AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। खाद्य सुरक्षा विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर करीब 28 क्विंटल नकली पनीर बरामद किया है। इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस अवैध कारोबार को दो सगे भाई मिलकर चला रहे थे, जिनका नेटवर्क सिर्फ मेरठ तक सीमित नहीं था, बल्कि दिल्ली और उत्तराखंड तक फैला हुआ था।
कैसे हुआ खुलासा
सूत्रों के अनुसार, खाद्य विभाग को काफी समय से शिकायतें मिल रही थीं कि मेरठ के कुछ इलाकों में बड़े पैमाने पर नकली पनीर तैयार किया जा रहा है और उसे बाजार में असली बताकर बेचा जा रहा है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने गुप्त तरीके से जांच शुरू की।
जांच के दौरान अधिकारियों को कुछ संदिग्ध फैक्ट्रियों की जानकारी मिली। इसके बाद एक विशेष टीम गठित कर इन स्थानों पर अचानक छापा मारा गया। छापेमारी के दौरान जो सामने आया, उसने सभी को हैरान कर दिया।
फैक्ट्रियों में क्या मिला
जब टीम फैक्ट्री के अंदर पहुंची तो वहां का नजारा बेहद चिंताजनक था। साफ-सफाई का कोई ध्यान नहीं रखा गया था और बेहद गंदगी के बीच पनीर बनाया जा रहा था। मौके से:
करीब 28 क्विंटल नकली पनीर
बड़ी मात्रा में मिल्क पाउडर
रिफाइंड तेल
कई प्रकार के खतरनाक केमिकल
नकली ब्रांडिंग के पैकेट
बरामद किए गए।
अधिकारियों के मुताबिक, इन केमिकल्स का इस्तेमाल पनीर को असली जैसा दिखाने और उसकी बनावट को सख्त करने के लिए किया जाता था, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है।
दो सगे भाई चला रहे थे गिरोह
जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरे रैकेट को दो सगे भाई संचालित कर रहे थे। दोनों भाइयों ने अलग-अलग जगहों पर फैक्ट्रियां लगा रखी थीं, ताकि पुलिस और प्रशासन की नजर से बचा जा सके।
ये दोनों आरोपी लंबे समय से इस धंधे में शामिल थे और धीरे-धीरे उन्होंने एक बड़ा सप्लाई नेटवर्क खड़ा कर लिया था। वे अपने नकली पनीर को असली बताकर होटल, ढाबों और बाजारों में सप्लाई करते थे।
दिल्ली और उत्तराखंड तक सप्लाई
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह नकली पनीर सिर्फ मेरठ में ही नहीं, बल्कि दिल्ली और उत्तराखंड के कई शहरों में भी भेजा जा रहा था। इसका मतलब है कि हजारों लोग अनजाने में इस मिलावटी पनीर का सेवन कर रहे थे।
फूड डिपार्टमेंट के अधिकारियों का कहना है कि वे अब इस नेटवर्क के अन्य कनेक्शन को भी खंगाल रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन-किन जगहों पर यह सप्लाई की जा रही थी।
स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का नकली पनीर कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इसमें इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स:
पेट और आंतों से जुड़ी समस्याएं
लिवर और किडनी पर असर
फूड प्वाइजनिंग
लंबे समय में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा
पैदा कर सकते हैं।
खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह और भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है।
प्रशासन की कार्रवाई
छापेमारी के बाद प्रशासन ने दोनों फैक्ट्रियों को सील कर दिया है और मौके से बरामद सभी सामान को जब्त कर लिया गया है। आरोपियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी और दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी।
आगे की जांच जारी
फिलहाल पुलिस और खाद्य विभाग की टीम इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि:
इस गिरोह में और कौन-कौन शामिल हैं
किन-किन शहरों में सप्लाई की जा रही थी
क्या कोई बड़े कारोबारी या सप्लायर भी इसमें शामिल हैं
लोगों के लिए चेतावनी
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे पनीर खरीदते समय सावधानी बरतें। हमेशा भरोसेमंद दुकानों से ही खरीदारी करें और अगर किसी भी उत्पाद को लेकर शक हो तो तुरंत शिकायत करें।
A massive fake paneer racket in Meerut has been exposed by the food safety department, leading to the seizure of 28 quintals of adulterated paneer. The illegal factories, operated by two brothers, were using harmful chemicals and supplying fake dairy products to major regions including Delhi and Uttarakhand. This shocking food adulteration case highlights serious health risks associated with fake paneer consumption and raises concerns about food safety standards in India.


















