मुख्य बिंदु:
• अटौर और भदौली गांव के युवाओं ने सेना में लेफ्टिनेंट बनकर रचा इतिहास
• गांव अटौर में हुआ भव्य सम्मान समारोह, सैकड़ों लोग हुए शामिल
• परिवार और गांव की प्रेरणा से हासिल की सफलता, युवाओं के लिए बने मिसाल
AIN NEWS 1 गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक गर्व की खबर सामने आई है, जहां दो होनहार युवाओं ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। अटौर गांव के मुकुल सहलोत और भदौली गांव के सिद्धार्थ त्यागी की इस उपलब्धि ने आसपास के गांवों में भी उत्साह और गर्व का माहौल बना दिया है।
दोनों युवाओं के सम्मान में अटौर गांव में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। यह समारोह हिंदू युवा संगठन भारत के जिला उपाध्यक्ष विश्वेंद्र सिंह के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जो पूरे कार्यक्रम के केंद्र में रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक तरीके से हुई, जिसमें दोनों नव-नियुक्त लेफ्टिनेंटों का मंच पर स्वागत किया गया। जैसे ही मुकुल सहलोत और सिद्धार्थ त्यागी मंच पर पहुंचे, पूरे परिसर में तालियों की गूंज सुनाई दी। ग्रामीणों ने दोनों युवाओं का पगड़ी पहनाकर, फूलों की मालाएं डालकर, बुके देकर और शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया। इस दौरान युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला और कई लोगों ने देशभक्ति के नारे लगाकर माहौल को और जोशपूर्ण बना दिया।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान रणवीर सिंह, पूर्व प्रधान प्रत्याशी विजय शर्मा, श्याम सिंह चौधरी, बाबा ब्रह्म सिंह, पूर्व प्रधान तेजराम सिंह और पूर्व बीडीसी सदस्य संदीप शर्मा सहित कई सम्मानित नागरिक उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने अपने संबोधन में दोनों युवाओं की मेहनत, अनुशासन और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के समय में जहां कई युवा अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं, वहीं मुकुल और सिद्धार्थ ने अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा और कड़ी मेहनत के दम पर सेना जैसी प्रतिष्ठित सेवा में स्थान प्राप्त किया।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि ऐसे युवा समाज के लिए प्रेरणा होते हैं। वे न केवल अपने परिवार का नाम रोशन करते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी सही दिशा दिखाते हैं। उन्होंने अन्य युवाओं से अपील की कि वे भी देश सेवा को अपना लक्ष्य बनाएं और अनुशासन व मेहनत के रास्ते पर चलें।
सम्मान समारोह के दौरान दोनों नव-नियुक्त लेफ्टिनेंटों ने भी मंच से अपने विचार साझा किए। मुकुल सहलोत और सिद्धार्थ त्यागी ने कहा कि उनका सपना बचपन से ही भारतीय सेना में जाने का था। उन्होंने बताया कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत की, नियमित अभ्यास किया और हर चुनौती का सामना धैर्य के साथ किया। उन्होंने अपने माता-पिता, परिवार और गांव के लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग के बिना यह सफलता संभव नहीं थी।
मुकुल सहलोत ने विशेष रूप से अपने पिता संजय सहलोत का उल्लेख किया, जो स्वयं पूर्व सैनिक हैं और वर्तमान में दिल्ली पुलिस में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता से ही उन्हें अनुशासन और देशभक्ति की प्रेरणा मिली। वहीं सिद्धार्थ त्यागी ने अपने पिता शिवकुमार त्यागी का जिक्र करते हुए कहा कि एक किसान परिवार से होने के बावजूद उनके पिता ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और कभी भी संसाधनों की कमी को उनके सपनों के आड़े नहीं आने दिया।
दोनों अधिकारियों ने यह भी कहा कि अब जब वे भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गए हैं, तो उनकी जिम्मेदारियां और भी बढ़ गई हैं। उन्होंने देश की रक्षा के लिए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से सेवा करने का संकल्प लिया। उनके इस संकल्प को सुनकर वहां मौजूद लोगों ने जोरदार तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया।
कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि मुकुल सहलोत और सिद्धार्थ त्यागी जैसे युवा ही देश का भविष्य हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। इस आयोजन ने न केवल दोनों युवाओं का सम्मान किया, बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं में एक नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार भी किया।
गाजियाबाद के इन दो बेटों की सफलता आज हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को साकार करना चाहता है। मुकुल और सिद्धार्थ ने यह दिखा दिया है कि साधारण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद असाधारण उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।


















