मथुरा में साधु की मौत के बाद बवाल: हाईवे जाम, पथराव और पुलिस कार्रवाई, हादसा या साजिश?
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में एक साधु की दर्दनाक मौत के बाद हालात अचानक बिगड़ गए। इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय लोगों को झकझोर दिया, बल्कि पूरे इलाके में तनाव और गुस्से का माहौल बना दिया। मृतक साधु की पहचान 65 वर्षीय चंद्रशेखर बाबा के रूप में हुई, जिन्हें लोग “फरसा वाले बाबा” के नाम से जानते थे।
बताया जा रहा है कि शनिवार तड़के बाबा अपने दो साथियों के साथ एक ट्रक का पीछा कर रहे थे। उन्हें सूचना मिली थी कि ट्रक में गौवंश को ले जाया जा रहा है। इसी शक के आधार पर उन्होंने ट्रक को रोकने की कोशिश की।
कैसे हुआ हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाबा ने ट्रक को ओवरटेक कर अपनी बाइक उसके आगे खड़ी कर दी। तभी पीछे से आ रहे दूसरे ट्रक ने अचानक रफ्तार बढ़ा दी और बाबा को कुचल दिया। इस हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना की खबर तेजी से पूरे इलाके में फैल गई। देखते ही देखते हजारों लोग मौके पर पहुंच गए और गुस्से में आकर दिल्ली-मथुरा हाईवे को जाम कर दिया।
हाईवे पर बवाल और हिंसा
भीड़ ने आरोप लगाया कि यह कोई साधारण हादसा नहीं बल्कि गौतस्करों की साजिश है। लोगों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और एनकाउंटर की मांग की।
जब पुलिस जाम खुलवाने पहुंची, तो स्थिति और बिगड़ गई। भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। कुछ पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ भी की गई।
हालात बेकाबू होते देख पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। कुछ जगह फायरिंग की भी खबर सामने आई।
प्रशासन और सरकार का रुख
इस मामले का संज्ञान लेते हुए योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
वहीं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शैलेश पांडे ने अलग ही तस्वीर पेश की। उनके अनुसार, यह एक दुर्घटना थी। कोहरे की वजह से पीछे से आ रहे ट्रक ने खड़े ट्रक को टक्कर मार दी, जिसकी चपेट में बाबा आ गए।
डीआईजी ने यह भी साफ किया कि ट्रक में कोई गौवंश नहीं था और मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। उपद्रव करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही गई है। अब तक 8 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है।
राष्ट्रपति की मौजूदगी से बढ़ी संवेदनशीलता
घटना स्थल से करीब 25 किलोमीटर दूर द्रौपदी मुर्मू उस समय गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा कर रही थीं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही सख्त थी, जिससे यह मामला और संवेदनशील हो गया।
अंतिम संस्कार को लेकर विवाद
चंद्रशेखर बाबा का अंतिम संस्कार आजनौंख गांव स्थित उनकी गौशाला में करने की तैयारी की गई। हालांकि, ग्रामीणों और गौसेवकों ने पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया और शव पुलिस को नहीं सौंपा।
कुछ लोगों ने मांग रखी कि जब तक पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा नहीं किया जाता, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
गौसेवकों की मांगें
गौशाला से जुड़े लोगों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख हैं:
बाबा को शहीद का दर्जा दिया जाए
उनके नाम पर स्मारक बनाया जाए
क्षेत्र में पुलिस चौकी स्थापित की जाए
बाबा के करीबी लोगों को लाइसेंसी हथियार दिए जाएं
गौशाला को सरकारी संरक्षण में लिया जाए
प्रशासन ने इन मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है और कुछ मांगों को मानने की बात कही है।
धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रिया
इस घटना पर धार्मिक जगत से भी प्रतिक्रिया आई है। एक शंकराचार्य ने कहा कि सरकार गौ-रक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग नजर आती है। उन्होंने आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
आगे क्या?
फिलहाल प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने में जुटा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है कि यह महज एक हादसा था या इसके पीछे कोई साजिश है।
स्थानीय लोगों में गुस्सा अभी भी बना हुआ है, लेकिन प्रशासन की कोशिश है कि बातचीत और कार्रवाई के जरिए हालात को सामान्य किया जाए।
The Mathura sadhu death incident has sparked widespread outrage across Uttar Pradesh, raising serious questions about cow smuggling, law and order, and public safety. The gaurakshak, popularly known as Baba Chandrashekhar, died after being allegedly run over by a truck, leading to massive protests, highway blockades, and clashes with police. While authorities claim it was an accident due to low visibility, locals suspect a deeper conspiracy involving cow smugglers. The incident has drawn attention from the UP government, with Chief Minister Yogi Adityanath ordering strict action. This developing Mathura violence case continues to remain in the spotlight.


















