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मेरठ सेंट्रल मार्केट सीलिंग: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 44 दुकानें बंद, व्यापारियों में आक्रोश और प्रदर्शन!

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AIN NEWS 1: मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। आवास एवं विकास परिषद ने यहां मौजूद 44 व्यावसायिक भवनों को सील कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया है और व्यापारियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।

बताया जा रहा है कि यह मार्केट मेरठ के प्रमुख कारोबारी केंद्रों में से एक है, जहां हर महीने करीब 20 करोड़ रुपये का कारोबार होता था। ऐसे में अचानक हुई सीलिंग की कार्रवाई ने सैकड़ों व्यापारियों और उनके परिवारों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है।

🔴 दूसरे दिन भी जारी रहा हंगामा

सीलिंग के दूसरे दिन बुधवार को भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। जैसे ही अधिकारी आगे की कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंचे, गुस्साए व्यापारी सड़क पर बैठ गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

इस दौरान माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि एक व्यापारी अचानक बेहोश हो गया। साथी व्यापारियों ने तुरंत उसे संभाला और एम्बुलेंस के जरिए जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत को स्थिर बताया और करीब दो घंटे बाद उसे घर भेज दिया गया।

😢 महिलाओं का फूट-फूट कर रोना

जब दुकानों को सील किया जा रहा था, तो कई दुकानदारों के परिवार की महिलाएं मौके पर पहुंच गईं। अपनी आजीविका बंद होती देख वे खुद को संभाल नहीं पाईं और रोने लगीं। यह दृश्य बेहद भावुक और पीड़ादायक था।

एक व्यापारी ने भावुक होकर कहा— “सरकार ने हमें बर्बाद कर दिया है। अधिकारियों ने हमें गुमराह किया। हमसे करोड़ों रुपये वसूले गए, लेकिन अब हमारी दुकानों पर ताला लगाया जा रहा है।”

व्यापारियों का आरोप है कि उनसे करीब 70 करोड़ रुपये तक की वसूली की गई थी, फिर भी उन्हें राहत नहीं मिली।

🏛️ क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह पूरा मामला लंबे समय से न्यायालय में चल रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए शास्त्रीनगर की सेंट्रल मार्केट में 44 संपत्तियों को सील करने का स्पष्ट आदेश दिया।

मंगलवार शाम को व्यापारियों को इस आदेश की लिखित जानकारी दी गई। इसके बाद बुधवार सुबह से ही आवास एवं विकास परिषद की सात अलग-अलग टीमों ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी। कार्रवाई की शुरुआत सुधा हॉस्पिटल के पास से की गई और शाम तक सभी 44 दुकानों को सील कर दिया गया।

⚖️ सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ आदेश दिया, बल्कि अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। सोमवार को कोर्ट ने मेरठ के पूर्व कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद और आवास विकास परिषद के चेयरमैन पी. गुरुप्रसाद को तलब किया था।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूर्व कमिश्नर से कड़ा सवाल पूछा कि आखिर उन्होंने किस आधार पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को रोका था। जवाब में बताया गया कि व्यापारियों के साथ एक बैठक हुई थी, जिसमें कुछ सुझाव सामने आए थे।

लेकिन कोर्ट इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि इसे “मिनट्स” बताकर आदेश की तरह पेश किया गया, जो गलत है। इसके बाद कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और स्पष्ट किया कि आदेश का पालन न करना गंभीर लापरवाही है।

चेयरमैन गुरुप्रसाद ने भी कोर्ट को बताया कि कमिश्नर के निर्देशों के चलते वे कार्रवाई नहीं कर पाए थे। इस पर कोर्ट ने पूर्व कमिश्नर को अपनी गलती स्वीकार करने और लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया।

🚨 भारी पुलिस बल की तैनाती

कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह की अनहोनी को रोकने के लिए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया था। पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया, ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।

हालांकि, इसके बावजूद व्यापारियों का गुस्सा कम नहीं हुआ और कई जगहों पर नोकझोंक भी देखने को मिली।

🗣️ राजनीति भी गर्माई

इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई। समाजवादी पार्टी के नेता जीतू नागपाल मौके पर पहुंचे और व्यापारियों के समर्थन में सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

इस पर एडीएम सिटी ब्रजेश सिंह नाराज हो गए। उन्होंने सख्त लहजे में कहा— “यहां राजनीति करने की जरूरत नहीं है। अगर व्यापारियों की समस्या पर बात करनी है तो करें, लेकिन राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की तो कार्रवाई की जाएगी।”

इस पर सपा नेता ने जवाब दिया कि वे खुद भी व्यापारी हैं और व्यापारियों के हित की बात करने आए हैं।

📉 व्यापारियों के सामने संकट

सीलिंग की इस कार्रवाई के बाद व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कई दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी इन दुकानों में लगा दी थी।

अब अचानक दुकान बंद होने से उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है। कई व्यापारियों ने सरकार से अपील की है कि उन्हें राहत दी जाए या कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

🔍 आगे क्या?

फिलहाल, सभी 44 दुकानों को सील कर दिया गया है और प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कर चुका है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे इस मामले में क्या राहत मिलती है या नहीं।

व्यापारियों का कहना है कि वे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे और अपने हक के लिए आवाज उठाते रहेंगे।

The Meerut Central Market sealing case has gained national attention after the Supreme Court ordered the closure of 44 commercial properties in Shastri Nagar. The action by the Housing Development Council triggered massive protests among traders, as businesses generating nearly ₹20 crore monthly were impacted. The incident highlights legal enforcement, urban development issues, and growing tension between authorities and local businesses in Uttar Pradesh.

The Meerut Central Market sealing case has gained national attention after the Supreme Court ordered the closure of 44 commercial properties in Shastri Nagar. The action by the Housing Development Council triggered massive protests among traders, as businesses generating nearly ₹20 crore monthly were impacted. The incident highlights legal enforcement, urban development issues, and growing tension between authorities and local businesses in Uttar Pradesh.

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