Powered by : PIDIT KO NYAY ( RNI - UPBIL/25/A1914)

spot_imgspot_img

मेरठ में थाने के अंदर मीडिया कवरेज विवाद: एसएसपी ने क्या कहा, पूरा सच जानिए!

spot_img

Date:

AIN NEWS 1: मेरठ में पुलिस थानों के अंदर मीडिया कवरेज, खासकर वीडियोग्राफी, को लेकर उठा विवाद अब कानूनी और प्रशासनिक बहस का विषय बन चुका है। एक वायरल ऑडियो क्लिप के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आया और पत्रकार संगठनों ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता से जोड़कर सवाल उठाए।

अब इस पूरे विवाद पर मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने खुलकर अपनी बात रखी है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

मामला ब्रह्मपुरी सर्कल से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर लगभग 29 सेकंड का एक ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें सर्कल ऑफिसर सौम्या अस्थाना कथित रूप से कहती सुनाई दे रही हैं कि अगर थाने के अंदर कोई पत्रकार वीडियोग्राफी करता है तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए।

ऑडियो सामने आने के बाद यह संदेश तेजी से फैला कि पुलिस थानों के अंदर मीडिया कवरेज पर रोक लगा दी गई है। इससे स्थानीय पत्रकारों में नाराज़गी बढ़ गई और इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश के रूप में देखा जाने लगा।

एसएसपी अविनाश पांडेय ने क्या कहा?

विवाद बढ़ने के बाद मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा:

थानों के अंदर मीडिया कवरेज पर कोई सामान्य या लिखित प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

यह निर्देश मुख्यधारा के पत्रकारों के लिए नहीं था।

कुछ ऐसे लोग, जो बिना अनुमति और बिना पहचान के थानों में अनावश्यक वीडियो बनाते हैं, उनके संदर्भ में सख्ती की बात कही गई थी।

थाना कोई निषिद्ध (Prohibited) स्थान नहीं है।

एसएसपी ने यह भी स्पष्ट किया कि मीडिया को रिपोर्टिंग से नहीं रोका गया है, लेकिन संवेदनशील क्षेत्रों में सावधानी बरतना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि अगर किसी प्रकार की कार्यवाही होती है तो वह उत्तर प्रदेश पुलिस की सोशल मीडिया पॉलिसी 2023 के अनुसार ही होगी, न कि किसी मनमाने मौखिक आदेश के आधार पर।

सूत्रों के अनुसार, प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया कि भविष्य में ऐसे मामलों में स्पष्ट संवाद और लिखित दिशा-निर्देश की प्रक्रिया अपनाई जाए ताकि भ्रम की स्थिति न बने।

पुलिस की चिंता क्या है?

पुलिस अधिकारियों का तर्क है कि थानों के अंदर कुछ स्थान अत्यंत संवेदनशील होते हैं, जैसे:

पूछताछ कक्ष

महिला हेल्प डेस्क

गवाहों के बयान से जुड़े कक्ष

गोपनीय दस्तावेजों का रिकॉर्ड रूम

यदि इन स्थानों की वीडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक हो जाए तो जांच प्रभावित हो सकती है, गवाहों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है और कानूनी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

इसी कारण प्रशासन ने अनियंत्रित वीडियोग्राफी पर आपत्ति जताई।

कानूनी स्थिति क्या कहती है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, जिसमें प्रेस की स्वतंत्रता भी शामिल है।

हालांकि अनुच्छेद 19(2) के तहत सरकार “उचित प्रतिबंध” लगा सकती है, लेकिन ये प्रतिबंध:

लिखित होने चाहिए

स्पष्ट होने चाहिए

अनुपातिक होने चाहिए

सार्वजनिक हित में जरूरी होने चाहिए

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि मौखिक आदेश या अस्पष्ट निर्देश अदालत में टिक नहीं पाते।

यह भी स्पष्ट है कि पुलिस थाने आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम 1923 के तहत “निषिद्ध स्थान” नहीं माने जाते। इसलिए सामान्य रिपोर्टिंग पर पूर्ण प्रतिबंध कानूनी रूप से चुनौती योग्य हो सकता है।

प्रेस बनाम जांच: संतुलन कैसे बने?

यह विवाद मूल रूप से दो अधिकारों के बीच संतुलन का प्रश्न है:

प्रेस की स्वतंत्रता

जांच की गोपनीयता

मीडिया का काम है पारदर्शिता बनाए रखना।

पुलिस का दायित्व है निष्पक्ष और सुरक्षित जांच सुनिश्चित करना।

विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्ण रोक लगाने की बजाय “नियंत्रित अनुमति व्यवस्था” बेहतर विकल्प हो सकता है। जैसे:

केवल निर्धारित क्षेत्र में कवरेज

संवेदनशील कमरों में प्रतिबंध

पूर्व अनुमति की प्रक्रिया

स्पष्ट लिखित गाइडलाइन

फिलहाल स्थिति क्या है?

एसएसपी के बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मुख्यधारा मीडिया पर कोई व्यापक प्रतिबंध लागू नहीं है।

विवाद फिलहाल शांत होता दिख रहा है, लेकिन यह घटना यह जरूर बताती है कि प्रशासनिक संवाद की कमी से कैसे गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं।

मेरठ का यह मामला सिर्फ एक स्थानीय प्रशासनिक विवाद नहीं है, बल्कि यह प्रेस स्वतंत्रता और पुलिस प्रशासन के अधिकारों के बीच संतुलन का उदाहरण बन गया है।

एसएसपी की सफाई के बाद स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो चुकी है कि कोई औपचारिक प्रतिबंध लागू नहीं है।

अब जरूरत है स्पष्ट नीतियों, पारदर्शी संवाद और संतुलित व्यवस्था की, ताकि न तो प्रेस की स्वतंत्रता प्रभावित हो और न ही जांच की गोपनीयता।

Meerut SSP Avinash Pandey clarified that there is no blanket ban on media videography inside police stations after a viral audio allegedly linked to CO Soumya Asthana sparked controversy. The debate centers around press freedom under Article 19(1)(a), reasonable restrictions under Article 19(2), and compliance with the UP Police Social Media Policy 2023. While police stress protection of sensitive investigation areas, authorities have confirmed that mainstream media reporting is not prohibited inside police stations in Meerut.

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
clear sky
24.6 ° C
24.6 °
24.6 °
12 %
4.5kmh
3 %
Tue
35 °
Wed
37 °
Thu
38 °
Fri
38 °
Sat
38 °
Video thumbnail
गाजियाबाद में भव्य होली मिलन समारोह | एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन ट्रस्ट का शानदार आयोजन
07:41
Video thumbnail
Shrimad Bhagwat Katha : Day 7 | Acharya Rajeev Krishna | श्रीमद् भागवत कथा
06:34:49
Video thumbnail
CM Yogi ने मंच से बोल दी ऐसी बात सुनते ही चौंक उठी मुस्लिम महिलाएं ! CM Yogi Lucknow Speech Today
17:28
Video thumbnail
Shrimad Bhagwat Katha : Day 6 | Acharya Rajeev Krishna | श्रीमद् भागवत कथा
04:39:35
Video thumbnail
Shrimad Bhagwat Katha : Day 5 | Acharya Rajeev Krishna | श्रीमद् भागवत कथा
04:06:18
Video thumbnail
कठिन समय में हमारा साथ देने के लिए लोगों का धन्यवाद: Media के सामने आए AAP Convener Arvind Kejriwal
14:33
Video thumbnail
Arvind Kejriwal crying : शराब घोटाले में मुक्त होने के बाद अरविंद केजरीवाल रोने लगे।
00:51
Video thumbnail
Shrimad Bhagwat Katha : Day 4 | Acharya Rajeev Krishna | श्रीमद् भागवत कथा
04:17:12
Video thumbnail
"उनके द्वारा जानकर गलतियां की गई थीं...", Jawaharlal Nehru पर निशाना साधते हुए बोले Sambit Patra
18:47
Video thumbnail
Shrimad Bhagwat Katha : Day 3 | Acharya Rajeev Krishna | श्रीमद् भागवत कथा
02:24:10

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related

रामपुर में बदलते सियासी समीकरण: क्या आजम खान का दौर ढलान पर?

AIN NEWS 1: रामपुर की राजनीति लंबे समय तक...