वाराणसी गंगा इफ्तार विवाद: 14 आरोपी जेल भेजे गए, शिकायतकर्ता को मिली जान से मारने की धमकी
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के वाराणसी से जुड़ा गंगा इफ्तार विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है। इस मामले में एक ओर जहां इफ्तार पार्टी करने वाले 14 युवकों को अदालत ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है, वहीं दूसरी ओर इस पूरे मामले में शिकायत करने वाले पक्ष को अब धमकियां मिलने का मामला सामने आया है। इस घटनाक्रम ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी बहस छेड़ दी है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, वाराणसी में पवित्र गंगा नदी के बीच नाव पर सवार होकर 14 मुस्लिम युवकों ने रमजान के दौरान इफ्तार पार्टी आयोजित की थी। आरोप है कि इफ्तार के बाद इन युवकों ने गंगा में हड्डियां फेंकीं, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची। इस घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई और मामला पुलिस तक पहुंचा।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सभी 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। यह मामला तेजी से संवेदनशील बन गया, क्योंकि इसमें धार्मिक आस्था और सार्वजनिक आचरण दोनों जुड़े हुए थे।
अदालत का फैसला
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को मार्च 2026 में एसीजेएम-9 कोर्ट में पेश किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए सभी आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश दिया।
कोर्ट ने यह भी माना कि आरोप केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नाव संचालकों को धमकाने जैसे आरोप भी सामने आए हैं, जो इस मामले को और गंभीर बनाते हैं।
कोर्ट में भावुक हुए आरोपी
सुनवाई के दौरान एक भावुक दृश्य भी देखने को मिला। सभी 14 आरोपी युवक अदालत में रोते हुए नजर आए और उन्होंने कान पकड़कर अपनी गलती के लिए माफी भी मांगी। हालांकि, उनकी इस भावुक अपील का अदालत के फैसले पर कोई असर नहीं पड़ा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून के तहत गंभीर आरोपों में नरमी बरतना उचित नहीं होगा, खासकर तब जब मामला सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़ा हो।
किन धाराओं में मामला दर्ज?
पुलिस ने इस मामले में आईटी एक्ट की धारा 67 के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 365 और 308(5) जैसी गंभीर धाराएं भी जोड़ दी हैं। इन धाराओं के जुड़ने के बाद आरोपियों के खिलाफ मामला और मजबूत हो गया है, जिसके चलते उन्हें तत्काल जमानत नहीं मिल सकी।
इसके अलावा, अदालत ने आरोपियों के आपराधिक इतिहास (क्रिमिनल हिस्ट्री) की भी जानकारी मांगी है, ताकि यह देखा जा सके कि वे पहले भी किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल रहे हैं या नहीं। इस पर अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 को तय की गई है।
शिकायतकर्ता को मिली धमकी
इस पूरे मामले में एक नया मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता और भारतीय जनता युवा मोर्चा से जुड़े नेता को जान से मारने की धमकी मिलने की खबर सामने आई। यह धमकी मिलने के बाद माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है।
इस संबंध में युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल, नाव संचालकों और हिंदू पक्ष के वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें फोन और अन्य माध्यमों से डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
पुलिस ने धमकी की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही, पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि धमकी देने वाले लोग कौन हैं और उनका इस पूरे विवाद से क्या संबंध है।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
यह मामला अब केवल एक स्थानीय विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन चुका है। विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों के लोग इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
कुछ लोग इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के नजरिए से देख रहे हैं।
आगे क्या?
अब इस मामले में सभी की नजरें 23 मार्च 2026 की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत आरोपियों की क्रिमिनल हिस्ट्री के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी। साथ ही, धमकी के मामले में पुलिस की जांच भी अहम साबित होगी।
यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या इससे जुड़े सभी पहलुओं पर निष्पक्ष कार्रवाई हो पाती है या नहीं।
The Varanasi Ganga Iftar controversy has sparked major debate after 14 youths were sent to judicial custody over an incident involving an iftar gathering on the Ganga river. The case intensified when the complainant, a BJP youth leader, received death threats, raising serious concerns about law and order in Uttar Pradesh. With charges under IT Act and BNS sections, the Varanasi court has taken a strict stance, making this case a significant example of religious sensitivity, legal action, and public safety in India.


















