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती जिम्मेदारी
सरकार ने इस कार्रवाई के साथ ही यह स्पष्ट संदेश भी दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अब अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। इंटरनेट केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सूचना और विचारों के आदान-प्रदान का भी प्रमुख साधन बन चुका है।
ऐसे में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने कंटेंट को लेकर सतर्क रहें और यह सुनिश्चित करें कि उनकी सेवाओं के माध्यम से प्रसारित सामग्री समाज के लिए हानिकारक न हो।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि कंटेंट क्रिएशन की आजादी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि किसी भी प्रकार की सामग्री बिना किसी सीमा के प्रसारित की जाए।
👨👩👧👦 युवाओं पर पड़ता है सीधा असर
इंटरनेट और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का सबसे ज्यादा उपयोग आज के युवा और किशोर वर्ग द्वारा किया जाता है। ऐसे में यदि इन माध्यमों पर अश्लील या आपत्तिजनक सामग्री आसानी से उपलब्ध होती है, तो यह उनके मानसिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि कम उम्र में इस तरह के कंटेंट के संपर्क में आने से बच्चों के व्यवहार और सोचने के तरीके में बदलाव आ सकता है, जो भविष्य में सामाजिक समस्याओं को जन्म दे सकता है।
📢 सरकार का स्पष्ट संदेश
इस पूरी कार्रवाई के माध्यम से Government of India ने यह संकेत दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कानून का पालन अनिवार्य है। यदि कोई भी संस्था या प्लेटफॉर्म निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का कहना है कि ऑनलाइन स्पेस को सुरक्षित और जिम्मेदार बनाना समय की मांग है, ताकि डिजिटल इंडिया की परिकल्पना को सही दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।
🔐 आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सरकार डिजिटल कंटेंट की निगरानी को लेकर और भी सख्त कदम उठा सकती है। इसके तहत न केवल नए नियम लागू किए जा सकते हैं, बल्कि पहले से मौजूद दिशा-निर्देशों को भी और मजबूत किया जा सकता है।
यह कार्रवाई अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए भी एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है कि वे अपने कंटेंट को लेकर सतर्क रहें और कानून के दायरे में रहकर ही अपनी सेवाएं प्रदान करें।
The Government of India has taken strict action by blocking five OTT platforms under the IT Rules 2021 and Section 69A of the IT Act 2000 for allegedly streaming obscene and objectionable online content. This move aims to strengthen digital regulation in India and ensure that OTT platforms comply with legal and ethical standards while maintaining public decency across online streaming services.


















