यूपी में 80% पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर यूनिट फेल, 164 लाइसेंस निलंबित
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में बोतलबंद पानी पीने वालों के लिए एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। अगर आप यह मानकर बोतलबंद पानी खरीदते हैं कि वह पूरी तरह सुरक्षित और शुद्ध है, तो यह खबर आपको सोचने पर मजबूर कर सकती है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की ओर से चलाए गए विशेष अभियान में यह खुलासा हुआ है कि प्रदेश में संचालित पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर और मिनरल वॉटर प्लांटों में से बड़ी संख्या गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतर रही।
विशेष अभियान में चौंकाने वाले खुलासे
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त रोशन जैकब के निर्देश पर पूरे प्रदेश में व्यापक जांच अभियान चलाया गया। इस अभियान की खास बात यह रही कि एक मंडल की टीमें दूसरे मंडल में भेजी गईं, ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके।
जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, वे बेहद चिंताजनक हैं। कई यूनिट्स में साफ-सफाई और रखरखाव की स्थिति खराब मिली। कुछ स्थानों पर पानी में माइक्रोबियल ग्रोथ यानी बैक्टीरिया, वायरस और फंगस की मौजूदगी पाई गई। कई प्लांटों के नमूनों में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और स्क्रेशिया कोलीव जैसे जीवाणु मिले, जो आमतौर पर मल-मूत्र से होने वाले प्रदूषण का संकेत माने जाते हैं।
प्रदेश में कितनी यूनिट पंजीकृत हैं?
एफएसडीए के अनुसार, उत्तर प्रदेश में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर और मिनरल वॉटर के कुल 850 यूनिट लाइसेंसधारी हैं।
इनमें से:
560 यूनिट की भौतिक जांच की गई।
397 प्लांट से पानी के नमूने लेकर लैब में परीक्षण कराया गया।
194 प्लांट का स्तर निर्धारित मानकों से नीचे पाया गया।
119 यूनिट में कोलीफॉर्म और स्क्रेशिया कोलीव बैक्टीरिया की पुष्टि हुई।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि लगभग 80 प्रतिशत जांची गई इकाइयों में किसी न किसी स्तर पर कमी पाई गई।
किन-किन तरह की कमियां मिलीं?
जांच के दौरान कई प्रकार की खामियां सामने आईं:
माइक्रोबियल संक्रमण: पानी में बैक्टीरिया और फंगस की वृद्धि।
कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी: यह संकेत देता है कि पानी किसी तरह से मल-मूत्र के संपर्क में आया हो सकता है।
खनिज तत्वों की अधिकता: कुछ नमूनों में मिनरल्स की मात्रा तय सीमा से अधिक मिली।
सफाई और रखरखाव में लापरवाही: मशीनों और टैंकों की नियमित सफाई नहीं की जा रही थी।
गुणवत्ता नियंत्रण की कमी: कई यूनिट्स में आंतरिक परीक्षण की व्यवस्था कमजोर मिली।
इन खामियों से यह साफ हो गया कि कई प्लांट सिर्फ नाम मात्र के लिए शुद्धता का दावा कर रहे थे।
कितने प्लांटों पर कार्रवाई हुई?
जांच के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए:
164 प्लांटों का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया।
104 यूनिट्स को सुधारात्मक कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किया गया।
जिन प्लांटों में गंभीर गड़बड़ी पाई गई, उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद कराया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मानकों से समझौता किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक है यह पानी?
कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और स्क्रेशिया कोलीव जैसे जीवाणु पानी के जरिए शरीर में प्रवेश कर गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं। इससे डायरिया, उल्टी, पेट दर्द, फूड प्वाइजनिंग और बच्चों व बुजुर्गों में गंभीर संक्रमण हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर पानी में मलजनित बैक्टीरिया मौजूद हों तो वह सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाता है। ऐसे में यह मामला केवल लाइसेंस या नियमों का नहीं, बल्कि लोगों की जान से जुड़ा विषय है।
क्यों जरूरी था यह अभियान?
पिछले कुछ समय से पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर की खपत तेजी से बढ़ी है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लोग नल के पानी के बजाय बोतलबंद पानी को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं।
इसी बढ़ती मांग के बीच कई छोटे-बड़े प्लांट तेजी से खुले। लेकिन सवाल यह था कि क्या सभी प्लांट गुणवत्ता मानकों का पालन कर रहे हैं? इसी शंका के आधार पर एफएसडीए ने विशेष जांच अभियान शुरू किया।
आगे क्या होगा?
आयुक्त रोशन जैकब ने संकेत दिए हैं कि यह अभियान एक बार की कार्रवाई नहीं है। आगे भी नियमित और आकस्मिक निरीक्षण जारी रहेंगे। जिन प्लांटों को नोटिस दिया गया है, उन्हें तय समय में सुधार करना होगा। अगर वे मानकों को पूरा नहीं कर पाए, तो उनका लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या संदेश?
इस पूरे मामले से एक बड़ा सवाल खड़ा होता है—क्या केवल बोतल देखकर पानी को सुरक्षित मान लेना सही है?
उपभोक्ताओं को चाहिए कि:
केवल मान्यता प्राप्त ब्रांड का पानी खरीदें।
बोतल पर निर्माण तिथि और बैच नंबर जांचें।
सील टूटी हुई बोतल कभी न खरीदें।
शक होने पर संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज कराएं।
प्रशासन का सख्त संदेश
एफएसडीए ने साफ कर दिया है कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन यूनिट्स ने नियमों की अनदेखी की है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
यह अभियान न केवल नियमों को लागू करने का प्रयास है, बल्कि लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक जरूरी कदम भी है।
A large-scale inspection drive by the Food Safety and Drug Administration (FSDA) in Uttar Pradesh has revealed that nearly 80% of packaged drinking water and mineral water plants failed to meet prescribed quality standards. Out of 850 licensed units, 560 were inspected and 397 samples were tested, with 194 found below standard and 119 contaminated with coliform bacteria, indicating possible fecal contamination. The authority suspended 164 licenses and issued notices to 104 units, highlighting serious concerns over drinking water safety, water quality testing, and regulatory compliance in Uttar Pradesh.


















